
Die-hard incidents
टीकमगढ़.अपनी उम्र को कम रखने और हमेशा जवान दिखने की चाह में एक समय बाद लगभग हर दूसरा व्यक्ति डाईका उपयोग कर रहा है। लेकिन अब यह डाई जान देने के साथ ही गंभीर बीमारियों का कारण बनती जा रही है। घर या परिवार में जरा सी अनबन और परेशानी आने पर डाई पीकर जान देने की घटनाएं सामने आ रही है। जिसके चलते अब घरो ंमें डाईरखना भी हानिकारक होने लगा है। आलम यह है कि जहां पिछले वर्ष डाईपीने से 10 लोगों की जान गई है। लेकिन गुस्से और परेशानी में उठाए गया कदम जानलेवा हो जाता है,यह कम ही लोगों को मालूम होगा। डाई पीने के बाद समय रहते ईलाज नहीं मिला तो जान जा सकती है। लेकिन ईलाज मिलने से जान बचने के बाद भविष्य में गंभीर बीमारी का कारण डाई बन सकती है।
बाजार में मिल रही कई तरह की डाई
बालों को काला करने के लिए डाई का प्रचलन बढा था। एक उम्र के बाद बाल सफेद होने से सामाजिक रूप से युवा दिखने की चाहत में बालों को काला करने के नाम पर सबसे पहले पत्थर की डाई के नाम से उत्पाद सामने आयाथा। बाजार में डाई की बिक्री की बढ़त के साथ ही कई कम्पनियों ने हेयर डाई निकाली थी। समय के साथ फैंशन के नाम पर काले बालों के साथ ही भूरे,लाल,गुलाबी रंगों के साथ ही कई तरह के कैमिकल और रंगों को मिला कर बनाई जाने वाली हेयर डाई बाजार में मिलती है। सैलून संचालक अंशुल सेन,अवधेश नापित ने बताया कि जिले में रोजाना करीब 3 हजार से 35 सौ पाउच हेयर डाई की बिक्री होती है।
यह होता है नुकसान
डाईके सेवन से 5 से 6 घंटे और ईलाज के अभाव में जान चली जाती है। जिला अस्पताल में पदस्थ डॉ. पी एल विश्वकर्मा ने बताया कि हेयर डाई में अमूमन डोमीनो बैंजेन एन 14,डायमेनो बेंजीन और हाईड्रोजन पेरौक्साइड होती है। डॉ. विश्वकर्मा का कहना था कि इसका सेवन कर लेने से गला और आंतें सिकुडने लगती है। इसमें मौजूद खतरनाक रसायन तेजी से प्रभाव डालते है। डाई पीने से औसतन 8 से 10 घंटें में व्यक्ति की मौत हो जाती है। उनका कहना था कि डाईके लगातार उपयोग करने से त्वचा कैंसर के साथ ही एलर्जीसहित अन्य बीमारी होने की संभावना रहती है। डॉ.विश्वकर्मा कहते है कि डाई अन्य जहरीले पदार्थो की तरह ही कुछ ही घंटों में व्यक्ति की जान ले लेती है। खास बात है कि यह आसानी से लोगों को किसी भी दुकान पर उपलब्ध हो जाने से नुकसान दायक है।
जनवरी में 11 लोगो ने पी डाई
जिले में आए दिन कहीं न कही डाई पीकर जान देने के प्रयास के मामले सामने आते है। आंकडों पर गौर करें तो जिला अस्पताल में जनवरी माह में 11 मामले डाई पीकर आत्महत्या के प्रयास के आए है। हालांकि समय रहते ईलाज मिलने से सभी की जान बचा ली गई। जबकि पिछले वर्ष करीब 10 लोगों की जान डाई पीने से गईहै।
Published on:
08 Feb 2018 04:55 pm
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