
त्रिशला नंदन वीर की ...जय बोलो महावीर की
सूरत. जैन धर्म के श्वेताम्बर मूर्तिपूजक संप्रदाय द्वारा पर्युषण पर्व के अंतर्गत शुक्रवार को भगवान महावीर का जन्म वांचन हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। भगवान महावीर का जन्म तो चैत्र सुदी त्रयोदशी के दिन हुआ था। लेकिन परम्परा से पर्युषण पर्व में कल्पसूत्र के माध्यम से जन्म वांचन मनाया जाता है। कैलाशनगर, भटार रोड, गोपीपुरा, उमरा, अठवालाइन्स एवं कतारगाम आदि क्षेत्रों के जैन उपाश्रयों में कहीं सुबह तो कहीं दोपहर त्रिशलानंदन वीर की...जय बोलो महावीर की एवं पालणा में झूले सिद्धार्थ नंदन आदि के जयकारों की गूंजे सुनाई दी। विभिन्न उपाश्रयों में जैसे ही गुरुभगवंतों ने भगवान महावीर के जन्म होने की घोषणा की तो हजारों श्रद्धालु संगीत के साथ नाचने झूमने लगे। बाद में परस्पर एक दूसरे को मुंह मीठा करवाया। रात्रि में पालणा जी का जागरण व भक्ति भावना हुई।
पर्वाधिकार पर्युषण है लोकोत्तर पर्व - सुयोग ऋषि
सूरत. महावीर भवन में डॉ. सुयोग ऋषि ने पयुर्षण पर्व के विषय में कहा कि पर्वराज पर्युषण एक लोकोत्तर पर्व है। जिसे धर्म ध्यान, साधना, आराधना व त्याग-तपस्या के रूप में मनाया जाता है। यह पर्व कर्म निर्पदा का एक परम अवसर है। व्यक्ति अपने भीतर उतरने की कोशिस करता है। इन दिनों आत्मिक उत्थान की चर्चा की जाती है।
समाज व्यसन मुक्त हो - आदेश मुनि
सूरत. न्यू सिटीलाइट स्थित सोहन नाहर स्वाध्याय भवन में शुक्रवार को आदेश मुनि ने प्रवचन देते हुए कहा कि समाज में व्यसन एक भयंकर बीमारी है। विशेष रूप से नौजवान इससे अधिक ग्रसित होते है। हमें समाज को व्यसन मुक्त बनाना है। समाज में आपस में सामंजस्य का माहौल होना चाहिए। जय मुनि ने श्री कृष्ण व अरिष्ठ नेमि की भूमि गुजरात में शराब व मांसाहार की बढ़ती प्रवृति पर दुख जताया।
Published on:
31 Aug 2019 01:40 pm
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