
Devotees dance in silence
टीकमगढ/कुण्डेश्वर. दीपावली के दूसरे दिन सोमवार को गोवर्धन पूजा पर जिले में मौनियों की टोलियां निकली। भगवान श्रीकृष्ण के ग्वालों के रूप में वेश एवं मौनधारण कर निकले इन मौनियों ने जगह-जगह नृत्य करने के साथ ही सभी प्रमुख देव स्थानों पर जाकर नृत्य कर भगवान से आशीर्वाद लिया। दीपावली के पर्व पर समूचे बुंदेलखण्ड में मौनियां नृत्य का विशेष महत्व है। केवल कुण्डेश्वर में ही नहीं बल्कि अन्य मंदिरों में भी अन्नकूट पूजा का आयोजन होता है। मौनी अमावस्या पर ग्रामीण अलग-अलग टोलियां बनाकर पीले कपड़ों में घुंघरू बांधकर एवं मोर पंख लेकर हाथों में डंडों को आपस में टकराते हुए नृत्य करते हैं। इस नृत्य में मोनिया पूरे दिन भर मौन व्रत धारण कर अपने साथियों के साथ गांव-गांव घूमने को निकलते हैं और जगह-जगह मोनिया टीमें नृत्य कर बुन्देलखण्डी छटा बिखेरती रहती हैं। रविवार को दीपावली के बाद सोमवार सुबह कुंडेश्वर मंदिर पर सुबह से ही मोनियों की टोलियां पहुंचना शुरू हो गई थी। अपने तय कार्यक्रम के अनुसार मोनिया दल मंदिर में पहुंचे और नृत्य के साथ भगवान भोलेनाथ एवं भगवान कृष्ण की आराधना की। इस नृत्य के लिए मोनिया दलों ने कई दिनों से तैयारियां कर रखी थीं।
कुण्डेश्वर पहुंची टोलियां
सोमवार को गोवर्धन पूजा के पर्व पर क्षेत्र भर की सैकड़ों मौनियों की टोलिया प्रसिद्ध शिवधाम कुण्डेश्वर पहुंची। यहां पर मंदिर के आंगन के साथ ही नीचे मैदान में इन टोलियों ने आकर्षक नृत्य प्रस्तुत कर भगवान से क्षेत्र भर की सुख समृद्धि की कामना की। इसके साथ ही अन्य देव स्थानों पर भी मौनियों की टोलियां पहुंची। नगर में भी इन टोलियों ने नृत्य प्रस्तुत किया। पिछले मोनिया नृत्य कर रहे धनवाहा गांव के लखन कुशवाहा बताते हैं कि यह दिन उमंग और उल्लास का होता है। ढोल एवं नगडियों की थाप पर जमकर नृत्य करते हैं।
12 गांवों की करते हैं परिक्रमा
मोनिया नृत्य के लिए यह दल अपने शरीर पर मोर पंखों को बांधकर विशेष आकर्षक पोशाक पहनते हैं। उनके पैरों में घुंघरू और विशेष ढोल नगाड़ों का संगीत आकर्षण का केन्द्र होते हैं। मोनी अमावस्या के दिन मोनियों की टोलियां 12 गांव का भ्रमण करती है और इसके बाद वह अपना मौन व्रत तोड़ते है। मंदिर-मंदिर जाकर भगवान श्री कृष्ण के दर्शन करते हैं। मान्यता के अनुरूप श्रीकृष्ण के भक्त गांव-गांव जाकर मौन व्रत धारण कर दीपावली के दिन नृत्य कर 12 गांवों की परिक्रमा लगाते हैं और फिर अपना व्रत तोड़ते हैं।
Published on:
29 Oct 2019 10:14 am
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