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Officer’s ने सबकुछ बता दिया OK! लेकिन कड़ाके की ठंड में पुआल ही सहारा

गर्म कपड़े नहीं होने के कारण मैनपाट के कई गांवों में लोग पुआल के नीचे सोने को मजबूर, ग्रामीणों का कहना अब तो हो गई है आदत, साइंस ग्रुप व बीसीसी ने बांटे कंबल

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Pranayraj rana

Dec 29, 2016

blanket distribution in Mainpat

blanket distribution in Mainpat

अंबिकापुर.
मैनपाट के विभिन्न क्षेत्रों में आज भी आदिवासी परिवार के लोगों के पास ठंड से बचने के लिए पर्याप्त मात्रा में गर्म कपड़े उपलब्ध नहीं है। शरीर गला देने वाली ठंड से बचने के लिए वहां के कई क्षेत्रों में लोग पुआल में सेाने को मजबूर हैं। इसकी जानकारी होने के बावजूद क्षेत्र के अधिकारी आला अधिकारियों तक गलत जानकारी उपलब्ध करा अपनी वाहवाही लूट रहे हैं।


मैनपाट के इन प्रभावित क्षेत्रों का बुधवार को ब्लाक कांग्रेस कमेटी व साइंस ग्रुप ने न केवल जायजा लिया, बल्कि प्रभावितों को गर्म कपड़े व कंबल का वितरण किया।



मैनपाट के लुरैना, सुपलगा, पैगा, असगवां व कमलेश्वरपुर के कई मोहल्ले में आज भी लोगों के शरीर पर कम कपड़े नजर आ जाएंगे। इस कड़कडाती ठंड में जहां सभी बचाव के लिए रजाई व हीटर का सहारा ले रहे हैं। वहीं इन क्षेत्रों में कई आदिवासी परिवार ऐसे हैं, जो गरीबी की वजह से तन पर अपने बच्चों को पूरा कपड़ा भी नहीं पहना सकते।


ठंड से बचने के लिए इन सभी क्षेत्रों के गरीब परिवार के लोग रात में पुआल के बीच सोने को मजबूर हैं। इसे लेकर पत्रिका ने प्रमुखता से समाचार प्रकाशित किया था। इसकी जानकारी लगने पर जिला प्रशासन ने जरूर सख्ती दिखाई और प्रभावित क्षेत्रों में तहसीलदार को भेजकर वहां के स्थिति की जानकारी देने को कहा। इस संबंध में प्रशासन की तरफ से तहसीलदार ने कुछ लोगों से मिलकर जानकारी कलक्टर तक तो भेज दी, लेकिन वह भी हकीकत से काफी दूर।


मैनपाट के ग्राम लुरैना के मझवारपारा, सुपलगा के कोरवापारा, पैगा के मझवारपारा, ग्राम असगवां के मझवारपारा, कोरवापारा तथा कमलेश्वरपुर के मांझीपारा के कई परिवार के लोग इस गलन भरी ठंड से बचने के लिए आज भी पुआल के बीच सोने को मजबूर हैं। लेकिन इनकी सुध क्षेत्र में पदस्थ कोई भी जिम्मेदार अधिकारी नहीं ले रहा है। बल्कि सारी स्थिति ठीक बताने में जुटा हुआ है।


ब्लाक कांग्रेस व साइंस ग्रुप ने बाटा कम्बल

पत्रिका में समाचार प्रकाशित होने के बाद सरगुजा साइंस ग्रुप व ब्लाक कांग्रेस कमेटी मैनपाट द्वारा संयुक्त रूप से पांच गांवों में पहुंच वहां की स्थितियों का जायजा लिया। संयुक्त टीम द्वारा जब इन गांव के प्रभावितों से चर्चा की गई तो उन्होंने बताया कि उनके पास कपड़े तो हैं, लेकिन ऐसे नहीं है जिससे मैनपाट के ठंड से बचाव किया जा सके। इस लिए ठंड के समय ऐसी स्थिति बनी रहती है। ठंड से बचने के लिए पुआल के बीच कई परिवार के लोग सोने को मजबूर हैं।


गर्म कपड़े के अभाव में मांझी एवं कोरवा समुदाय के कुछ लोग जीवन बचाने पुआल में आश्रय लेते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में पुआल में सोने तथा आग जलाकर उसके चारों ओर परिवार के लोगों का रात गुजारने का दौर आज भी कड़ाके की ठंड जारी है। जबकि अभी भी सरगुजा जैसे पहाड़ी क्षेत्रों में कड़ाके की ठंड पड़ती है। सरगुजा साइंस ग्रुप व ब्लाक कांग्रेस कमेटी द्वारा 5 गांवों के लगभग 200 से भी अधिक लोगों को कम्बल, शॉल, स्वेटर सहित दैनिक उपयोग के वस्त्रों का वितरण किया गया।


इस दौरान ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष बलराम यादव, जिला कांग्रेस महामंत्री नागेश्वर यादव, वृंदावन यादव, नथूनी यादव, सुदीन राजवाड़े, बलबीर मांझी, मणीकचंद, सरगुजा साइंस ग्रुप के अमित दुबे, देवकुंवर, आल्हा मांझी, भुलसी मांझी, सुकरू, सोनसाय सहित काफी संख्या में लोग उपस्थित थे।


हो गई है आदत

मैनपाट विकासखंड के कमलेश्वरपुर, नावापारा (माझीपारा), लुरैना, सुपलगा, पैगा एवं असगवां के निर्धन मांझी एवं कोरवा परिवारों के लोगों ने बताया कि कम कपड़े में ठंड गुजारने की पहाड़ी क्षेत्रों में रहकर आदत सी हो गई है। बोरों में पुआल को भरकर उसका बिस्तर बनाते हैं। पुआल के ढेर पर गुफानुमा स्थल का निर्माण कर अथवा आग जलाकर उसके चारों ओर पूरा परिवार रात गुजारता है। ऐसे में यदि गर्म कपड़ा एवं दैनिक उपयोग के वस्त्र मिल जाए तो कुछ राहत तो मिलेगी।


समाज के अध्यक्ष से बात कर किया धान जब्त

कलक्टर के निर्देश पर स्थिति का जायजा लेने पहुंचे क्षेत्र के तहसीलदार ने मांझी समाज के अध्यक्ष से स्थिति का जायजा लेने के लिए चर्चा की। मांझी समाज के अध्यक्ष भिनसरिया राम ने जब उन्हें हकीकत से अवगत कराया तो उनके द्वारा अपने घर से ला रहे धान को उनके द्वारा जब्त कर लिया गया था।

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