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लतिका बन गईं जब हरिदास, खूब रचाया रास

बृजमंडल का श्रीकृष्णलीला महोत्सव
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सूरत

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arun Kumar

•

Updated: 12 Sep 2018, 8:35 PM IST

When latika became haridas

When latika became haridas

बांके बिहारी प्राग्टय लीला का भावपूर्ण मंचन

सूरत. श्रीकृष्ण के साथ पुरुषों का रास रचाने का प्रसंग आम तौर पर कहीं सुनने को नहीं मिलता। राधारानी के शाप से हरिदास बन गईं लतिका ने छुटपन में बाल कृष्ण के साथ रास रचाया। कृष्ण की प्रेरणा से हरिदास परिवार छोडकऱ वृंदावन पहुंचे और बांके बिहारी को बृजधाम में स्थापित किया। बृज के रासाचार्य फतेहकृष्ण शर्मा के सानिध्य में रास मण्डली ने स्वामी हरिदासजी बांके बिहारी प्राग्टय लीला के इसी प्रसंग का भावपूर्ण मंचन किया।

जब श्रीकृष्ण को पान खिलाने से नाराज हुईं राधारानी

सिटीलाइट के महाराजा अग्रसेन भवन में बृजमंडल की ओर से चल रही श्रीकृष्णलीला महोत्सव में रासाचार्च ने संत हरिदास की कथा सामने रखी। यह पहला अवसर है, जब सूरत में कई साल से हो रहे श्रीकृष्ण लीला महोत्सव में इस प्रसंग का मंचन हो रहा है। प्रसंग के अनुसार सखी लतिका के श्रीकृष्ण को पान खिलाने से नाराज राधारानी ने उन्हें भूलोक में जाने का शाप दे दिया। फलस्वरूप लतिका ने गंगाधर और चित्रा के पुत्र के रूप में पुरुष जन्म लिया। यही पुत्र संत हरिदास बने। श्रीकृष्ण की पे्ररणा से संत हरिदास जब बच्चों के साथ रास खेल रहे थे, बालकृष्ण ग्वाले के रूप में वहां पहुंचे और उनके साथ रास खेलने लगे। बालकृष्ण ने अपना नाम रसिक बिहारी बताया, जिसे सुनकर बालक हरिदास को पूर्व जन्म का भान होने लगा। रसिक बिहारी ने उन्हें वृंदावन जाने की प्रेरणा दी। माता-पिता की मनुहार के बाद भी जब हरिदास वृंदावन जाने लगे तो उनके गुरु आसुधीर जी ने चूणामणि मंत्र हरिदास को दिया और बताया कि इस मंत्र के जाप से श्रीकृष्ण दर्शन देंगे।

रास मंडली ने किया प्रसंग का भावपूर्ण मंचन

रास्ते में जब हरिदास जंगल में भटके तो कृष्ण इस बार कुंज बिहारी के रूप में ग्वाले का भेस धर फिर उनसे मिले और उन्हें निधवन तक पहुंचाया। जैसे ही कृष्ण ने हरिदास का हाथ पकड़ा, भगवान के स्पर्श से उन्हें पूर्व जन्म की स्मृतियां आने लगीं। संत हरिदास ने अपने भक्ति बल से भगवान के बांके बिहारी स्वरूप को एक वृक्ष से प्रकट किया। प्रचलित मान्यताओं के मुताबिक मथुरा में विराजे बांके बिहारी का यह स्वरूप वृक्ष से प्रकट हुए भगवान का ही है। रास मंडली के सदस्यों ने इस प्रसंग का भावपूर्ण मंचन कर दर्शकों को कृष्ण भक्ति से सराबोर कर दिया।

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