25 जनवरी 2026,

रविवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

जाने क्या है वजह जो एक गांव नहीं बनना चाहता शहर

भले शहरीकरण की लालसा गांवों को शहर में तब्दील कर रही हों, गुजरात का एक गांव अपने ग्रामीण परिवेश को छोडऩा नहीं चाहता, शहर की सीमा में शामिल नहीं होना चाहते सेगवा के ग्रामीण

less than 1 minute read
Google source verification

सूरत

image

Vineet Sharma

Dec 03, 2019

जाने क्या है वजह जो एक गांव नहीं बनना चाहता शहर

patrika

सूरत. सूरत को मेगा सिटी बनाने का राज्य सरकार का निर्णय लोगों को रास नहीं आ रहा है। जबसे यह निर्णय किया गया है, प्रभावित गांवों के लोग इसके विरोध में एकजुट हो रहे हैं। हालिया मामला सेगवा गांव का है, जहां के ग्रामीण सूरत शहर का हिस्सा नहीं बनना चाहते।

गुजरात सरकार ने पिछले दिनों सूरत समेत प्रदेश के चुनीदा शहरों को मेगा सिटी बनाने का निर्णय किया है। सूरत को मेगा सिटी बनाने के लिए शहर का सीमा विस्तार किया जाएगा। प्राथमिक तौर पर जिन गांवों को सूडा से सूरत महानगर पालिका में लेने की बात कही जा रही है, लोगों का विरोध भी शुरू हो गया है। इस विरोध में सेगवा के ग्रामीण भी जुड़ गए हैं। सेगवा के लोगों का आरोप है कि गांव में महिला सरपंच है और उनका पति डिप्टी सरपंच है। पति-पत्नी दोनों ने ग्रामीणों से सलाह-मशविरा किए बगैर गांव को सूरत शहर की सीमा में शामिल करने का फैसला कर लिया।

इस फैसले की खबर गांव के लोगों को मिली तो उनमें रोष फैल गया। धीरे-धीरे लोग एकजुट हुए और इस फैसले के खिलाफ लामबंद हो गए। उन्होंने ओलपाड टीडीओ को ज्ञापन देकर सरपंच और डिप्टी सरपंच के फैसले को चुनौती दी और कहा कि गांव के सूरत शहर की सीमा में शामिल होने के उनके एकतरफा फैसले से गांव के लोग सहमत नहीं हैं।

शामिल न होने की यह बताई वजह

ग्रामीणों के पास सूरत की सीमा में शामिल नहीं होने की वजह भी हैं। उन्होंने कहा कि शहर की सीमा में शामिल होने के बाद उनको शहर की सहूलियतें तो कम मिलेंगी, नुकसान ज्यादा है। उन्होंने कहा कि सूरत महानगर पालिका की सुविधाएं उन तक पहुंचने में बरसों लग जाएंगे। सूरत मनपा प्रशासन वेरा और अन्य करों की वसूली शुरू कर देगा।