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VNSGU : घनश्याम रावल के सभी पद रद्द

- विश्वविद्यालय ने जारी की अधिसूचना

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VNSGU : घनश्याम रावल के सभी पद रद्द

सूरत.

वीर नर्मद दक्षिण गुजरात विश्वविद्यालय के सिंडीकेट सदस्य डॉ. घनश्याम रावल के खिलाफ विश्वविद्यालय प्रशासन ने कड़ी कार्रवाई की है। उन्हें विश्वविद्यालय के सभी पदों से हटाने की अधिसूचना जारी की गई है। इससे पहले भी डॉ.रावल पर विश्वविद्यालय प्रशासन ने कार्रवाई की थी।
सिंडीकेट सदस्य डॉ.घनश्याम रावल के खिलाफ शिकायत की गई थी कि उन्होंने पद का दुरुपयोग कर रीडर और विश्वविद्यालय के अन्य पद ग्रहण किए हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से शुक्रवार को जारी अधिसूचना में डॉ.रावल को सभी पदों से तुरंत हटाने का आदेश है। इससे पहले डॉ.रावल के खिलाफ तीन सदस्यों की जांच समिति गठित की गई थी। इसमें स्मीमेर कॉलेज के डॉ.तरुण तेजवानी, पच्चीगर कॉलेज के डॉ.विपुल शास्त्री और बरोड़ा कॉलेज के डॉ.अल्पेश शाह को नियुक्त किया गया था। जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर कुलपति डॉ. शिवेन्द्र गुप्ता ने एक अधिसूचना जारी की थी। इसके अनुसार डॉ. घनश्याम रावल को व्यारा के सी.एन.कोठारी होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज एंड रिसर्च सेंटर के रीडर पद से हटा दिया गया था। साथ ही सिंडीकेट, सीनेट, एकेडमिक काउंसिल, बॉर्ड ऑफ स्टडीज के पदों से भी उन्हें हटा दिया गया था। डॉ.रावल की सिंडीकेट में आने पर रोक लगा दी गई थी। इसके बाद डॉ.रावल अपने साथ अदालत का आदेश लेकर आए थे और सिंडीकेट में बैठक में उपस्थित हुए। अब शुक्रवार को विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से नई अधिसूचना जारी की गई है।

अन्य पद हासिल किए

सीनेट सदस्य गौरांग वैद्य का कहना है कि डॉ. घनश्याम रावल ने बतौर एमडी इन होम्योपेथी होने की बात बताकर व्यारा कॉलेज में पदभार संभाला। उन्होंने एडहोक और विजिटिंग फेक्लटी के काउंट गलत बताकर रीडर का पद संभाला। इस पद के माध्यम से विश्वविद्यालय के अन्य पद हासिल किए।

सिंडीकेट की बैठक नाटक से कम नहीं थी

सिंडीकेट की बैठक नाटक से कम नहीं थी। बैठक से ठीक पहले डॉ.घनश्याम रावल ने अदालत का आदेश विश्वविद्यालय में जमा करवाया। इसके बाद बैठक में प्रवेश किया। महाविद्यालयों की एलआइसी को लेकर दो मई को हुई सिंडीकेट दो हिस्सों में बंट गई थी। दोनों पक्षों में आठ-आठ सदस्य थे। इसलिए सिंडीकेट में एजेंडा पास नहीं हो पाया था। इसके दूसरे दिन सिंडीकेट सदस्य घनश्याम रावल की योग्यता पर प्रश्न खड़ा कर उन्हें सभी पदों से दूर कर दिया गया। एक अन्य सिंडीकेट सदस्य डॉ.महेन्द्र चौहाण के खिलाफ जांच समिति गठित कर दी गई। सिंडीकेट सदस्यों का कहना था कि दूसरे पक्ष का बहुमत कम करने के लिए कुलपति डॉ.शिवेन्द्र गुप्ता की ओर से यह षड्यंत्र रचा गया। डॉ.रावल ने अदालत में याचिका दायर की थी। अदालत ने विश्वविद्यालय के आदेश को रद्द कर डॉ. रावल को सिंडीकेट में प्रवेश करने की मंजूरी दे दी। मंगलवार को सिंडीकेट से ठीक पहले डॉ. रावल ने अदालत का आदेश विश्वविद्यालय में जमा करवाया। इसके बाद वह सिंडीकेट में पहुंचे। बैठक में डॉ. महेन्द्रसिंह चौहाण भी उपस्थित थे। कुलपति और विपक्ष, दोनों तरफ आठ-आठ सदस्य होने के कारण एजेंडे को लेकर विवाद के आसार थे, लेकिन कुलपति पक्ष की ओर से सिंडीकेट में तीन सरकारी अधिकारियों को बुलाया गया। इनमें डायरेक्टर ऑफ हायर एज्युकेशन, डायरेक्टर ऑफ टेक्निकल एज्युकेशन और मेडिकल डायरेक्टर शामिल हैं। इस तरह कुलपति के पक्ष में 11 समर्थक हो गए। आठ के मुकाबले 11 मतों से ज्यादातर एजेंडे को पास करवाने का प्रयास किया गया। कुलपति के खिलाफ मोर्चा खोलकर बैठ सिंडीकेट सदस्य विरोध जताते रहे, लेकिन बहुमत से कुलपति पक्ष ने ज्यादातर एजेंडा पास कर लिया।