
महिला दिवस विशेष : गृहस्थी से जूझते हुए बनी डिप्टी कलेक्टर
सूरत. शादी हो गई और बाल-बच्चे हो गए यानी करीअर पूरा मानने वाली अधिकतर युवतियों के लिए सूरत की यास्मीन शेख एक मिसाल है। शहर के श्रमिक बहुल क्षेत्र के एक सामान्य परिवार में जन्मी यास्मीन शेख ने अपनी महेनत और काबेलियत के बूते डिप्टी कलक्टेर तक का मुकाम हासिल किया है, जो किसी भी युवती के लिए एक गर्व की बात कही जा सकती है।
भरुच में ओएसडी -जीआइडीसी विभाग में डिप्टी कलेक्टर के तौर पर सेवारत यास्मीन शेख ने बताया कि उनके पिता नगर प्राथमिक शिक्षा समिति संचालित उर्दु माध्यम की स्कूल में शिक्षक थे। परिवार की आर्थिक स्थित भी इतनी अच्छी नहीं थी, ऐसे में यास्मीन का सपना था कि वह पढ़ लिखकर कुछ बनना चाहती थी। उसने 12वीं कक्षा पास करने के बाद घर में ट्यूशन लेना शुरू किया और अपनी आगे की पढ़ाई ना सिर्फ जारी रखी, बल्कि बीए में गॉल्ड मेडल के साथ डीग्री प्राप्त की। उसके बाद उसने डबल एमए किया और उसमें भी गॉल्ड मेडल हासिल किया। बीए की पढ़ाई के दौरान ही उसकी शादी हो चुकी थी। इसके बावजूद उसने अपनी पढ़ाई जारी रखी। उसका सपना प्रशासनिक अधिकारी बनना था। ऐसे में दो बच्चे और उसमें भी एक बेटी की उम्र सिर्फ एक महीने की थी। इन परिस्थितियों में भी उसने गुजरात प्रशासनिक सेवा परीक्षा की तैयारी की और पहले ही प्रयास में उसने परीक्षा पास कर ली। तहसीलदार के तौर पर पोस्टिंग मिलने के बाद अब वह भरुच में डिप्टी कलेक्टर के पद पर है।
नौकरी के साथ लॉ और पीएचडी की डिग्री भी हासिल की
यास्मिन शेख ने प्रशासनिक विभाग में नौकरी के बाद भी अपनी पढ़ाई को नहीं रोका। नौकरी के साथ-साथ उसने एल.एल.बी की डिग्री फस्र्ट क्लास के साथ पास की। वहीं, गुजरात और राजस्थान के लोकगीतों का तुलनात्मक अध्ययन विषय में उन्होंने पीएचडी की डिग्री भी प्राप्त की है।
Published on:
08 Mar 2022 03:36 pm
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