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VNSGU : प्रवेश प्रक्रिया से त्रस्त कई विद्यार्थी अन्य विश्वविद्यालयों की शरण में

-अब तक आधा पाठ्यक्रम हो जाना चाहिए था, लेकिन वीएनएसजीयू में प्रवेश के लिए धक्के खा रहे हैं विद्यार्थी

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VNSGU : प्रवेश प्रक्रिया से त्रस्त कई विद्यार्थी अन्य विश्वविद्यालयों की शरण में

सूरत.

वीर नर्मद दक्षिण गुजरात विश्वविद्यालय की प्रवेश प्रक्रिया से त्रस्त कई विद्यार्थियों ने अन्य विश्वविद्यालयों में प्रवेश ले लिया है। कई अन्य विश्वविद्यालयों में प्रवेश के लिए स्थलांतरित होने लगे हैं। प्रवेश के लिए विद्यार्थियों को महाविद्यालयों और विश्वविद्यालय के बीच धक्के खाने पड़े रहे हैं। जो प्रवेश प्रक्रिया अब तक समाप्त हो जानी चाहिए थी, आज भी चल रही है। इससे विद्यार्थियों को काफी परेशानी हो रही है।
विश्वविद्यालय के नए प्रशासन ने नई प्रवेश प्रक्रिया लागू कर कॉमर्स और साइंस के यूजी तथा पीजी पाठ्यक्रम में प्रवेश देना शुरू किया। नई प्रवेश प्रक्रिया से प्रवेश जल्द पूरे कर लेने का दावा किया गया था। सरलता से प्रवेश का आश्वासन भी दिया गया था, लेकिन विश्वविद्यालय के दावे खोखले साबित हुए। नई प्रवेश प्रणाली ने विद्यार्थियों को खासा परेशान किया। कॉलेज प्रशासन भी नई प्रवेश प्रणाली से परेशान हैं। साइंस में विषय वार मेरिट तैयार नहीं की गई, जिससे परेशानी और बढ़ गई। विद्यार्थियों को प्रवेश के लिए एक कॉलेज से दूसरे कॉलेज धक्के खाने पड़ रहे हैं। वहां उचित जवाब नहीं मिलने पर विश्वविद्यालय आना पड़ रहा है। विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से भी विद्यार्थियों को सही जवाब नहीं मिल रहा है। इसलिए कई विद्यार्थी अब अन्य विश्वविद्यालयों में प्रवेश लेने लगे हैं। विद्यार्थियों की परेशानी का जवाब देने के लिए कोई हेल्प सेंटर या हेल्पलाइन नहीं है। साइंस की तरह कॉमर्स का भी यही हाल है। विद्यार्थियों को मनपसंद महाविद्यालयों की ओर से मैसेज नहीं आ रहे है। दक्षिण गुजरात के दूर-दराज के क्षेत्रों के विद्यार्थियों के बारिश और अन्य कारणों से महाविद्यालय पहुंचने में जरा-सी देर होने पर उन्हें प्रवेश प्रक्रिया से बाहर कर देने के कई मामले सामने आए हैं। ऐसे विद्यार्थी विश्वविद्यालय के बड़े अधिकारियों से शिकायत कर चुके हैं, लेकिन किसी तरह के कदम नहीं उठाए गए। अब तक प्रथम परीक्षा का आधा पाठ्यक्रम हो जाना चाहिए था, लेकिन विद्यार्थी प्रवेश के लिए धक्के खा रहे हैं। विश्वविद्यालय की लापरवाही का खामियाजा विद्यार्थियों को ही भुगतना पड़ रहा है।