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श्री कृष्ण ने क्यों रोकी इन्द्र की पूजा – स्वामी निर्मल शरण

- डिंडोली में भागवत कथा

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श्री कृष्ण ने क्यों रोकी इन्द्र की पूजा - स्वामी निर्मल शरण

सूरत. डिंडोली स्थित प्रजापति समाज में आयोजित भागवत कथा में शुक्रवार को व्यासपीठ से स्वामी निर्मल शरण ने श्री कृष्ण द्वारा इन्द्र की पूजा रोके जाने का वृतांत सुनाया। उन्होंने कहा कि एक दिन सुबह सुबह कृष्ण उठे। उन्हें पकवानों की खुश्बु आ रही थी। आंखें मलते हुए भगवान यशोदा मैया के पास गए और बोले मैया क्या बना रही है तू मुझे भी खाने के लिए दे मां ने कहा लाला जब तक जय जय नहीं हो जाएगी तब तक खाने को कुछ नहीं मिलेगा।

भगवान ने पूछा मां यह जय-जय क्या होती है? मां ने कहा बेटा जाओ बाबा से पूछ लो भगवान नंद बाबा के पास गए बोले बाबा यह जय जय क्या होती है? नंद बाबा ने कहा लाला हम इंद्र की पूजा करते हैं। जिससे खुश होकर भगवान इंद्र बारिश करते हैं हमारी फसलें अच्छी होती हैं। कृष्ण ने कहा बाबा कर्म पर विश्वास रखना चाहिए अगर हम इंद्र की पूजा नहीं करेंगे तो क्या बारिश नहीं होगी? नंद बाबा ने कहा इंद्र नाराज हो जाएगें।

भगवान ने कहा अगर आधे लोग पूजा करें और आधे ना करें तो क्या इंद्र आधे लोगों के खेत में बारिश करेगा आधे में नहीं बाबा कर्म से सुख और दुख मिलता है। हम जैसा कर्म करते हैं वैसा ही फल मिलता है। भगवान इंद्र की पूजा रुकवा दी और गोवर्धन बाबा की पूजा करा दी। इंद्र की पूजा रुकवा के भगवान ने प्रकृति की पूजा का नियम बनाया हमारे ऋषि-मुनियों ने वृक्ष पूजा का महत्व दिया है।

पीपल, आम, नीम, बरगद इत्यादि वृक्षों की पूजा आज भी होती है। इससे पर्यावरण शुद्ध रहता है शुद्ध हवा मिलती है बारिश ठीक से होती है। इसलिए हर व्यक्ति को चाहिए जीवन में कम से कम एक वृक्ष जरूर लगाएं हरे भरे पेड़ों को न काटें। कथा में श्रद्धालुओं ने नंदलाल के जयकारे लगाए।