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Surat/ ग्रीष्मा हत्या मामले में छह और गवाहों की गवाही दर्ज

आज पुलिस और फैनिल के दोस्तों की गवाही

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Surat/ ग्रीष्मा हत्या मामले में छह और गवाहों की गवाही दर्ज

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सूरत. दिनदहाड़े गला रेत कर कॉलेज छात्रा ग्रीष्मा वेकरिया की हत्या के मामले में आरोपी फेनिल गोयाणी के खिलाफ सेशन कोर्ट में जारी डे-टू-डे सुनवाई के दौरान गुरुवार को छह और गवाहों की गवाही सेशन कोर्ट में दर्ज की गई। शुक्रवार को और 12 गवाहों को कोर्ट के समक्ष पेश किया जाएगा।


लोकाभियोजक नयन सुखड़वाला ने बताया कि गुरुवार को सुनवाई के दौरान ग्रीष्मा के मामा, उसके पिता के दोस्त और उसकी सहेलियां मिलाकर कुल 6 गवाह कोर्ट में पेश किए गए। इनमें से एक गवाह हरेश था, जिसने कोर्ट के समक्ष कहा कि आरोपी फेनिल इससे पहले कतारगाम थाने में कार चोरी के मामले में पकड़ा जा चुका है। फेनिल ग्रीष्मा को परेशान कर रहा था और ग्रीष्मा के पिता की शिकायत के बाद मैंने फेनिल को फटकार भी लगाई थी। सभी छह गवाहों की गवाही दर्ज करने के बाद कोर्ट ने शुक्रवार तक सुनवाई टाल दी। शुक्रवार को 12 गवाहों को कोर्ट के समक्ष पेश किया जाएगा। इनमें मामले की जांच से जुड़े पुलिस
अधिकारी और कर्मी, आरोपी फेनिल के साथ चाकू खरीदने गया तो वह दोस्त और उसके अन्य दोस्त शामिल हैं। गौरतलब है कि 12 फरवरी को आरोपी फेनिल ने कामरेज में ग्रीष्मा के घर के बाहर ही उसकी गला रेत कर हत्या कर दी थी तथा उसके चाचा और भाई पर जानलेवा हमला किया था।

क्लेम की राशि चुकाने का बीमा कंपनी को ग्राहक कोर्ट का आदेश


सूरत. पैर के ऑपरेशन के लिए हुए खर्च का क्लेम नामंजूर करने वाली बीमा कंपनी को ग्राहक कोर्ट से झटका लगा है। कोर्ट ने बीमाधारक की शिकायत याचिका मंजूर करते हुए क्लेम की राशि ब्याज समेत चुकाने का आदेश दिया है।


प्रकरण के अनुसार बारडोली नालंदा पार्क निवासी परेश बाबू शाह ने अधिवक्ता मोना कपूर के जरिए ऑरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी के खिलाफ ग्राहक कोर्ट में शिकायत की थी। परेश शाह ने बीमा कंपनी से मेडिक्लेम पॉलिसी खरीदी थी। पॉलिसी की लागू अवधि के दौरान उनके एक पैर में दर्द होने लगा और निजी अस्पताल में ऑपरेशन करवाना पड़ा था। ऑपरेशन के लिए खर्च हुए 37,613 रुपए का क्लेम उन्होंने बीमा कंपनी के समक्ष किया था, जो बीमा कंपनी ने नामंजूर कर दिया था। ग्राहक कोर्ट में सुनवाई के दौरान अधिवक्ता मोना कपूर ने दलीलें पेश कर बीमा कंपनी की ग्राहक सेवा में क्षति साबित कर दिखाई। अंतिम सुनवाई के बाद कोर्ट ने शिकायत याचिका मंजूर करते हुए क्लेम की राशि 7 फीसदी वार्षिक ब्याज के साथ चुकाने का बीमा कंपनी को आदेश दिया।