
Cheating with children
टीकमगढ़. शिक्षा विभाग में चल रही गड़बडिय़ां रूकने का नाम नही ले रही है। बच्चों को शिक्षा देना तो दूर उनके स्वास्थ्य और रूचि पूर्ण भोजन के लिए शासन द्वारा भेजी जा रही चिक्की और दूध को बच्चों के मुंह से छीना जा रहा है। आलम यह है कि बल्देवगढ़ विकासखण्ड के दर्जनों स्कूलों में आज तक बच्चों को चिक्की और दूध का स्वाद भी चखने को नही मिला है। इसके बाद भी अधिकारी इस मामले की जांच कराने की बात कह अपने दायित्व की इतिश्री कर रहे है।
शिक्षा विभाग द्वारा पिछले शिक्षण सत्र जुलाई 2017 से बच्चों को रूचिकर मध्यान्ह भोजन परोसने के क्रम में छात्रों को चिक्की देने की व्यवस्था की गई थी। विदित हो कि शासन द्वारा बच्चों को दूध तो पहले से ही दिया जा रहा था। इसके साथ ही शासन ने सप्ताह में तीन दिन मंगलवार, गुरूवार और शनिवार को बच्चों को चिक्की देने का भी निर्णय लिया था। शासन के आदेश के बाद विकासखण्ड की 308 प्राथमिक शालाओं के 24 हजार 844 छात्रों के लिए प्रतिमाह इसकी व्यवस्था तो की जा रही है, लेकिन इसे दुर्भाग्य ही कहेंगे कि यह स्कूलों तक नही पहुंच पा रही है।
महिनों से नही मिला सामान: छात्रों को दी जाने वाले चिक्की और दूध के विषय में भले ही जिम्मेदार अधिकारी हर माह पूरी मात्रा में सामान भेजने की बात कह रहे हो, लेकिन हकीकत यह है कि महिनों से यह सामान छात्रों को नसीब नही हुआ है। ग्राम भेलसी की प्राथमिक शाला के सहायक शिक्षक रामगोपाल गुप्ता की माने तो यहां पर फरवरी माह से चिक्की नही आई है। यही हाल ग्राम देवरदा का है। यहां पर पदस्थ शिक्षक शीला असाटी का कहना है कि यहां पर तो एक भी बार चिक्की नही आई है। पुराखेरा, बिजरई में भी बच्चों को चिक्की चीखने के लिए नही मिली है। वहीं बालक शाला हटा में जनवरी, हटा की कन्या शाला में जनवरी एवं स्वागी के प्राथमिक शाला में तीन माह से चिक्की नही पहुंची है। ऐसे ही अन्य शालाएं है, जहां के बच्चों को दूध और चिक्की देखने को नही मिली है।
व्यवस्थाओं पर उठ रहे सवाल: चिक्की और दूध का स्कूलों तक न पहुंचना केवल योजना में लापरवाही या भ्रष्टाचार होना उजागर नही कर रहा है, बल्कि यह शिक्षा विभाग की पूरी व्यवस्थाओं पर प्रश्र खड़े कर रहा है। स्कूलों में चिक्की और दूध का महिनों न पहुंचा यह भी साबित कर रहा है कि जिम्मेदार अधिकारी कभी भी शालाओं का निरीक्षण कर यहां की व्यवस्थाओं का जायजा नही ले रहे है। यदि यह जायजा ले रहे होते तो उनके सामने यह समस्या जरूर आती है। और यदि वह शालाओं में जाकर व्यवस्थाएं देख रहे है तो यह गड़बड़ी उनकी मिलीभगत से होना साबित हो रही है।
आखिर कहां जा रहा सामान: इस मामले में यह प्रश्र भी अबूझ है कि आखिर सामान जा कहां रहा है। जब बीआरसी हर माह पूरी मात्रा का सामान भेजने की बात कह रहे है और दूसरी ओर स्कूलों में यह सामान नही पहुंच रहा है तो यह सामान जा कहां रहा है। यह भी जांच का विषय है। लेकिन इसकी न तो जिम्मेदारों को परवाह है और न ही प्रशासन को। कुल मिला कर क्षेत्र में योजना को पलीता लगाया जा रहा है।
कहते है अधिकारी: चिक्की और दूध हर माह शालाओं को भेजा जा रहा है। यदि स्कूलों में नही पहुंच रहा है तो इसकी जांच कराई जाएगी।- आरएल परासर, बीआरसीसी, बल्देवगढ़।
Published on:
29 Mar 2018 04:18 pm
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