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चंबल के डकैतों के आराध्य अचलेश्वर महादेव हैं अत्यंत चमत्कारी

- इस चमत्कारिक शिवलिंग (shivlinga) कि एक और अनोखी बात यह है कि

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Deepesh Tiwari

Nov 15, 2022

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देश में हजारों की संख्या में महादेव के मंदिर मौजूद हैं। वहीं महादेव का ही एक अचलेश्वर महादेव मंदिर (Achleshwar Mahadev Temple) चंबल के डकैतों (dacoits on Chambal) के बीच अत्यंत प्रसिद्ध है। इसके संबंध में जहां कुछ लोगों का मानना है कि यह मंदिर हजारों साल पुराना है, तो वहीं लोगों के अनुसार इसे 1875 के आस पास का बताया जाता है। लोगों के अनुसार उस समय यहां डकैतों (dacoits) का राज था और बीहड़े में आने से ही लोग कतराते थे। इस मंदिर की विशेष बात ये है कि यहां सुबह के समय शिवलिंग (shivlinga) का रंग लाल रहता है, जो की दोपहर को केसरिया रंग का हो जाता है, और जैसे-जैसे शाम होती है इस शिवलिंग का रंग सांवला होता जाता है।

धौलपुर में मौजूद है यह विचित्र शिवलिंग
दरअसल डकैतों के बीच अत्यंत प्रसिद्ध यह चमत्कारी शिवलिंग (shivlinga) राजस्थान के धौलपुर जिले में स्थित है। घौलपुर जिला राजस्थान और मध्य प्रदेश की सीमा पर है। यह इलाका चंबल के बीहड़ों के लिए प्रसिद्ध है।

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इन्हीं दुर्गम बीहड़ो के अंदर मौजूद भगवान अचलेश्वर महादेव का मंदिर (Achleshwar Mahadev Temple) आज भी चमत्कारों के लिए प्रसिद्ध है, लेकिन इसकी खास बात ये भी है कि इस मंदिर में होने वाले चमत्कारों का रहस्य आज तक कोई नहीं जान पाया है।

हजारों साल पुराना यह भगवान अचलेश्वर महादेव का मंदिर (Achleshwar Mahadev Temple) बीहड़ों मे स्थित है और यहां तक पहुंचने क रास्ता बहुत ही पथरीला और उबड-खाबड़ है। इस कारण पहले यहां बहुत ही कम लोग आते थे लेकिन जैसे-जैसे इस मंदिर में भगवान के चमत्कार कि खबरें लोगों तक पहुंची वैसे वैसे यहां पर भक्तों कि भीड़ जुटने लगी।

गहराई का पता नहीं
हर रोज तीन बार रंग बदलने वाले इस शिवलिंग कि एक और अनोखी बात यह है कि इस शिवलिंग (shivlinga) के छोर का आज तक पता नहीं चल सका है। कहते हैं बहुत समय पहले भक्तों ने यह जानने के लिए कि यह शिवलिंग (shivlinga) जमीं मे कितना गहरा है, इसकी खुदाई की, लेकिन काफी गहराई तक खोदने के बाद भी उन्हें इसके छोर का कुछ पता नहीं चला।