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टीकमगढ़. भैरव बाबा का मंदिर जिले भर के श्रद्धालुओं की आस्था का केन्द्र है। कहा जाता है कि जब प्रतिमा का निर्माण हुआ तो स्थापना कराने के लिए यह प्रतिमा उठ नहीं रही थी। इसके बाद तत्कालीन महाराज प्रताप सिंह ने महाराष्ट्र से तांत्रिक बुलाएं थे और उनके मंत्रोच्चार से यह प्रतिमा खड़ी हुई थी। कालभैरव की यह आदमकद प्रतिमा एकासन पर है।
तालदरवाजा स्थित भैरव बाबा मंदिर जहां लोगों की आस्था का केन्द्र है, वहीं यहां की प्रतिमा भी अपने आप में अनुपम है। मंदिर के पुजारी रवि पालेकर महाराज बताते है कि काल भैरव महाराज की स्थापना लगभग 200 वर्ष पूर्व हुई थी। उनका कहना है कि पपौरा जी के मंदिर निर्माण के समय वहां की प्रतिमाओं के लिए लाए गए पत्थर से काल भैरव की प्रतिमा बनाई गई थी। प्रतिमा जब बनकर तैयार हो गई थी तो प्राण-प्रतिष्ठा के लिए इसे उठाने का प्रयास हुआ, लेकिन प्रतिमा हिली भी नहीं। इसके बाद पंडितों से समझ कर इसके लिए महाराष्ट्र से रघुनाथ राव तांत्रिक को बुलाया गया था। उन्होंने अपने मंत्रों से इस प्रतिमा को स्थापित किया गया था।
नहीं चाहते बंधन
रवि पालेकर महाराज बताते है कि जब इनकी प्रतिष्ठा हुई थी, उसी समय उन्होंन आगाह किया था कि उनके मंदिर नहीं बनाया जाए। वह किसी प्रकार का बंधन नहीं चाहते है। लगभग 80 वर्ष पूर्व शहर के एक भक्त ने प्रयास किया था, लेकिन आंधी सारा सामान उड़ा ले गई थी। तब से किसी ने प्रयास नहीं किया। रवि पालेकर महाराज बताते है कि यहां पर होने वाले तमाम आयोजनों के समय पूरे साज-सज्जा की जाती है, लेकिन भैरव बाबा के ऊपर कभी कोई टेंट आदि नहीं लगाया जाता है। विदित हो कि भैरव अष्टमी पर यहां पर होने वाले आयोजन बहुत खास होते है। इसमें जिले भर से लोग शामिल होते है।
Published on:
14 Oct 2020 11:41 am
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