मुस्लिम और सिख धर्म के लोग भी करते हैं यहां पूजा, भैरव बाबा की प्रतिमा से आते हैं आंसू

मुस्लिम और सिख धर्म के लोग भी करते हैं यहां पूजा, भैरव बाबा की प्रतिमा से आते हैं आंसू

Tanvi Sharma | Publish: Aug, 04 2019 05:00:12 PM (IST) मंदिर

5 हजार साल पुरानी है भैरव बाबा की प्रतिमा

भारत में अनेकों मंदिर हैं जहां माना जाता है की साक्षात भगवान विराजमान हैं। उन्हीं मंदिरों में से एक मंदिर हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में स्थित है, जहां भगवान अपने भक्तों पर आने वाली परेशानियों का संकेत पहले से दे देते हैं। यह मंदिर वज्रेश्वरी मंदिर के नाम से प्रसिद्ध है। मंदिर में ही भैरव बाबा की प्रतिमा भी स्थापित है। जिसे लेकर लोगों का मानना है की जब भी कोई अनहोनी या कोई विपदा आऩे वाली होती है तो बाबा की प्रतिमा से आंसू बहने लगते हैं। यह मंदिर देवी मां के 51शक्तिपीठों में से एक माना जाता है, जो की लोगों की आस्था का प्रमुख केंद्र है।

 

vrajeshwari mata mandir

5 हजार साल पुरानी भैरव बाबा की प्रतिमा

वज्रेश्वरी देवी मंदिर में स्थापित भैरव बाबा की प्रतिमा करीब 5 हजार साल पुरानी है। वहीं मंदिर के पुजारी के अनुसार जब भी उन्हें प्रतिमा से आंसू गिरते हुए देखते हैं, तो वह श्रद्धालुओं के संकट को दूर करने के लिए विशेष पूजा-अर्चना व हवन शुरू कर देते हैं। उनका कहना है की भैरव बाबा की प्रतिमा से आंसू तभी आते हैं जब भक्तों पर कोई मुसीबत आने वाली होती है। इसके साथ ही हवन पूजा-अर्चना करने से आने वाली परेशानियां टल जाती है। बाबा भैरव अपने भक्तों को पहले से ही सुरक्षित कर देते हैं।

मूर्ति से आंसू बहने के बाद हुआ खा हादसा

स्थानियों के अनुसार साल 1976-77 में भैरव बाबा की मूर्ति से आंसू व शरीर से पसीना निकला था। उस समय कांगड़ा बाजार में भीषण अग्निकांड हुआ था। काफी दुकानें जल गई थीं। उसके बाद से यहां विपत्ति टालने के लिए हर साल भैरव जयंती मनाई जाती है।

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तंत्र सिद्धियों के लिए प्रसिद्ध है मंदिर

यह जगह, तन्त्र-मन्त्र, सिद्धियों, ज्योतिष विद्याओं, तन्त्रोक्त शक्तियों, देव परंपराओं की प्राप्ती के लिए प्रसिद्ध स्थान है। यहां माता सती का दाहिना वक्षस्थन गिरा था जिसके कारण यह शक्तिपीठ माना जाता है। इस मंदिर को स्तनपीठ भी कहा गया है और स्तनपीठ भी अधिष्ठात्री बज्रेश्वरी देवी है।

तीन धर्मों का प्रतीक है मंदिर

यहां तीन धर्मों के प्रतीक के रूप में मां की तीन पिण्डियों की पूजा की जाती है। माता बज्रेश्वरी का यह शक्तिपीठ अपने आप में अनूठा है। क्योंकि यहां केवल हिन्दू ही नहीं बल्कि मुस्लिम और सिख धर्म के लोग इस धाम में आकर पूजा-अर्चना करते हैं। कहा जाता है कि ब्रजेश्वरी देवी मंदिर के तीन गुंबद इन तीन धर्मों के प्रतीक हैं।

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