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सावधान, जीबीएस वायरस कर रहा अटैक, ऐसे करें बचाव

इन दिनों जिले में जीबीएस (गुलियन बैरे सिंड्रोम) वायरस का प्रकोप बड़ता दिखाई दे रहा है। यह वायरस अब तक 3 लोगों को अपनी चपेट में ले चुका है

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GBS virus outbreak

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टीकमगढ़. इन दिनों जिले में जीबीएस (गुलियन बैरे सिंड्रोम) वायरस का प्रकोप बड़ता दिखाई दे रहा है। यह वायरस अब तक 3 लोगों को अपनी चपेट में ले चुका है। इस बीमारी से अनजान लोग इसे लाइलाज बीमारी मान कर परेशान बने हुए है। हालांकि तीनों पीडि़त लोगों में से दो की हालत एक दम ठीक हो चुकी है, जबकि एक मरीज स्वास्थ्य लाभ ले रहे है। इस बीमारी से बचने के लिए डॉक्टरों ने लोगों को अपना परिवेश स्वच्छ रखने के साथ ही प्राकृतिक संसाधनों का अधिक से अधिक उपयोग करने की बात कहीं है।


पिछले 6 माह में नगर में जीबीएस वायरस के तीन मरीज सामने आ चुके है। वर्तमान में गोल क्वार्टर के सामने रहने वाले आनंद कुमार अग्रवाल 42 वर्ष इस बीमारी से ग्रसित है और स्वास्थ्य लाभ ले रहे है। बीमारी पकड़ में आने के बाद डॉक्टरों ने आगामी 2-3 माह में इनके पूर्ण स्वास्थ्य होने की बात कहीं है। इस बीमारी से जूझ रहे आनंद कुमार अग्रवाल का कहना है कि यह वायरस बहुत तेजी से अटैक करता है और पूरे शरीर काम करना बंद कर देता है। अब इलाज के बाद उनके शरीर मेें सुधार आ रहा है और हाथ-पैर से फिर से काम करना शुरू कर दिया है।


यह है जीबीएस वायरस के लक्षण: इस बीमारी से जूझ कर पूरी तरह स्वास्थ्य हो चुके अधिवक्ता ओपी दीक्षित एवं बीमारी का सामना कर रहे आनंद कुमार अग्रवाल का कहना है कि जीबीएस वायरस का अटैक होने पर हाथेली और पैर के पंजों में झुनझुनी सी महसूस होती है। धीरे-धीरे यह झुनझुनी बड़ती जाती है। इसके बाद पैर और हाथ काम करना बंद कर देते है। बीमारी के जल्द ही पकड़ में न आने पर यह शरीर की मांस-पेशियों को भी ढीला कर देता है और मरीज एक प्रकार से लाचार सा हो जाता है।


तेजी से करता है अटैक: आनंद कुमार अग्रवाल ने बताया कि लगभग एक माह पूर्व उनके हाथ-पैर में झुनझुनी आने पर उन्होंने सोचा की ब्लड पे्रशर की समस्या होगी। इससे पर उन्होंने स्थानीय डॉक्टरों को दिखाया तो उन्होंने सामान्य दवा दे दी। लेकिन जब आराम नही लगा तो झांसी, ग्वालियर गए। लेकिन यहां भी आराम नही मिला और पैरों ने काम करना बंद कर दिया। यह सब चार दिन के अंदर हुआ। आनंद कुमार ने बताया कि इसके बाद उनके एक मित्र ने उन्हें भोपाल जाने की सलाह दी।

अब वह भी भोपाल का उपचार करा रहे और स्वास्थ्य हो रहे है। डॉक्टरों ने दवाओं के साथ ही उन्हें व्यायाम करने एवं फलों का सेवन कर रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने की सलाह दी है।


बताई लाईलाज बीमारी: आनंद कुमार के मित्र बब्लू वैद्य ने बताया कि प्रारंभ में तो लोगों ने इसे लाईलाज बीमारी बताया। इससे वह लोग परेशान हो गए थे। वायरस के तेजी से अटैक करने और शरीर का काम करना बंद करने से सभी का परेशान होना स्वाभाविक था। इसके बाद सभी ने इसके बाद में अपने स्तर पर पता किया और सही उपचार मिलने पर स्वास्थ्य में सुधार आ रहा है। बब्लू वैद्य का कहना था कि इस वायरस का नाम ही उन्होंने पहली बार सुना है।


कहते है चिकित्सक:
यह वायरस परिवेश की गंदगी के कारण होता है और इसके वायरस मच्छर हो सकते है। इससे लोग अपने परिवेश को स्वच्छ रखे। गर्मियों में यह खास ध्यान रखने की आवश्यकता है। दवाओं के साथ ही लोगों को प्राकृतिक संसाधनों जैसे प्राणायाम, ताजी सब्जियों, फलों आदि का अधिक सेवन करना चाहिए। ताकि आंतरिक शक्ति एवं रोग प्रतिरोधक क्षमता में बढ़ोत्तरी हो सकें। समय से सही उपचार होने पर इस वायरस को खत्म किया जा सकता है।- डॉ सुनील भदौरा, चिकित्सक जिला चिकित्सालय।


इस वायरस से बचाव की आवश्यकता है। अटैक होने पर घबराए नही। सही उपचार से इस रोग को पूरी तरह से ठीक किया जा सकता है। बीमारी का अटैक होने पर लोगों को अपना मनोबल बनाए रखना चाहिए। वायरस के अटैक के बाद योग-प्राणायाम से इसे पूरी तरह से रिकवर किया जा सकता है।- डॉ अभिषेक बुंदेला, फिजियोथेरपिस्ट, उड़ान केन्द्र, टीकमगढ़।