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चरपुवां में 100 एकड़ में विकसित किया जाएगा गोवंश वन्य विहार

सड़कों पर घूम रहे गोवंश को हटाने प्रशासन ने बनाई योजना, जमीन हस्तांतरण की चल रह प्रक्रिया

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Govansh Vanya Vihar will be developed in 100 acres

Govansh Vanya Vihar will be developed in 100 acres

टीकमगढ़. शहर एवं शहर से लगी सड़कों पर घूम रहे गोवंश की समस्या के स्थाई समाधान के लिए प्रशासन 100 एकड़ में गोवंश वन्य बिहार बनाने जा रहा है। इसके लिए प्रशासन ने ग्राम चरपुंवा में 100 एकड़ जमीन की व्यवस्था कर रहा है। इस वन्य विहार में 1000 गोवंश को रखने की व्यवस्था की जाएगी।


सड़कों पर गोवंश न रहे इसके लिए शासन द्वारा गांव में गोशालाओं का निर्माण कराया जा रहा है। इसके बाद भी शहर की सड़कों के साथ ही शहर से लगे हाईवे पर गायों की संख्या कम होती नहीं दिख रही है। इस समस्या के समाधान के लिए प्रशासन के तमाम प्रयास निरर्थक साबित होते दिख रहे है। ऐसे में अब प्रशासन ने शहर की तमाम गायों को सुरक्षित आश्रय स्थल मुहैया कराने के लिए गोवंश वन्य विहार की योजना तैयार की है। कलेक्टर सुभाष कुमार द्विवेदी द्वारा इसके लिए ग्राम चरपुवां की 80 एकड़ जमीन को आवंटित करने के साथ ही 20 एकड़ जमीन और दी जा रही है। इस जमीन पर गायों के लिए शेड, भूसा घर एवं विचरण करने के लिए खुला क्षेत्र बनाया जाएगा। कलेक्टर के निर्देशन पर पशु पालन विभाग ने इसकी पूरी योजना तैयार कर ली है। पशु पालन विभाग का कहना है कि गोवंश वन्य विहार बनने के बाद शहर में एक भी गाय सड़कों पर नहीं दिखेगी। साथ ही इसके बनने के बाद से यहां पर बड़े पैमान में गोउत्पाद भी बनाए जाएंगे।

मनरेगा से होगा विकास
पशु चिकित्सा विभाग के उपसंचालक डॉ डीके बताया कि इसके पूर्व रीवा एवं जबलपुर में गोवंश वन्य बिहार का काम हो चुका है। ऐसे ही जिले में भी यह पूरा काम मनरेगा के तहत किया जाएगा। मनरेगा से गोशालाओं के तहत ही यहां पर 1000 गोवंश के हिसाब से टीनशेड, भूसाघर, चरनोई के लिए जमीन, पेयजल की व्यवस्था करने के साथ ही गोबर से खाद बनाने के लिए नाडेप आदि तैयार किए जाएंगे। उन्होंने बताया कि एक साथ 1 हजार गोवंश होने से यहां पर बड़ी मात्रा में जैविक खाद का निर्माण किया जाएगा। वहीं गोकाष्ठ सहित अन्य उत्पाद तैयार कर गोशाला को आर्थिक रूप से सुदृढ़ करने का प्रयास किया जाएगा।


शहर का गोवंश बड़ी समस्या
विदित हो कि शहर एवं आसपास के क्षेत्रों का गोवंश सबसे बड़ी परेशानी बना हुआ है। बारिश के बाद से यह समस्या लगातार बनी रहती है। बारिश के बाद सर्दी का मौसम शुरू होते ही ग्रामीण क्षेत्रों में रबी की फसलों की तैयारी शुरू हो जाती है और ऐसे में किसान पूरे गांव का गोवंश खदेड़कर भगा देते है। ऐसे में यह पूरा गोवंश शहर में पहुंच जाता है। अनुमान के मुताबित वर्तमान में शहर में 500 से 700 गोवंश होगा। इस पूरे गोवंश की समुचित व्यवस्था करने के लिए अब गोवंश वन्य विहार की योजना पर काम किया जा रहा है।


कहते है अधिकारी
चरपुवां की 80 एकड़ जमीन के बाद अब 20 एकड़ जमीन की स्वीकृति पर काम किया जा रहा है। एक-दो दिन में यह स्वीकृति होने के बाद इस योजना पर काम शुरू कर दिया जाएगा। यह पूरी योजना मनरेगा के तहत तैयार कराई जाएगी। गोवंश वन्य विहार के बाद शहर के गोवंश को यहां पर शिफ्ट किया जाएगा।- डॉ डीके विश्वकर्मा, उप संचालक, पशु चिकित्सा सेवा।