19 जनवरी 2026,

सोमवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

धूमधाम से मनाया रणछोडऱाय महाराज का 192वां पाटोत्सव

वड़ताल स्वामीनारायण मंदिर: सोने के 6 हार किए अर्पित

2 min read
Google source verification
धूमधाम से मनाया रणछोडऱाय महाराज का 192वां पाटोत्सव

धूमधाम से मनाया रणछोडऱाय महाराज का 192वां पाटोत्सव

आणंद. खेड़ा जिले के तीर्थधाम स्वामीनारायण संप्रदाय के स्वामीनारायण मंदिर में विराजमान रणछोडऱाय का 192वां पाटोत्सव शनिवार को धूमधाम से मनाया गया। इस मौके पर संतों - भक्तों ने अभिषेक किया तथा अन्नकूट के दर्शन किए।
वडताल मंदिर के कोठारी डॉ संत वल्लभदास स्वामी ने बताया कि वड़ताल मंदिर में विराजमान रणछोडऱाय का 192 वां पाटोत्सव मेतपुर के मंगलदास छगन मुखी तथा गंगा मंगलदास मुखी और अरविंद हंसमुख तथा घनश्याम मुखी परिवार की ओर से मनाया गया। इस मौके पर सोने के छह हार चढ़ाए गए। तारापुर के गोविंद ठक्कर, वीनू, डॉ हर्षद, महेंद्र, शांतिलाल और सूरत की डॉ पूर्वी देवांग की ओर से सोने का एक-एक हार चढ़ाया गया।
शनिवार को सुबह के समय मंगला आरती के बाद 6 बजे मंदिर के पुरोहित धीरेन भट्ट ने मंत्रोचार के साथ अभिषेक विधि प्रारंभ कराया। अभिषेक विधि में यजमान के रूप में अरविंद हंसमुख तथा घनश्याम मुखी ने पूजा का लाभ लिया। इस दौरान आचार्य राकेश प्रसाद महाराज तथा सौरभ प्रसाद महाराज ने रणछोडऱाय तथा मंदिर में विराजमान देवों का पंचामृत तथा केसर जल से अभिषेक किया। कार्यक्रम में संप्रदाय के संतों- महंतों तथा बड़ी संख्या में हरि भक्तों ने अभिषेक दर्शन का लाभ लिया।
सुबह अभिषेक, आरती के पश्चात मंदिर के सभा मंडप में वार्षिक पाटोत्सव के अवसर पर सत्संग सभा का आयोजन हुआ। इसमें आचार्य राकेश प्रसाद महाराज सत्संग महासभा के प्रमुख नौतम प्रकाश दास, गोविंद स्वामी, सत्य प्रकाश स्वामी और संत महंत उपस्थित रहे। नौतम स्वामी ने रणछोडऱाय की महिमा का वर्णन किया।
उनके अनुसार सच्चिदानंद स्वामी की भक्ति से प्रसन्न होकर गोमती के साथ भगवान रणछोडऱाय वड़ताल में पहुंचे थे और मंदिर में साक्षात प्रतिष्ठित हुए। भगवान तो भक्तों के भाव के भूखे हैं। भक्त जहां जहां जाते हैं, भगवान भी उनके साथ चले जाते हैं। वे हमेशा भक्तों के दिल में बसे रहते हैं।
मंदिर में भगवान रणछोडऱाय की मूर्ति की प्रतिष्ठा आचार्य रघुवीर महाराज के हाथ से संवत 1886 के चैत्र वद 7 के दिन हुई थी। यह मूर्ति राजस्थान के डूंगरपुर से लाई गई थी। आचार्य राकेश प्रसाद महाराज ने यजमान परिवार को आशीर्वचन दिया। उन्हें रणछोडऱाय की कथा, लक्ष्मी नारायण देव की मूर्ति भेंट की गई। 11 बजे देवों की अन्नकूट आरती आचार्य राकेश प्रसाद महाराज ने की।