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गणेशपुरा में विराजे हैं 22 भुजाओं के गजानन, करते हैं कामना पूर्ति

गणेशपुरा का यह मंदिर समूचे बुंदेलखण्ड में प्रसिद्ध हैं। गणोत्सव के दौरान यहां पर भक्तों का तांता लगा रहता है।

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Gajanan of 22 arms are sitting in Ganeshpura, wish fulfillment

Gajanan of 22 arms are sitting in Ganeshpura, wish fulfillment

टीकमगढ़. जिले से लगे उत्तर प्रदेश के ललितपुर जिले की तहसील बानपुर का ग्राम गणेशपुरा, गणपति के लिए प्रसिद्ध हैं। यहां पर गजानन की 22 भुजाओं की आदम कद प्रतिमा विराजमान हैं। गणेशपुरा का यह मंदिर समूचे बुंदेलखण्ड में प्रसिद्ध हैं। गणोत्सव के दौरान यहां पर भक्तों का तांता लगा रहता है।


जिले से महज 10 किलोमीटर की दूरी पर स्थित गणेशपुरा का गणेश मंदिर जहां लोगों की आस्था का प्रमुख केन्द्र हैं, वहीं यहां पर विराजमान 22 भुजाओं के गणपत्ति की प्रतिमा अपने आप में अद्भुत हैं। इस मंदिर में श्रद्धा रखने वाले लोगों के साथ ही अन्य जानकारों की माने तो गणपति की 22 भुजाओं की यह प्रतिमा एक प्रकार से अद्वितीय हैं। गणेशपुरा के अतिरिक्त 22 भुजाओं के गणेश जी की प्रतिमा अन्य कहीं मिलना दुलर्भ हैं।

चंदेल कालीन हैं प्रतिमा: इस मंदिर की चार पीडिय़ों से पूजा करते आ रहे पंडित गोविंददास शर्मा बताते हैं कि यह प्रतिमा पुरातत्व विभाग के अधीन हैं। पुरातत्व विभाग इस प्रतिमा को चंदेलकालीन बताया हैं। उनका कहना हैं कि पूर्व में यहां पर जंगल था। यह प्रतिमा इसी स्थान पर लेटी हुई मिली थी। कई वर्षों पूर्व प्रतिमा मिलने के बाद ग्रामीणों ने इसे खड़ा कर यहां पर मंदिर का निर्माण कराया था।


बताते हैं पौराणिक काल की हैं प्रतिमा: वहीं इस मंदिर के संबंध में यह भी कहा जाता हैं कि यह मंदिर पौराणिक काल का हैं। यहां पर बानपुर के महाराज बाणासुर की पुत्री पूजा करने आती थी। विदित हो कि जिले में स्थित स्वयं भू भगवान शंकर कुण्डेश्वर (यहां पर शिवलिंग स्वयं प्रकट हुआ था) के लिए भी कहा जाता हैं कि यहां पर बाणासुर की पुत्री उषा पूजा करने आती थी। ऐसे में इन दोनों स्थानों का विशेष महात्व माना जाता हैं।


जर्जर हैं मंदिर: पंडित गोविंददास शर्मा बताते हैं कि लगभग 12 वर्ष पूर्व पुरातत्व विभाग ने इस प्रतिमा को अपने संरक्षण में लिया हैं। लेकिन यहां के मंदिर की हालत जर्जर बनी हुई हैं। यह प्रतिमा एक कमरे नुमा मंदिर में रखी हुई हैं। मंदिर के ऊपर लेंटर की जगह छत्तियां रखी गई हैं। बारिश के समय में यह मंदिर जगह-जगह से चूने लगता हैं। प्रतिमा की 22 भुजाओं के साथ ही इसमें तीन नादिया हैं। बताते हैं कि यह नादिया खंडित हैं और इनके मुंह टूटे हुए हैं। इन्हें मुगलकाल में तोड़ा गया होगा।


सिद्ध हैं गणपति की प्रतिमा: इस मंदिर के बारे में लोगों की माने तो हर चुनाव के समय में यहां पर नेताओं का तांता लगा रहता हैं। यूपी से लेकर एमपी तक नेता यहां पर मनौति मांगने के लिए जाते हैं। लेकिन इस मंदिर पर किसी का ध्यान नहीं हैं। यहां के कुछ भक्त हैं जो चाहते हैं कि मंदिर का नवनिर्माण हो, लेकिन पुरातत्व विभाग के अधीन होने से लोग जनसहयोग से भी निर्माण नहीं करा पा रहे हैं।