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लंबी दूरी की ट्रेनों के ठहराव का इंतजार

पश्चिम रेलवे के जनरल मैनेजर (जीएम) एके गुप्ता 16 फरवरी को उधना-जलगांव ताप्ती लाइन के रेलवे स्टेशनों का वार्षिक निरीक्षण करेंगे। इस दौरान वे...

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सूरत

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Mukesh Kumar

Feb 16, 2018

Waiting for long-distance trains stop

Waiting for long-distance trains stop

बारडोली।पश्चिम रेलवे के जनरल मैनेजर (जीएम) एके गुप्ता 16 फरवरी को उधना-जलगांव ताप्ती लाइन के रेलवे स्टेशनों का वार्षिक निरीक्षण करेंगे। इस दौरान वे बारडोली रेलवे स्टेशन के बाहर स्मृति के रूप में रखे गए रेल इंजन ‘पप्पू पावर’ और स्टेशन परिसर में बनाए गए बाग का भी लोकार्पण करेंगे। जीएम के आने से पूर्व रेलवे स्टेशन पर तैयारियां शुरू कर दी गई हैं।

निर्धारित कार्यक्रम के तहत जीएम शुक्रवार सुबह 11 बजे बारडोली रेलवे स्टेशन पहुंचेंगे। बारडोली के लोगों को उम्मीद है कि जीएम उनकी वर्षों पुरानी लम्बी दूरी की ट्रेनों के ठहराव की मांग को जरूर पूरा करेंगे। रेलवे स्टेशन के नवीनीकरण के बाद बढ़ी सुविधाओं के बीच लंबी दूरी की ट्रेनों का स्टोपेज नहीं होने से लोगों को दिक्कत का सामना करना पड़ता है। सरदार की कर्मभूमि बारडोली ऐतिहासिक शहर होने के साथ ही यहां लाखों की संख्या में अन्य राज्यों से लोग रोजी रोटी के लिए स्थायी हुए हैं। उनको वतन आने जाने के लिए बारडोली में सुविधा उपलब्ध नहीं होने से सूरत और वडोदरा तक जाना पड़ता है। बारडोली को रेलवे से वर्षों से अन्याय का शिकार होना पड़ रहा है। स्थानीय रेलवे स्टेशन पर अप और डाउन की सिर्फ पांच गाडिय़ां ही रुकती हैं।


लंबी दूरी की हावड़ा एक्सप्रेस के अलावा किसी भी ट्रेन को ठहराव नहीं दिया गया है। बारडोली में रेलवे स्टेशन के नवीनीकरण के बाद सभी प्रकार की सुविधा उपलब्ध कराई गई हैं, लेकिन ट्रेनों के स्टोपेज नहीं होने से सभी सुविधा नाकाम हो रही हैं। ट्रेनों को स्टोपेज नहीं मिलने से यात्रियों की संख्या भी नहीं बढ़ पाती है। वहीं रेलवे स्टेशन पर सिर्फ पांच यात्री ट्रेनें ही रुकने के बावजूद टिकट बुकिंग, सीजन टिकट और एडवांस बुकिंग मिलाकर प्रतिमाह 25 लाख रुपए की आय होती है। फिर भी बारडोली के साथ अन्याय होता आया है। स्थानीय लोगों ने कई बार लिखित में मांग की, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई। इसके कारण लोगों में भी काफी रोष व्याप्त है।

दैनिक 60 से 65 हजार की आय

बारडोली में सूरत के लिए पांच और भुसावल की ओर जाने के लिए पांच ट्रेनें रुकती हैं, फिर भी रोजाना औसत 800 यात्री अप-डाउन करते हंै। इसके अलावा रोजाना 294 टिकट, हर माह 255 सीजन टिकट की बिक्री तथा 129 एडवांस टिकट बुकिंग होती है। इससे रोजाना 60 से 65 हजार की आय होती है। इतनी कम ट्रेन होने के बावजूद बारडोली रेलवे स्टेशन प्रतिमाह 25 लाख से अधिक की आय देता है। फिर भी बारडोली के साथ अन्याय हो रहा है।

स्थानीय जनप्रतिनिधि असफल

स्थानीय नेता भी बारडोली रेल्वे स्टेशन पर लंबी दूरी की ट्रेन को स्टोपेज दिलाने में असफल रहे हैं। बारडोली के पूर्व सांसद और केन्द्रीय मंत्री डॉ. तुषार चौधरी भी बारडोली रेलवे स्टेशन के लिए कुछ नहीं कर पाए। वर्तमान सांसद प्रभु वसावा भी इस मामले मे निष्क्रिय दिखाई दे रहे हैं। ऐसे में हाल ही में राज्य सरकार में कैबिनेट मंत्री बने ईश्वर परमार पर ही आशाएं टिकी हैं।