23 जनवरी 2026,

शुक्रवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

विधि महाविद्यालय बनकर तैयार, लेकिन सुविधाओं की कमी से जूझ रहा महाविद्यालय

विश्व बैंक पोषित योजना के तहत ६५० लाख रुपए की लागत से वर्ष २०१६-१७ में तखा मजरा में शासकीय विधि महाविद्यालय का निर्माण किया गया है। उसमें कक्षाएं भी संचालित होने लगी है, लेकिन वहां तक पहुंचने के लिए सडक़ और सुरक्षा के लिए बाउंड्रावाल नहीं है।

2 min read
Google source verification
 Boundary wall for security and lack of staff to assist

Boundary wall for security and lack of staff to assist


टीकमगढ़. विश्व बैंक पोषित योजना के तहत ६५० लाख रुपए की लागत से वर्ष २०१६-१७ में तखा मजरा में शासकीय विधि महाविद्यालय का निर्माण किया गया है। उसमें कक्षाएं भी संचालित होने लगी है, लेकिन वहां तक पहुंचने के लिए सडक़ और सुरक्षा के लिए बाउंड्रावाल नहीं है। कार्यालय और छात्रों की सहायता के लिए स्टाफ भी नहीं है। छात्रों के अभ्यास के लिए म्यूर्ट कोर्ट (काल्पनिक न्यायालय) बनकर तैयार तो हो गया है, लेकिन चालू नहीं हो पाया है। जिसकी मांग के लिए एक बार कलक्टर और दो बार केंद्रीय मंत्री उच्च शिक्षा मंत्री को पत्र भी लिख चुके है।
जिले में संघर्षों के बाद शासकीय विधि महाविद्यालय का निर्माण हो पाया है। अब उसे व्यवस्थित करने में प्रशासन को पसीना आ रहा है। उसे व्यवस्थित करने के लिए विधि महाविद्यालय प्राचार्य से लेकर, कलक्टर और केंद्रीय मंत्री डॉ वीरेंद्र कुमार भी उच्च शिक्षा मंत्री डॉ मोहन यादव को पत्र लिख चुके है। उसके बाद भी विधि महाविद्यालय असुरक्षित संचालित हो रहा है। उसकी सुरक्षा के लिए बाउंड्रीवाल और वहां तक पहुंचने स्थाई सडक़ भी नहीं बन पाई है। हालांकि शासन ने मनरेगा योजना के तहत करोड़ों रुपए की लागत से सीसी सडक़ स्वीकृत की है, लेकिन सडक़ के बीच में २२ लोगों की जमीन फंसी है।
४०० मीटर बाउंड्रीवाल स्वीकृत कराने कलक्टर ने लिखा था पत्र
तत्कालीन कलक्टर सुभाष कुमार द्विवेदी ने ८ दिसंबर २०२२ को उच्च शिक्षा विभाग आयुक्त के नाम दिए पत्र में कहा था कि विधि महाविद्यालय के लिए २६८ बाउंड्रीवाल निर्माण की स्वीकृति मिली थी, लेकिन एरिया अधिक होने के कारण ४०० मीटर की बाउंड्रीवाल निर्माण कराना जरूरी है। तकनीति स्वीकृति के लिए ४० लाख रुपए की मांंग के लिए पत्र दिया गया था लेकिन उस पर शासन ने कार्रवाई नहीं की है।
दो बार लिखा केंद्रीय मंत्री ने उच्च शिक्षा मंत्री को पत्र
टीकमगढ़ लोकसभा क्षेत्र के सांसद और सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री डॉ वीरेंद्र कुमार ने कलक्टर को १८ फरवरी २०२३ को लिखे पत्र में कहा था कि विधि महाविद्यालय के पास की एक एकड़ जमीन पर अतिक्रमण है। उसे मुक्त कराकर सडक़ निर्माण, बाउंड्रीवाल निर्माण कराई जाए। इसके साथ ही छात्रों के अभ्यास के लिए म्यूर्ट कोर्ट (काल्पनिक न्यायालय) निर्माण कराया जाए। वहीं २९ जुलाई २०२३ को भी उच्च शिक्षा मंत्री डॉ मोहन यादव के नाम लिखे पत्र में कहा था कि विधि महाविद्यालय के लिए में चौकीदार, भृत्य, लिपिक, लेखापाल और पुस्तकालय अधीक्षक की कमी को पूरा किया जाए लेकिन केेंद्रीय मंत्री के पत्र पर ध्यान नहीं दिया गया है।


२५० लाख रुपए की सडक़ हुई स्वीकृत
विधि महाविद्यालय तक पहुंचने के लिए सडक़ निर्माण नहीं है। ग्राम पंचायत ने अस्थाई रूप से सुनवाई की ओर से मिट्टी मुरम से सडक़ का निर्माण कर दिया है। महाविद्यालय की मांग पर तखा मजरा से होते हुए विधि महाविद्यालय तक २ करोड ५० लाख रुपए की लागत से सीसी सडक़ निर्माण की स्वीकृति मिल गई है, उस सडक़ का सीमांकन भी हो चुका है, लेकिन सडक़ के बीच में २२ किसानों की जमीन आ रही है। जिसके कारण सडक़ निर्माण कराना संभव नहीं है।
इनका कहना
महाविद्यालय की बाउंड्रीवाल के लिए पीयूआई ने पूरी तैयारी करके फाइल को संबंधित विभाग को सौंप दी है, लेकिन स्वीकृति नहीं मिल पाई है। अतिक्रमण को भी नहीं हटाया गया है। जहां से सीसी सडक़ स्वीकृत हुई है। उस सडक़ पर कई किसानों की जमीन बीच में आ रही है। अभी सुनवाहा ग्राम पंचायत की सडक़ से छात्रों और स्टाफ का आना हो रहा है। महाविद्यालय की सुरक्षा के लिए प्रशासन और शासन से लगातार मांग की जा रही है।
डॉ पुष्पेंद्र सिंह, प्राचार्य, विधि महाविद्यालय टीकमगढ़।