
VNSGU : वीएनएसजीयू ने फिर बढ़ा दी प्रवेश की समय सीमा
सूरत. वीर नर्मद दक्षिण गुजरात विश्वविद्यालय ने विद्यार्थियों के लिए फिर प्रवेश की समय सीमा बढ़ा दी है। इसके अलावा साइंस और कॉमर्स के दो-दो कॉलेजों को मान्यता दी गई है। पूरक परीक्षा के विद्यार्थियों के प्रवेश की मियाद भी बढ़ाई गई है।
विश्वविद्यालय के कॉमर्स और साइंस महाविद्यालयों में प्रवेश की प्रक्रिया जारी है। अब तक प्रवेश प्रक्रिया पूर्ण हो जानी चाहिए थी और प्रथम सेमेस्टर का पाठ्यक्रम आधा पूर्ण हो जाना चाहिए था, लेकिन नई प्रवेश प्रणाली के कारण प्रवेश प्रक्रिया लंबी खिंचती जा रही है। इससे विद्यार्थियों के साथ कॉलेज प्रशासन भी परेशान हैं। विश्वविद्यालयों ने पहले सभी महाविद्यालयों को 8 अगस्त तक प्रवेश प्रक्रिया पूर्ण कर लेने का आदेश दिया था, लेकिन 8 अगस्त तक प्रवेश प्रक्रिया पूर्ण नहीं हो पाई। आज भी कॉलेजों की ओर से विद्यार्थियों को प्रवेश के लिए एसएमएस भेजे जा रहे हैं। विद्यार्थी प्रवेश के लिए महाविद्यालय और विश्वविद्यालय के बीच धक्के खा रहे हैं। उन्हें एक कॉलेज से दूसरे कॉलेज में स्थलांतरण करने की प्रक्रिया में भी परेशानी हो रही है। ऐसे विद्यार्थियों की 10 से 20 प्रतिशत फीस काटी जा रही है। विश्वविद्यालय ने फीस नहीं काटने का आदेश दिया था, लेकिन कॉलेज इसका पालन नहीं कर रहे हैं। इस बीच, विश्वविद्यालय ने प्रवेश प्रक्रिया 11 अगस्त तक बढ़ा दी है। पूरक परीक्षा वाले विद्यार्थियों की समय सीमा 13 अगस्त तक बढ़ाई गई है। इसके अलावा दो साइंस और दो कॉमर्स कॉलेजों को मान्यता दी गई है।
एनएसयूआइ ने विरोध जताया
एनएसयूआइ ने शुक्रवार को वीर नर्मद दक्षिण गुजरात विश्वविद्यालय के कुलपति कार्यालय का घेराव किया। संगठन ने नई प्रवेश प्रणाली पर विरोध जताया और रामधुन गाकर प्रवेश को लेकर विद्यार्थियों की परेशानी दूर करने की मांग की। कुलपति डॉ.शिवेन्द्र गुप्ता ने पदभार संभालते ही 20 साल पुरानी केंद्रीय प्रवेश प्रणाली बंद कर विकेंद्रित प्रवेश प्रणाली लागू की थी। यह प्रणाली विद्यार्थियों को सुविधा के बजाय दुविधा दे रही है। इसके खिलाफ सिंडीकेट सदस्य भावेश रबारी की अगुवाई में एनएसयूआइ के कार्यकर्ताओं ने शुक्रवार को कुलपति कार्यालय का घेराव किया। संगठन के कार्यकर्ताओं ने कुलपति कार्यालय के पास धरना भी दिया। संगठन ने मांग की कि नई प्रवेश प्रणाली में सुधार किया जाए। यूजी, पीजी और लॉ में प्रवेश को लेकर विद्यार्थी परेशान हो रहे हैं। हेल्प सेंटर और हेल्पलाइन नहीं है।
नई प्रवेश प्रणाली ने विद्यार्थियों को खासा परेशान किया
विश्वविद्यालय के नए प्रशासन ने नई प्रवेश प्रक्रिया लागू कर कॉमर्स और साइंस के यूजी तथा पीजी पाठ्यक्रम में प्रवेश देना शुरू किया। नई प्रवेश प्रक्रिया से प्रवेश जल्द पूरे कर लेने का दावा किया गया था। सरलता से प्रवेश का आश्वासन भी दिया गया था, लेकिन विश्वविद्यालय के दावे खोखले साबित हुए। नई प्रवेश प्रणाली ने विद्यार्थियों को खासा परेशान किया। कॉलेज प्रशासन भी नई प्रवेश प्रणाली से परेशान हैं। साइंस में विषय वार मेरिट तैयार नहीं की गई, जिससे परेशानी और बढ़ गई। विद्यार्थियों को प्रवेश के लिए एक कॉलेज से दूसरे कॉलेज धक्के खाने पड़ रहे हैं। वहां उचित जवाब नहीं मिलने पर विश्वविद्यालय आना पड़ रहा है। विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से भी विद्यार्थियों को सही जवाब नहीं मिल रहा है। इसलिए कई विद्यार्थी अब अन्य विश्वविद्यालयों में प्रवेश लेने लगे हैं। विद्यार्थियों की परेशानी का जवाब देने के लिए कोई हेल्प सेंटर या हेल्पलाइन नहीं है। साइंस की तरह कॉमर्स का भी यही हाल है। विद्यार्थियों को मनपसंद महाविद्यालयों की ओर से मैसेज नहीं आ रहे है। दक्षिण गुजरात के दूर-दराज के क्षेत्रों के विद्यार्थियों के बारिश और अन्य कारणों से महाविद्यालय पहुंचने में जरा-सी देर होने पर उन्हें प्रवेश प्रक्रिया से बाहर कर देने के कई मामले सामने आए हैं। ऐसे विद्यार्थी विश्वविद्यालय के बड़े अधिकारियों से शिकायत कर चुके हैं, लेकिन किसी तरह के कदम नहीं उठाए गए। अब तक प्रथम परीक्षा का आधा पाठ्यक्रम हो जाना चाहिए था, लेकिन विद्यार्थी प्रवेश के लिए धक्के खा रहे हैं। विश्वविद्यालय की लापरवाही का खामियाजा विद्यार्थियों को ही भुगतना पड़ रहा है।
Published on:
08 Aug 2018 09:06 pm
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