28 अप्रैल 2026,

मंगलवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

लापरवाही ने छीन लिया तापी का अमृत तत्व

शहर की लाइफलाइन तापी कई बरस से वेंटिलेटर पर है। प्रदूषण की हालत यह है कि शहर में तापी का जल कहीं भी सीधे आचमन लायक नहीं...

3 min read
Google source verification
The nectar of Tapi snatched negligence

The nectar of Tapi snatched negligence

सूरत।शहर की लाइफलाइन तापी कई बरस से वेंटिलेटर पर है। प्रदूषण की हालत यह है कि शहर में तापी का जल कहीं भी सीधे आचमन लायक नहीं बचा है। तापी के प्रदूषण को लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने एक एनजीओ की शिकायत पर मनपा आयुक्त समेत केंद्र और राज्य सरकार के आला अधिकारियों को नोटिस भेजा है। यह पहला मौका नहीं है, जब एनजीटी ने तापी को लेकर आंखें तरेरी हों। पहले भी एनजीटी तापी में बढ़ रहे प्रदूषण पर चिंता जता चुका है।

इसके बावजूद न स्थानीय प्रशासन ने इसे गंभीरता से लिया, न राज्य सरकार ने। यही वजह है कि निजी कंपनियों का ही नहीं, मनपा का लिक्विड वेस्ट भी कई जगह सीधे तापी में बहाया जा रहा है। तापी शुद्धिकरण को लेकर मनपा प्रशासन चिंता जताता रहा है, लेकिन तापी में गिर रहे नालों को बंद करने में उसने उतनी तत्परता नहीं दिखाई।

पर्यावरण संरक्षण की नियामक संस्था नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने पहले भी तापी की सेहत से हो रहे खिलवाड़ पर नाराजगी जताते हुए गाइडलाइन जारी की थी। एनजीटी की नसीहतें फाइलों में धूल फांक रही हैं। नदियों की सेहत पर पहले जारी हुई रिपोर्ट में तापी नदी उन शीर्ष नदियों में शामिल थी, प्रदूषण के कारण जिनका पानी नहाने लायक भी नहीं बचा है।

उस रिपोर्ट के बाद मनपा प्रशासन ने गंभीरता दिखाते हुए तापी शुद्धिकरण के प्रति चिंता जताई थी, लेकिन कागजी घोड़े ज्यादा दौड़े। पीने के पानी के लिए सूरती तापी पर निर्भर हैं। इसके बावजूद नदी की सेहत से लगातार खिलवाड़ हो रहा है। कभी धार्मिक आयोजनों के बहाने तो कभी विकल्प के अभाव में गटर का गंदा पानी ट्रीट किए बिना ही नदी में बहाकर तापी को लगातार प्रदूषित किया जा रहा है। गणपति महोत्सव हो या अन्य आयोजन, धार्मिक अनुष्ठानों के नाम पर हर साल तापी में प्रदूषण की मात्रा बढ़ रही है।

कछुआ चाल से काम

तापी शुद्धिकरण के लिए ऐलान तो कई हुए, लेकिन अधिकांश कागजों पर ही सिमट कर रह गए। कुछ संस्थाओं ने भी यदा-कदा तापी किनारे जाकर साफ-सफाई के अभियान चलाए, लेकिन वह औपचारिकता अधिक रहे। पिछले दिनों भाजपा ने सूरत मनपा के साथ मिलकर तापी शुद्धिकरण का लंबा अभियान चलाया था, जो कोजवे पर ही सिमट कर रह गया था। इस अभियान का फोकस जलकुंभी हटाने पर था, जो अभियान पूरा होने के हफ्तेभर बाद फिर नदी पर दिखने लगी थी। बरसों की मशक्कत के बाद मनपा ने काकरापार से ओएनजीसी ब्रिज तक तापी शुद्धिकरण के लिए ९२२.१८ करोड़ रुपए का मास्टर प्लान तैयार किया, जो केंद्र के पाले में है।

तापी स्मरणे पाप नाश्यति

देशभर में जितनी भी नदियां हैंं, उनका पुराणों में जिक्र है। तापी अकेली नदी, जिसका महत्व समझाने के लिए पूरा पुराण लिखा गया। तापी पुराण में ‘गंगा स्नाने, नर्मदा दर्शनेश्चव, तापी स्मरणे पाप नाश्यति’ मंत्र के माध्यम से तापी की महत्ता बताई गई है। इस मंत्र के मुताबिक गंगा में स्नान और नर्मदा में दर्शन से पाप का नाश होता है, जबकि तापी के स्मरण मात्र से व्यक्ति के पाप नष्ट हो जाते हैं। बैतूल (मध्य प्रदेश) जिले के मुलताई तहसील मुख्यालय के पास ताप्ती तालाब से निकलने वाली सूर्य पुत्री ताप्ती के जन्म का प्रसंग महाभारत में आदि पर्व में है। कहते हैं कि भगवान सूर्य ने स्वयं की गर्मी या ताप से रक्षा के लिए ताप्ती को धरती पर अवतरित किया था। तापी का सौंदर्य थाई राजा को इतना भाया था कि उसने अपने देश में सूरत के नाम पर शहर बसाया और उसके किनारे बह रही नदी का नाम तापी रख दिया था।

कोजवे पर प्रवाह रोकना बड़ी भूल

किताबों में भले लिखा हो कि तापी सूरत के डूमस में समुद्र से मिलती है, हकीकत यह है कि डूमस से करीब १५ किमी पहले ही तापी के प्रवाह को बांध दिया गया है। वर्ष १९९५ में सिंगणपोर पर कोजवे बनाकर तापी को वहीं रोक लिया गया। हालांकि यह फैसला वक्त की जरूरत को देखते हुए किया गया था। जानकारों के मुताबिक कोजवे से पहले नदी में गिरने वाली गंदगी तापी के बहाव के साथ समुद्र में चली जाती थी।

पत्रिका ने बार-बार उठाया मुद्दा
तापी शुद्धिकरण को अभियान के रूप में राजस्थान पत्रिका ने बार-बार उठाया। इन खबरों को लेकर सामाजिक संस्थाएं तो सक्रिय होती हैं, लेकिन स्थानीय और राज्य स्तर पर प्रशासनिक मशीनरी हर बार तापी नदी को लेकर असंवेदनशील रही है। पत्रिका ने सिलसिलेवार खबरें छापकर अभियान भी चलाया था, जिसके बाद शहर भाजपा इकाई ने तापी शुद्धिकरण अभियान शुरू किया था।