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रामायणकाल से बने इस शिव मंदिर में पूरी होती है मन मांगी मुरादें, लक्ष्मण ने भी की थी यहां आराधना

रामायणकाल से बने इस शिव मंदिर में पूरी होती है मन मांगी मुरादें, लक्ष्मण ने भी की थी यहां आराधना

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Tanvi Sharma

Aug 02, 2018

temple

रामायणकाल से बने इस शिव मंदिर में पूरी होती है मन मांगी मुरादें, लक्ष्मण ने भी की थी यहां आराधना

लखनऊ के डालीगंज में गोमती नदी के तट पर बना महादेव मंदिर लोगों की आस्था का केंद्र बना हुआ है। यहां शिव भक्त अपनी मनोकामना लेकर शिव के दरबार में आते हैं और इस श्रृद्धा के साथ अपनी मनोकामना कहते हैं की भगवान शिव उनकी इच्छा पूरी करेंगे। महादेव का यह मंदिर मनकामेश्वर नाम से प्रसिद्ध है। लोगों की आस्था है की यहां भोलेमाथ हर भक्‍त की सभी इच्‍छाएं पूरी कर देते हैं। गोमती नदी के बाएं तट पर शिव-पार्वती का ये मंदिर बहुत सिद्ध माना जाता है।

मंदिर में सुबह शाम होती है भव्य आरती

सावन के मौके पर मंदिर में भक्तों की भारी भीड़ देखने को मिलती है। यहां पर सुबह व शाम आरती का विशेष महत्व माना जाता है। मान्यताओं के अनुसार कहा जाता है कि यहां जो आरती में शामिल होकर मन में जो भी कामना की जाती है वो पूरी हो जाती है। यहां मंदिर में भोलेनाथ का फूल, बेलपत्र और गंगा जल से अभिषेक किया जाता है। मंदिर में सुबह और शाम को भव्य आरती होती हैं, जिसमें काफी संख्या में भक्त हिस्सा लेते हैं। मनकामेश्‍वर मंदिर में फर्श पर चांदी के सिक्के लगे हैं, जिससे मंदिर काफी सुंदर लगता है।

मंदिर में शिवलिंग की लक्ष्मण ने की थी आराधना

भोले बाबा के दरबार में आने वाले भक्तों को कभी भी निराश होकर नहीं जाना पड़ता। यहां मनकामेश्वर मंदिर में आए सभी भक्तों की महादेव सभी इच्‍छाएं पूरी कर देते हैं। मंदिर को लेकर लोगों का कहना है की माता सीता को वनवास छोड़ने के बाद लखनपुर के राजा लक्ष्मण ने यहीं रुककर भगवान शंकर की अराधना की थी, जिससे उनके मन को बहुत शांति मिली थी। उसके बाद कालांतर में मनकामेश्वर मंदिर की स्थापना की गई थी।

गोमती नदी के किनारे बसा यह मंदिर रामायणकाल का है और इनके नाम मनकामेश्‍वर से ही इस बात की एहसास हो जाता है कि यहां मन मांगी मुराद कभी अधूरी नहीं रहती। जैसे ही भक्‍त इस मंदिर में प्रवेश करते हैं उन्‍हें शांति की अनुभूति होती है। लोग यहां आकर मनचाहे विवाह और संतानप्राप्ति की मनोकामना करते हैं और उसे पूरा होने पर बाबा का बेलपत्र, गंगाजल और दूध आदि से अभिषेक करते हैं।