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ऑस्ट्रेलिया की प्रदर्शनी में लगे हैं सरगुजा के भित्ति चित्र

लखनपुर विकासखंड के ग्राम सिरकोतंगा निवासी आत्मादास मानिकपुरी और बॉबी सोनवानी बने प्रेरणास्रोत

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Pranayraj rana

Feb 06, 2016

Bhitti chitra

Bhitti chitra

अंबिकापुर.
दीवारों पर बने भित्ति चित्र जीवंत होकर लोककला के रूप में आदिवासियों के आजीविका का साधन बन गए हैं। यहां के बने 3 भित्ति चित्र ऑस्ट्रेलिया की प्रदर्शनी में लगाने भी भेजा गया है। ग्राम सिरकोतंगा की बॉबी सोनवानी ने अभाव और बदहाली से परेशान होकर शौक में भित्ति चित्र को आजीविका के रूप में स्वीकार कर लिया है।


बॉबी ने बताया कि उन्होंने पहली बार भगवान शिव को भित्ति चित्रकला में दीवारों पर उकेरा। यह आकृति अच्छी लगी तो उसके गुरू आत्मादास मानिक पुरी ने उन्हें प्रोत्साहित किया। आत्माराम प्रारम्भ में चिडिय़ा, छोटे जानवर इत्यादि बनवाते थे। भित्ति चित्र बनाने के दौरान खर्च ज्यादा होता है बावजूद इसके प्रोत्साहन राशि से परिवार का भरण-पोषण हो जाता है।


आत्माराम मानिकपुरी ने बताया कि गांव में कला के रुझान को देखते हुए कर्मशाला प्रशिक्षण केन्द्र बनाया गया है। यहां पर नये भित्ति चित्र के निर्माण के साथ प्रशिक्षण भी दिया जाता है। प्रशिक्षण के लिए मानिकपुरी को 8000 रुपये वेतन मिलता है। आत्माराम 2004 से लोगों को प्रशिक्षण दे रहे हैं।


उन्होंने बताया कि बिलासपुर, नागपुर, चंडीगढ़, कोरबा आदि जगहों पर प्लाई बोर्ड पर बने भित्ति चित्र का प्रदर्शन किया जा चुका है। तीन भित्ति चित्र आस्ट्रेलिया में प्रदर्शनी के लिए भेजे गए हैं। आत्माराम को 2005 में इंदिरा गांधी अवार्ड और राज्यपाल अवार्ड मिल चुका है।


इनका होता है उपयोग

सीमेन्ट और पत्थर की दीवारों पर भित्ति चित्र बनाने के लिए रंग, फैब्रिक्स, प्लाइ, नारियल की रस्सी फेविकोल, मिट्टी आदि का उपयोग किया जाता है।

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