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जिला न्यायालय में चलाया गया डॉ गौर सर के लिए अभियान

अभिभाषक संघ के अध्यक्ष और पदाधिकारी

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अभिभाषक संघ के अध्यक्ष और पदाधिकारी

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अभिभाषक संघ ने लिखे पोस्ट कार्ड, गौर सर को भारत रत्न दिलाने लिखे प्रधानमंत्री के नाम पोस्ट कार्ड

टीकमगढ़. सोमवार को जिला न्यायालय में डॉ सर हरिसिंह गौर को भारत रत्न दिलाने के लिए पोस्ट कार्ड अभियान चलाया गया। अभिभाषक संघ ने प्रधानमंत्री के नाम पोस्टकार्ड लिखकर भेजे।
अभिभाषक संघ और अध्यक्ष अधिवक्क्ता अनिल त्रिपाठी ने पोस्ट कार्ड अभियान के दौरान कहा कि सर डॉ गौर, जिनकी शिक्षा नीति और समाज सुधारक पहल ने भारत के समाज में बदलाव लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। भारतीय इतिहास में एक प्रेरणा के रूप में जीवित है। अभिभाषक संघ ने कहा कि पत्रिका का यह अभियान एक सशक्त प्रयास है, ताकि उनके कार्यों को नए भारत की युवा पीढ़ी तक पहुंचाया जा सके और उन्हें उचित सम्मान मिल सके। अभिभाषक संघ का मानना है कि जब तक यह अभियान बड़े पैमाने पर नहीं फैलता, तब तक उनके उद्देश्य को पूरा करना संभव नहीं है। इस उद्देश्य के लिए अभिभाषक संघ ने एक पोस्टकार्ड अभियान चलाया है। जिसमें वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से डॉ. हरि सिंह गौर को देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न देने की मांग कर रहे है।

उनका कहना था कि सर डॉ हरिसिंह गौर एक महान शिक्षाविद्, विधिवेत्ता, न्यायविद्, समाज सुधारक, साहित्यकार, और देशभक्त थे। उन्होंने अपनी बचत से 18 जुलाई वर्ष1946 को सागर विश्वविद्यालय की स्थापना की थी। यह विश्वविद्यालय भारत का 18 वां विश्वविद्यालय है। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय और नागपुर विश्वविद्यालय में उपकुलपति के पद पर कार्य किया है। वे भारतीय संविधान सभा के उपसभापति और साइमन कमीशन के सदस्य भी रहे। उन्होंने कानून शिक्षा, साहित्य, समाज सुधार, संस्कृति, राष्ट्रीय आंदोलन, संविधान निर्माण आदि में योगदान दिया। उन्होने अपनी गाढ़ी कमाई से 20 लाख रुपए की धनराशि से सागर विश्वविद्यालय स्थापित किया और वसीयत द्वारा अपनी निजी सपत्ति से 2 करोड़ रुपए दान भी किया था।