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एक दुर्घटना में खोया था हाथ, इसके बाद भी नहीं हारी हिम्मत

पठा क्षेत्र के नजदीक जंगल फैला हुआ है। वहां आवारा जानवरों का आतंक बना हुआ है। उन जानवरों ने ५० एकड़ में बोई गई मटर, चना के साथ सरसों की फसल को नुकसान पहुंचा दिया है।

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 50 acre crop damaged due to terror of stray animals

50 acre crop damaged due to terror of stray animals


टीकमगढ़/पठा.पठा क्षेत्र के नजदीक जंगल फैला हुआ है। वहां आवारा जानवरों का आतंक बना हुआ है। उन जानवरों ने ५० एकड़ में बोई गई मटर, चना के साथ सरसों की फसल को नुकसान पहुंचा दिया है। इसके साथ ही कम खेती वाले किसानों द्वारा बोई गई सब्जी की खेती को भी बर्बाद कर दिया है। किसान का कहना था कि वर्ष १९९८ की एक दुर्घटना में हाथ खोया था। इसके बाद भी हिम्मत नहीं हारी। अब आवारा मवेशियों ने सब्जी और अनाज की फसलों को बर्बाद कर दिया है। जिसकी चिंता में परिवार डूबा हुआ है।
ग्राम पठा निवासी दिव्यांग किसान राजेंद्र भौडेले ने बताया कि पिछले कई वर्षो से अपनी कम जमीन में सब्जी उगाने का कार्य करते आ रहे। लेकिन इस बार आवारा जानवरों ने सब्जी की फ सल को उजाड दिया है। किसान ने बताया कि एक साल में ढाई एकड़ जमीन पर १०० क्विंटल बैगन, 60 क्विंटल मिर्च और करीब 50 क्विंटल टमाटर निकाल लेते थे। लेकिन इस बार हाथ खाली ही रह गए हैं। उनका कहना है कि सन 1998 में एक दुर्घटना में अपना दाया हाथ खो दिया था। जिसके कारण मजदूरी नहीं कर पाते। फिर भी हिम्मत नहीं हारी और सब्जी उगाने का फैसला किया। लेकिन इस बार आवारा जानवरों ने मेहनत पर पानी फेर दिया है।


जानवरों के आंतक ने कर दिया बर्बाद
टीकमगढ़ तहसील की ग्राम पंचायत पठा में इन दिनों आवारा जानवरों का आतंक बड़ता ही जा रहा है। आवारा जानवरों ने पठा खास के मोटे में करीब 50 एकड़ की फ सलों को अपना निवाला बना लिया है। किसान मुन्नलाल साहू, भरत असाटी, रिंकू जैन, दयाल साहू, शंकर साहू, कमलेश शुक्ला, घनश्याम दास असाटी, रामप्रसाद कुशवाहा, मकुंदी बंशकार, कालीचरण साहू, छत्रसाल लोधी, रघुवीर लोधी, संतोष शुक्ला, जितेंद्र शुक्ला ने बताया कि आवारा जानवर अब किसानों के लिए जी का जंजाल बन गए हैं। दिनरात खेतो की रखवाली करने के बाद भी फ सलों को बचा नहीं पा रहे हैं। खेतों में मटर और मसूर बर्बाद हुई है। फ सल को देख कर रोना आ रहा है।
धना, मिर्च, बैगन और टमाटर की खेती हुई बर्बाद
किसानों का कहना है कि ग्राम पंचायत पठा में इन जानवरो के रोकथाम की कोई व्यवस्था नहीं है। जिससे आज किसान मुसीबत से गुजर रहा है। वहीं किसानों ने नकद खेती में धना, मटर, बैगन, मिर्च और आलू को बोया था। जो जानवरों ने बर्बाद कर दिया है।