यूनेस्को की विश्व धरोहर में शामिल है यह मंदिर, वास्तुशास्त्र की नजर से भी है बहुत खास

यूनेस्को की विश्व धरोहर में शामिल है यह मंदिर, वास्तुशास्त्र की नजर से भी है बहुत खास

Tanvi Sharma | Publish: Nov, 19 2018 06:18:36 PM (IST) मंदिर

यूनेस्को की विश्व धरोहर में शामिल है यह मंदिर, वास्तुशास्त्र की नजर से भी है बहुत खास

हिंदू धर्म में सूर्य को प्रत्यक्ष देव के रुप में माना जाता है। देवताओं में एकमात्र सूर्य ही हैं जिन्हें हम साक्षात देख कर पूजा कर सकते हैं। सूर्यदेव की किरणें हर व्यक्ति के लिए बहुत ही जरुरी है उनके बिना जीवन असंभव है। सूर्यदेव के भारत में अनेकों मंदिर हैं। उन्हीं मंदिरों में से एक मंदिर उड़ीसा के कोणार्क का सूर्य मंदिर। भारत के 7 आश्चर्यों में भी शामिल यह सूर्य मंदिर भव्य रथ के आकार में बना हुआ है। माना जाता है की मंदिर का निर्माण पूर्वी गंगा साम्राज्य के महाराजा नरसिंहदेव ने 1250 सी.ई में करवाया था। मंदिर की दीवारें, पिल्लर और पहिये बहुत ही किमती धातुओं से बने हुए हैं। यह मंदिर अपनी अनोखी बनावट व खूबसूरती के कारण UNESCO वर्ल्ड हेरिटेज साईट में शामिल है।

 

konark sun temple

ये हैं कोणार्क मंदिर से जुड़ी खास बातें…

भारत के पूर्वी राज्य उड़ीसा के पुरी जिले में 21 मील उत्तर पूर्व की ओर चंद्रभागा नदी के किनारे कोणार्क में स्थित है। कोणार्क नाम विशेषतः कोना-किनारा और अर्क – सूर्य शब्द से बना है. यह पूरी और चक्रक्षेत्र के उत्तरी-पूर्वी किनारे पर बसा हुआ है। लाल बलुआ पत्थर और काले ग्रेनाइट पत्थर बना यह मंदिर बेहद खूबसूरत होने के साथ-साथ यह मंदिर वास्तु शास्त्र की नजर से भी बहुत खास है। इस मंदिर की पूरी दुनिया में चर्चा होती है। मंदिर की कल्पना सूर्य के रथ के रूप में की गई है। रथ में बारह जोड़े विशाल पहिए लगे हैं और इसे सात शक्तिशाली घोड़े तेजी से खींच रहे हैं। यह भारत का भव्य सूर्य मंदिर हमें सूर्य भगवान के साक्षात दर्शन करवाती है। इस मंदिर में सूर्य भगवान की तीन प्रतिमाएं हैं- बाल्यावस्था यानी उदित सूर्य- जिसकी ऊंचाई 8 फीट है। युवावस्था, जिसे मध्याह्न सूर्य कहते हैं, इसकी ऊंचाई 9.5 फीट है। तीसरी अवस्था है- प्रौढ़ावस्था, जिसे अस्त सूर्य भी कहा जाता है, जिसकी ऊंचाई 3.5 फीट है।

 

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श्री कृष्ण से जुड़ी है मंदिर की कहानी

धर्मग्रन्थ साम्बा के अनुसार, कृष्णा के बेटे को कुष्ट रोग का श्राप था। उन्हें ऋषि कटक ने इस श्राप से बचने के लिये सूरज भगवान की पूजा करने की सलाह दी, तभी सांबा ने चंद्रभागा नदी के तट पर मित्रवन के नजदीक 12 सालों तक कड़ी तपस्या की। दोनों ही वास्तविक कोणार्क मंदिर और मुल्तान मंदिर साम्बा की ही विशेषता दर्शाते है।

कैसे पहुंचे कोणोर्क मंदिर

कोणार्क उडीसा राज्य में स्थित है। भुवनेश्वर और पुरी जैसे प्रमुख शहरों से कोणार्क सड़क द्वारा जुडा हुआ है। आइए जानते है कि कोणार्क कैसे पहुंच सकते है।

हवाई मार्ग: अगर आफ हवाई जहाज के द्वारा जाते है, तो आप भुवनेश्वर हवाई अड्डे तक पहुंच सकते है, जहाँ से कोणार्क मात्र 64 किमी. दूर है।

रेल मार्ग: कोणार्क के आसपास कोई रेलवे स्टेशन नहीं है। अगर आप रेल द्वारा जा रहे है, तो आपको पुरी रेलवे स्टेशन पर उतरना होगा और इस रेलवे स्टेशन से कोणार्क 31 किमी. दूर है।

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