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100 महिलाएं बनाएंगी पूड़ी, 1200 लीटर शुद्ध घी का होगा उपयोग

श्रीराम-जानकी विवाह. शुरू हुई पंगत की तैयारी, दो दिन बनेगी मीठी बूंदी  

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100 महिलाएं बनाएंगी पूड़ी, 1200 लीटर शुद्ध घी का होगा उपयोग

100 महिलाएं बनाएंगी पूड़ी, 1200 लीटर शुद्ध घी का होगा उपयोग

टीकमगढ़/ओरछा.बुंदेलखण्ड की अयोध्या ओरछा में राजा के रूप में विराजे श्रीरामराजा सरकार के विवाह की पंगत की तैयारियां शुरू हो गई हंै। मंडप की पंगत में आने वाले हजारों श्रद्धालुओं को भोजन कराने के लिए तीन दिन पहले से ही रसोईयों ने काम शुरू कर दिया है। सरकार के विवाह की पंगत की विशालता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि आगामी दो दिन रसोईयां केवल मिठाई के लिए बूंदी बनाने का काम करेंगे।
बुधवार की दोपहर 2 बजे से मंडप की पंगत के लिए भोजन-प्रसादी बनाने का काम शुरू हो गया। 2 बजे शुभ मुहुर्त पर पंडितों ने मंडप की पंगत के लिए पूजन कर प्रसादी निर्माण शुरू कराया। पिछले 21 वर्ष से श्रीराम-जानकी विवाह के भंडारे का काम संभाल रहे मुख्य रसाईया संजय जैन ने बताया कि दो दिन केवल पंगत के लिए बूंदी बनाई जाएगी। यहां पर दो कमरों में बूंदी का भंडारन किया जाएगा। वहीं 29 नवम्बर की सुबह से पंगत के लिए सब्जी काटना शुरू होगा और पूड़ी के लिए आटा गूंथने का काम शुरू होगा।
1200 लीटर लगेग शुद्ध घी: श्रीरामराजा सरकार के विवाह की पंगत में पूड़ी एवं मिठाई का पूरा काम शुद्ध घी में होगा। संजय जैन ने बताया कि इस आयोजन में लगभग 1200 लीटर शुद्ध की लगेगा। वहीं सब्जियों के लिए 600 लीटर तेल मंगाया गया है। इसके साथ ही 50 क्विंटल सब्जी एवं 50 क्विंटल आटा लगेगा। इसके साथ ही रायतें के लिए 7 क्विंटल दही की जरूरत होगी। बूंदी बनाने के लिए अभी 22 लोग काम कर रहे है।
३० रसोइए लगेंगे: राजा के रूप में विराजे श्रीरामराजा सरकार के मंडप का प्रसाद के लिए आने वाले हजारों श्रद्धालुओं के लिए प्रसाद बनाने वालों की भी पूरी फौज रहेगी।
संजय जैन ने बताया कि 29 नवम्बर की दोपहर से सब्जियों को काटने का काम शुरू किया जाएगा, वहीं रात्रि से ही पूडिय़ा बननी शुरू हो जाएगी। उन्होंने बताया कि सब्जी बनाने के लिए लगभग 30 रसोईयां लगेंगे, वहीं पूड़ी बेलने के लिए 70 से 100 महिलाओं को काम पर लगाया जाएगा। तब कहीं जाकर इस पंगत की व्यवस्था हो पाएगी। यह महिलाएं दो दिन लगातार काम करेंगी।

श्रीरामराजा के विवाह की पंगत पूरी बुंदेली अंदाज में होगी। यहां पर पत्तों से निर्मित पत्तल एवं दोना(कटोरी) में ही भोजन परोसा जाएगा। इसके साथ ही सभी को जमीन पर बैठा कर प्रसाद दिया जाएगा। 30 नवम्बर की दोपहर 3 बजे से शुरू होने वाली इस पंगत में परोसने के लिए भी 100 से 150 सेवादार लगेंगे। इसके साथ ही विभिन्न अधिकारी, जनप्रतिनिधि भी इस परोस में हिस्सेदारी करेंगे।