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नव साक्षरता परीक्षा में फर्जीवाडा, नव साक्षरों को शिक्षित बनाने कक्षा ७ वीं और ८ वीं के छात्रों से करवाए पेपर

जिले में रविवार की सुबह ८ बजे से शाम ६ बजे तक नव साक्षरता की परीक्षा आयोजित की गई। प्रत्येक गांव में २० परीक्षार्थिंयों को शामिल करने का लक्ष्य दिया है, लेकिन परीक्षा में प्रभारियों द्वारा फर्जीवाडा किया गया है।

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Elderly women did not know, school was called in the name of program

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टीकमगढ़. जिले में रविवार की सुबह ८ बजे से शाम ६ बजे तक नव साक्षरता की परीक्षा आयोजित की गई। प्रत्येक गांव में २० परीक्षार्थिंयों को शामिल करने का लक्ष्य दिया है, लेकिन परीक्षा में प्रभारियों द्वारा फर्जीवाडा किया गया है। इस फर्जीवाडा को सीएसी, बीएसी, बीआरसीसी और ब्लॉक प्रौढ़ अधिकारी के साथ जिला प्रौढ़ अधिकारी द्वारा नहीं रोका गया। वहां नव साक्षरताओं की जगह कक्षा ७ वीं और ८ वीं के छात्रों से परीक्षा पत्र भरवाए गए है। यह स्थिति एक नहीं दर्जनों परीक्षा केंद्रों पर देखने को मिली।
जिले में २८ हजार नव साक्षर है। उन्हें पढ़ाने के लिए ९३७ अक्षरता साथी नियुक्त किए गए। उनकी परीक्षा के लिए ९३७ केंद्र बनाए गए है। केंद्रों के निरीक्षण के लिए जिला स्तर के २५ सदस्यों को तैनात किया गया। इसके साथ ही ब्लॉक प्रौढ़ अधिकारी और सीएसी, बीएसी, बीआरसीसी को जिम्मेदारी दी गई। परीक्षा सुबह ८ बजे से शाम ६ बजे तक आयोजित की गई, उसके बाद भी सैकड़ों स्कूल दोपहर में ही बंद हो गए।
नव साक्षरों की उपस्थिति में खानापूर्ति
परीक्षा प्रभारियों ने सुबह से नव साक्षरों की उपस्थिति अधिक दर्शाने की खानापूर्ति की है। कक्ष में बैठाकर फोटो निकाली गई, वहीं फोटो वरिष्ठ अधिकारियों और ऑफिसियर ग्रुप में भेजी गई है। उसके बाद उसी कक्ष में उन्हीं नव साक्षरों के उत्तर पुस्तिकाएं कक्षा ७वीं, ८ वीं और अन्य छात्रों से लिखवाई गई है। जिसकी फोटो कैमरों में कैद है।

केस

-०१
रविवार की सुबह ११ बजे वार्ड २६ के शासकीय प्राथमिक शाला अनगढ़ा में पत्रिका टीम पहुंची। स्कूल में बच्चे रंगोली बना रहे थे। नव साक्षरता की परीक्षा देने के लिए दुर्गाबाई कोरी बैठी थी। नव साक्षर दुर्गाबाई ने बताया कि मेरा निवास जानकी बाग मंदिर के पास है। यहां पर मेरी जमीन लगी है स्कूल के बुलावे पर आई हूं। हम अपना नाम नहीं लिख पाते है। कुछ ही देर में रतिबाई आदिवासी आई। उन्होंने बताया कि स्कूल के बुलावे पर आई हूं। न जाने कौन सा काम है। हम अंगूठा लगाते है। नवसाक्षर कमला ने बताया हम तो स्कूल में आते है। वहीं स्कूल की हेडमास्टर संध्या खरे ने बताया कि सभी लोग स्कूल आते है। बच्चे रंगोली बनाने आए है।

केस-२
प्राथमिक शाला बडमाडई में सुबह ११:४० बजे पत्रिका की टीम पहुंची। वहां के कक्ष में एक नव साक्षर सुशीला बाई यादव और चिरोजिया यादव बैठी थी। उनका कहना था कि हम लिख नहीं पाते और ना ही स्कूल आते है। उसी कक्ष में दो दर्जन से अधिक कक्षा ८ वीं के छात्र-छात्राएं लाइन से बैठी हुई थी। वह नव साक्षरों के पेपर कर रहे थे। कैमरा को देख शिक्षक छात्रों से उत्तर पुस्तिका छीन रहे थे और कक्ष से बाहर भगा रहे थे। वहां से भाग कर बाहर बैठे अन्य शिक्षकों के पास बैठकर नव साक्षरों के पेपर भर रहे थे। प्रभारी का कहना था कि महिलाएं पेपर देने आई है। वहीं कक्षा ८ वीं की छात्रा सोनम यादव ने बताया कि मास्टर के कहने पर आई हूं। हमारे बोर्ड के पेपर १४ मार्च को समाप्त हो गए है। यही हाल मोहनपुरा स्कूल का था। जहां शिक्षक छात्रों से नव साक्षरों के पेपर करवा रहेे थे।

केस-३
लखौरा के एक शाला एक परिसर में सुबह ११: ५७ बजे पत्रिका की टीम पहुंची थी। मुख्य द्वार के सामने वाले कक्ष में परीक्षा प्रभारी अरवेंद्र जैन और एक अन्य कक्षा आठवीं के अजय यादव से नव साक्षरों के पेपर करवा रहे थे। परीक्षा प्रभारी के प्रभारी द्वारा गांव के छात्रों को पेपर करवाने के लिए बुलाया जा रहा था। पत्रिका की टीम ने फोटो निकाली तो प्रभारी द्वारा कक्ष के अंदर से छात्रों को बाहर जाने की बात कही। प्रभारी का कहना था कि गांव में महिलाएं नहीं है। पेपर तो करवाना ही है।
इनका कहना
सुबह ८ बजे से नव साक्षरों की परीक्षा आयोजित की गई। परीक्षा ९३७ सेंटर पर की गई है। उसके निरीक्षण के लिए जिला स्तर के २५ कर्मचारी तैनात है। जहां पर लापरवाही हुई है, जांच कर कार्रवाई की जाएगी।
राजेंद्र पस्तोर, जिला प्रौढ़ अधिकारी टीकमगढ़।