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TEMPLE : सूरत का अनोखा मंदिर जहां नहीं होती पूजा

सूरत. शहर के डुमस में एक अनोखा मंदिर चर्चा का विषय बना हुआ है। ’टेम्पल ऑफ विश ’ Temple of Wish नाम के इस मंदिर की विशेषता यह है कि यहां कोई पुजारी नहीं है और ना ही अन्य मंदिरों की तरह पूजा-अर्चना की जाती है। यहां आने वाले श्रद्धालु अपनी इच्छा पूर्ति के लिए मंदिर में लगाया गया घंटा बजाते हैं।

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TEMPLE : सूरत का अनोखा मंदिर जहां नहीं होती पूजा

TEMPLE : सूरत का अनोखा मंदिर जहां नहीं होती पूजा

वर्ष 2007 में डुमस में ’ टेम्पल ऑफ विश ’ Temple of Wish बनाया गया। टेम्पल में विश्व माता का स्वरूप है, जिसे यूनिवर्सल मदर कहा जाता है। मंदिर के प्रवेश द्वार पर घंटा लगाया गया है। यहाकिहा जाता है कि आने वाका व्यक्ति घंटा बजाकर इच्छापूर्ति की कामना करता है। घंटे की ध्वनि एक कॉस्मिक एनर्जी है। इस ध्वनि से यहां आने वाले व्यक्ति को सर्वोच्च शक्ति परमात्मा की अनुभूति होती है और वे अपनी इच्छा परमात्मा को बताते हैं।

- केंद्र में माता स्वरूप देवी :
Temple of Wish मंदिर को लक्ष्मीजी के श्रीयंत्र का आकार दिया गया है और मंदिर के केंद्र में माता स्वरूप देवी की स्थापना की गई है। इस प्रतिमा के एक हाथ में कमल और दूसरे हाथ में वेद है। मंदिर संचालक प्रदीप कापड़िया का कहना है कि टेम्पल में जो प्रतिमा है वह विश्व माता का रूप है। हमारी प्रथम गुरु माता होती है। मंदिर का निर्माण इस तरह किया गया है कि आने वाले 65 सालों तक इसे किसी प्रकार का नुकसान नहीं होगा।
- इसलिए नहीं होती पूजा :
मानना है कि पंचमहाभूत ईश्वरीय तत्व है। पृथ्वी, अग्नि, वायु, जल और आकाश जिससे मनुष्य का शरीर बना है। Temple of Wish मंदिर का सूर्य प्रकाश, बारिश और वायु से अभिषेक होता है। यह प्रतिमा पृथ्वी तत्व से बनी है। इस वजह से यहां पूजा नहीं की जाती है।