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VNSGU : बहुमत बनाने के लिए सरकारी अधिकारियों की ली सहायता

घनश्याम रावल ने सिंडीकेट से पहले अदालत का आदेश विवि में जमा किया

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सूरत.

वीर नर्मद दक्षिण गुजरात विश्वविद्यालय में मंगलवार देर रात चली सिंडीकेट की बैठक में एजेंडा पास करवाने के लिए कुलपति की ओर से तीन सरकारी अधिकारियों की सहायता ली गई। कुलपति पक्ष को मजबूत करने के लिए 11 सदस्यों का बहुमत बनाकर ज्यादातर एजेंडे को पास करवाने का प्रयास किया गया।
सिंडीकेट की बैठक नाटक से कम नहीं थी। बैठक से ठीक पहले डॉ.घनश्याम रावल ने अदालत का आदेश विश्वविद्यालय में जमा करवाया। इसके बाद बैठक में प्रवेश किया। महाविद्यालयों की एलआइसी को लेकर दो मई को हुई सिंडीकेट दो हिस्सों में बंट गई थी। दोनों पक्षों में आठ-आठ सदस्य थे। इसलिए सिंडीकेट में एजेंडा पास नहीं हो पाया था। इसके दूसरे दिन सिंडीकेट सदस्य घनश्याम रावल की योग्यता पर प्रश्न खड़ा कर उन्हें सभी पदों से दूर कर दिया गया। एक अन्य सिंडीकेट सदस्य डॉ.महेन्द्र चौहाण के खिलाफ जांच समिति गठित कर दी गई। सिंडीकेट सदस्यों का कहना था कि दूसरे पक्ष का बहुमत कम करने के लिए कुलपति डॉ.शिवेन्द्र गुप्ता की ओर से यह षड्यंत्र रचा गया। डॉ.रावल ने अदालत में याचिका दायर की थी। अदालत ने विश्वविद्यालय के आदेश को रद्द कर डॉ. रावल को सिंडीकेट में प्रवेश करने की मंजूरी दे दी। मंगलवार को सिंडीकेट से ठीक पहले डॉ. रावल ने अदालत का आदेश विश्वविद्यालय में जमा करवाया। इसके बाद वह सिंडीकेट में पहुंचे। बैठक में डॉ. महेन्द्रसिंह चौहाण भी उपस्थित थे। कुलपति और विपक्ष, दोनों तरफ आठ-आठ सदस्य होने के कारण एजेंडे को लेकर विवाद के आसार थे, लेकिन कुलपति पक्ष की ओर से सिंडीकेट में तीन सरकारी अधिकारियों को बुलाया गया। इनमें डायरेक्टर ऑफ हायर एज्युकेशन, डायरेक्टर ऑफ टेक्निकल एज्युकेशन और मेडिकल डायरेक्टर शामिल हैं। इस तरह कुलपति के पक्ष में 11 समर्थक हो गए। आठ के मुकाबले 11 मतों से ज्यादातर एजेंडे को पास करवाने का प्रयास किया गया। कुलपति के खिलाफ मोर्चा खोलकर बैठ सिंडीकेट सदस्य विरोध जताते रहे, लेकिन बहुमत से कुलपति पक्ष ने ज्यादातर एजेंडा पास कर लिया।