
Food officials are not taking action on sweets shops
टीकमगढ.दीपों के पर्व दीपावली में शहर की मिठाई की दुकानों में 'मुनाफेÓ की मिलावट पर कोई अंकुश नहीं रहा। ऐेसे में दुकानदारों ने मोटा मुनाफा कमाने के चक्कर में 'मिलावटÓ की चाशनी में जमकर मिठाई बेची। सूजी व मैदे से मिली मिठाई बेचकर ग्राहकों से दोगुने दाम वसूले गए। मावे व दूध से बनी अन्य मिठाइयों में सर्वाधिक मिलावट की आशंका रहती है। मिलावटी खाद्य सामग्री पर अंकुश के लिए जिम्मेदार खाद्य विभाग बहुत अधिक सक्रिय नजर नहीं आया। हालांकि खाद्य सामग्री में मिलावट को रोकने के लिए खाद्य विभाग ने करीब एक माह तक अभियान चलाया। जिसमें ४ दर्जन से अधिक सैम्पल लिए गए लेकिन कार्रवाई किसी भी सैंपल में होते नहीं दिखी। हालांकि विभाग द्वारा कार्रवाई किए जाने की बात की जा रही है। लेकिन जमीनी स्तर पर कार्रवाई का कोई असर नहीं पड़ रहा है।
त्योहारों को लेकर बाजार में मिठाई विक्रय अधिक मात्रा में होती है। जिसके चलते दुकानदार मिठाईयों में जमकर मिलावट करते हैं। ज्यादा मुनाफ ा कमाने के चक्कर में कई दुकानदार लोगों की सेहत से खिलवाड़ करने से भी परहेज नहीं कर रहे। मावे की बनी रंगीन सिल्वर लगी मिठाईयों से लेकर अन्य मिठाइयों में मिलावट की सर्वाधिक आशंका रहती है। विगत माह नगर में खाद्य अधिकारी द्वारा बाजार में मिठाईयों की दुकानों से सैंपल लिए गए थे और जांच के लिए प्रयोगशाला भेजे गए। इसके बाद भी मिठाईयों दुकान संचालकों पर कोई असर नहीं पड़ा।
८ सौ दुकानों में २३ लाख के कारोबार की संभावना
जिले में त्योहार को लेकर मिला जुलाकर ८ सौ से अधिक दुकानों द्वारा मिठाईयां बेची गई। पिछले वर्ष दीपावली त्योहार पर मिठाई दुकानदारों द्वारा २० लाख रुपए से अधिक का कारोबार हुआ था। इस वर्ष २३ लाख से अधिक का कारोबार होने की संभावना है। जिसमें १०० रुपए किलो से लेकर ९०० रुपए किलो तक मिठाई बेची जा रही है। जिसका न तो खाद्य अधिकारी द्वारा सैंपल लिया जा रहा है और न ही उनके द्वारा कार्रवाई की जा रही है। वहीं पत्रिका ने बात करनी चाही तो मोबाइल बंद कर लिया है।
डिब्बे के साथ तौल रहे मिठाई
शहर के ज्यादातर मिठाई की दुकानों में दुकानदार डब्बा सहित मिठाई तौल कर बेच रहे हैं। ज्यादातर ग्राहक बिना कुछ कहे डब्बा सहित मिठाई खरीद रहे हैं। वहीं यदि किसी ग्राहक के टोकने पर दुकानदार काफी नानुकर करने लगते हैं।
ऐसे जांचें मावा की मिठाई
नाम न बताने की शर्त पर बताया कि मावे से बनाई जाने वाली मिठाई में अरारोट, आलू, दूध पाउडर, मावे का फैट निकालकर तेल मिलाया जाता है। मिठाई की थोड़ी मात्रा में पानी मिलाकर उबालें। इसमें आयोडीन की बूदें डालें। अगर मिठाई का रंग नीला हो जाए तो समझ लेना चाहिए कि मिठाई में मिलावट है।
मावा को जांचें
मावा में स्टॉर्च की उपस्थिति को जांचने के लिए इसकी थोड़ी मात्रा में पानी मिलाकर मिश्रण को उबालें, आयोडीन कुछ बूदें डाले। यदि नीले रंग की परत दिखाई दे तो समझ लेना चाहिए की इसमें स्टार्च मिला हुआ है।
काजू कतली और चांदी की वर्क
काजू कतली बनाने में मिलावटखोर मूगंफ ली को बराबर मात्रा में मिला देते हैं। इसके ऊपर सिल्वर की जगह एल्युमिनियम की परत को चढ़ा देते हंै। इसकी मिलावट की पहचान आसानी से की जा सकती है। चांदी की परत को जलाने पर वह उतने ही भार की छोटी सी गेंद में बदल जाता है। जबकि मिलावट वाला वर्क को जलाने के बाद गहरे रंग का अवशेेष बच जाता है। इसके अलावा एल्युमिनियम की परत को हाथ पर घिसने पर वह मटमैली दिखाई देती है।
सोनपापड़ी में भी हो रही मिलावट
हलबाई मोहन यादव, घनश्याम नामदेव और कल्लू विश्वकर्मा ने बताया कि बेसन और मटर बेसन देखने में एक जैसा दिखाई देता है। लेकिन स्वाद में अंतर होता है। मटर बेसन से बनी सोनपापडी थोड़ी कड़वी होती है। इसके अलावा इसमें मिलावट वाला पिस्ता के दो तीन दाने पानी में डालकर हिला दें। अगर यह मिलावट मंूगफ ली की कतरन है तो चढ़ा कलर निकल जाएगा। इसके अलावा सोनपापड़ी आसानी से टूट जाएगी। अगर ऐसा नहीं होता हो तो उसमें मिलावट की गई है।
मिलावटी मिठाई खाने से लीवर पर होता है असर
आमतौर पर वस्तुओ में कलरिंग एसेंस मिलाए जाते है। इसके उपयोग से पेटदर्द, पेट फू लना, दस्त, एलर्जी जैसी दिक्कतें बढ़ जाती है। जिला अस्पताल में पदस्थ शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. पीएल विश्वकर्मा ने बताया कि मिलावट और प्रदूषित वस्तु छोटी आंत पचा नहीं पाती और परेशानी बढ़ जाती है। इस कारण से एनीमिया और कैंसर जैसी बीमारी की आशंका रहती है।
ऐसे तैयार हो रही नकली मिठाई
मिलावट मिठाई के इस कारोबार के लिए बनने वाली मिठाई से सूजी को वनस्पति या पाम तेल में सेंककर उसमें शक्कर, स्किम्ड मिल्क पाउडर, अरारोट मिलाकर तैयार किया जाता है। इसमे अलग-अलग तरह के एसेंस मिलाकर मिठाई मनमाफिक रूप से प्रदान किया जा रहा है। नगर के कटरा, नजाई दरवाजा, लुकमान चोराहा, अस्पताल के साथ नया बस स्टैण्ड पर मिलावट का धंधा जोरों से चल रहा है।
इनका कहना
खाद्य निरीक्षक द्वारा लगातार खाद्य सामग्री की कार्रवाई की जा रही है। ३० के करीब सैम्पल ले लिए हैं। उसकी जांच के लिए प्रयोगशाला में भेज दिए हैं। अगर मिलावट का कार्य हो रहा है तो दुकानों पर बनाई जाने वाली मिठाईयों के सैम्पल लेकर जांच की जाएगी।
डॉ. ओपी अनुरागी, सीएचएमओ, टीकमगढ़
Published on:
27 Oct 2019 08:00 am
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