82 साल की पेमा के चेहरे में पड़ी झुर्रियां सिर्फ उम्र का बखान नहीं कर रही, बल्कि यह चिंता और मायूसी की सिलवटें हैं जो उम्र के अंतिम पड़ाव में अपनो से दूर रहने की पीड़ा भोगने के कारण पड़ी हैं। उसकी आंखों में अपनी बेटी के विदेश में बसने की खुशी है तो अगले ही पल में उससे दूर रहने का दर्द भी है। वो बेटी के विदेश जाने के बाद यहां बने ओल्डेज होम में जीवन के अंतिम दिन बिता रही है। पेमा कहती हैं पहले देश छूटा फिर यहां जीवन आबाद होने लगा तो अब बच्चे हमसे दूर हो रहे हैं।