इस प्रसिद्ध मंदिर में लगा है मन्नत का पेड़, भक्तों की मांगी हर मुराद करता है पूरी

इस प्रसिद्ध मंदिर में लगा है मन्नत का पेड़, भक्तों की मांगी हर मुराद करता है पूरी

Tanvi Sharma | Publish: Jun, 05 2019 11:22:36 AM (IST) मंदिर

भक्त पेड़ पर बांधते हैं श्रीफल, होती है उनकी हर मुराद पूरी

भगवान श्री राम के बहुत से मंदिर हैं, जो बहुत प्रसिद्ध और चमत्कारी हैं। लेकिन हमने आज तक जो भी राम मंदिर देखें हैं, वहां उनके माता सीता और लक्ष्मण मौजूद रहते हैं। परंतु भगवान राम का एक ऐसा मंदिर भी भारत में मौजूद है, जहां उनके साथ माता सीता और लक्ष्मण नहीं बल्कि कौशल्या माता विराजमान है। जी हां, यह देश का एक मात्र मंदिर ऐसा है जहां श्री राम माता कौशल्या की गोद में बैठे हैं।

मंदिर की मुख्य मूर्ति माता कौशल्या की है और यह मंदिर कौशल्या मंदिर के नाम से प्रसिद्ध है। ऐसा मंदिर देशभर में कहीं नहीं है। मंदिर के गर्भगृह में कौशल्या माता की गोद में बालरुप में रामजी की प्रतिमा है। इसके अलावा इस मंदिर में भगवान शिव और नंदी की विशाल प्रतिमाएं हैं, मंदिर के द्वार पर हनुमानजी की प्रतिमा लगी हुई है। जो की श्रद्धालुओं का मन मोह लेती है। सात तालाबों से घिरे जलसेन तालाब के बीच में एक द्वीप है और इसी द्वीप पर मां कौशल्या का मंदिर है।

mannat tree

पेड़ करता है मन्नत पूरी

हम जिस प्राचीन और अद्भुत मंदिर की बात कर रहे हैं वह मंदिर छत्तीसगढ़ के चंद्रखुरी में स्थित है। मंदिर में माता कौशल्या और श्री राम के अलावा शिव जी और नंदी की प्रतिमाएं भी स्थापित है। वही मंदिर के मुख्य द्वार पर हनुमान जी की विशाल प्रतिमा लगी हुई है। मंदिर को लेकर लोगों की मान्यता है की यहां पर सीताफल का एक खास पेड़ लगा हुआ है, जिसे 'मन्नत का पेड़' कहा जाता है। लोगों का मानना है की इस मन्नत के पेड़ पर पर्ची में अपना नाम लिखकर उसे श्रीफल के साथ बांधने से लोगों की मुरादें पूरी होती है। यहां जो भी भक्त आकर श्रद्धा से श्रीफल बांधता है उसकी मुराद जरुर पूरी होती है।

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मंदिर को लेकर पौराणिक मान्यताएं

पौराणिक कथाओं के अनुसार यहां पर एक पेड़ के नीचे सुषेण वैध की समाधि है आपको बता दें कि रामायण के अनुसार सुषेण लंका के राजा रावण का राजवैद्य था। जब रावण के पुत्र मेघनाद के साथ हुए युद्ध में लक्ष्मण मूर्छित हो गए, तब सुषेण ने ही संजीवनी बूटी मंगाकर लक्ष्मण के प्राण बचाए थे। जब रावण को मारकर श्री राम वापस अयोध्या आए तो सुषेण वैध भी उनके साथ आ गए और यहीं पर उन्होंने अपने प्राणों का त्याग किया इसीलिए उनकी समाधि यहां बनाई गई।

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