
मवई रेलवे स्टेशन पर छाया अंधेरा
वारदातों के डर से दूसरे रेलवे स्टेशन से कर रहे सफर
टीकमगढ़. मवई रेल्वे स्टेशन टीकमगढ़ स्टेशन से १३ किमी की दूरी पर हैं। जहां शाम होते प्लेट फार्म पर अंधेरा पसर जाता हैं। यहां पर दो या चार दिन से नहीं, महीनों से अंधेरा छाया हैं। कई यात्री तो वारदातों से बचने के लिए मवई की जगह टीकमगढ़ और सरकनपुर रेल्वे स्टेशन से बैठना पंसद कर रहे हैं। जबकि यात्रियों द्वारा संबंंधित अधिकारियों को रेलवे प्लेट फार्म पर उजाला करने की चर्चा भी कर चुके हैं। उसके बाद भी यात्रियों की सुरक्षा के लिए ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं।
मवई रेलवे स्टेशन मैदान में कई महीनों से अंधेरा छाया हुआ है। शाम होते ही रेलवे प्लेट फार्म के दोनों ओर अंधेरा पसर जाता है। ऐसे में प्लेटफ ॉर्म पर इंतजार करने वाले यात्रियों को रात के समय आपराधिक वारदात होने का भय बना रहता है। सबसे ज्यादा परेशानी महिलाओं को होती है। अंधेरे में लूटपाट जैसी घटना होने का खतरा बना रहता है। वहीं छोटे बच्चे भी अंधेरे के कारण डरे-सहमे रहते हैं।
मवई निवासी मार्तण्ड सिंह लोधी, सेवकराम, शैलेंद्र सिंह पुष्पकार, साकिर खान ने बताया कि शाम होते ही स्टेशन परिसर के आउटर पर आवारा तत्व सक्रिय रहते हैं। जो पटरियों के आसपास ही बैठकर नशा करते हैं। ऐसे में जब यात्री लंबी दूरी की ट्रेन पकडऩे प्लेटफ ॉर्म के आगे या पीछे के छोर पर जाता है तो हमेशा अनहोनी का भय बना रहता है। परिवार के साथ ट्रेन के इंतजार करने वाले यात्रियों को ज्यादा परेशानी होती है।
यात्रियों को पानी की भी नहीं सुविधा
खजुराहो और टीकमगढ़, ललितपुर, झांसी, बीना, भोपाल और इंदौर के साथ दिल्ली जाने वाली ट्रैनों की संख्या बढ़ गई हैं, लेकिन स्टेशन पर मिलने वाली मूलभूत सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। रेलवे स्टेशन भले ही भारतीय रेल की दृष्टि से महत्वपूर्ण और राजस्व देने वाला हो, लेकिन यहां पर सुविधा न मिलने से यात्रियो को निराश होना पड़ रहा हैं। यात्रियों ने बताया कि रेलवे विभाग द्वारा पूर्व में एक हैंडपंप खनन किया था। लेकिन उन्होंने इसे चालू नहीं किया और चोरी का सामना करना पड़ा।
यात्रियों के साथ हो चुके हादसे
ललितपुर की ओर जाने वाली यात्री राघवेंद्र सिंह ठाकुर, पुरुषोत्तम नायक, बब्लू प्रजापति और खूबचंद्र कुशवाहा ने बताया कि हम लोगों के लिए सबसे नजदीके रेलवे स्टेशन मवई हैं, लेकिन उस रेलवे स्टेेशन पर अंधेरा छाया हुआ हैं। जहां पर वारदात होने का डर बना रहता हैं। रात्रि के समय प्रयागराज, बरौनी के साथ अन्य ट्रैनों का आवागमन होता हैं। वह मवई रेलवे स्टेशन पर खड़ी भी होती हैं, लेकिन मवई स्टेशन की जगह सरकनपुर और टीकमगढ़ पर उतर जाते हैं।
इनका कहना
मवई रेलवे स्टेशन पर उजाला क्यों नहीं हो रहा हैं। उसकी जानकारी करवाता हूं। शायद वहां पर ट्रैनें भी रूकती हैं। पता करवाकर रेल्वे स्टेशन पर उजाला कराने का प्रयास किया जाएगा।
मनोज सिंह, पीआरओर रेलवे जंक्शन झांसी।
Published on:
30 Jun 2024 07:54 pm
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