घर से रुपए लेकर व अपनी जेब खर्च से रुपए बचाकर उसने कुछ पाठ्य सामग्री तैयार की है। वह चाहता है कि एेसे नेत्रहीन बच्चे जो असहाय हैं, स्कूल नहीं जा सकते हैं, वह इस पाठ्य सामग्री के जरिए घर पर ही पढ़ाई कर सकते हैं। उन तक इसे पहुंचाने के लिए आर्थिक सहायता की जरूरत है, लेकिन कलेक्टर, सामाजिक न्याय विभाग के अधिकारियों से कई बार सहयोग की गुहार लगाने के बाद भी उसे मदद नहीं मिल रही है। इसी संबंध में कलेक्टर से फिर गुहार लगाने आया था, लेकिन शाम 4.30 बजे तक इंतजार करने के बाद भी उनसे मुलाकात नहीं हो सकी।