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नष्ट करने की जगह, खुले में फेंक रहे एक्सपायरी दवाएं और लगा रहे आग

लखौरा रोड पर जलाई गई दवाएं

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लखौरा रोड पर जलाई गई दवाएं

लखौरा रोड पर जलाई गई दवाएं

बॉयो मेडिकल वेस्ट में नष्ट कराने की जगह छोड़ रहे अध जली दवाएं

टीकमगढ़. शहर के लखौरा रोड के गड़ा पहाड के पास मेडिकल की एक्सपायरी दवाएं जलाई जा रही है। जिसमें टेबलेट, इंजेक्शन, सिरप, पाउडर के साथ अन्य प्रकार की दवाएं शामिल है। इस मैदान को एक तरह से एक्सपायर्ड दवाएं जलाने में उपयोग किया जा रहा है। मैदान में जगह जगह जली और अधजली दवाओं के अवशेष फैले है। इस ओर ड्रग विभाग मेडिकलों की जांच नहीं कर रहा है। अगर जांच हो भी रही है तो इस प्रकार की खानापूर्ति की जा रही है।
शहर, ग्रामीण क्षेत्रों में मेडिकल के साथ अस्पताल किराने की दुकान की तरह खोले गए है। जिसमें फार्मासिस्ट कोई और दुकान का संचालन कोई और कर रहा है और मेडिकल दुकान का एरिया के साथ अन्य नियमों में कमी है। लेकिन जिम्मेदार विभाग निरीक्षण के साथ कार्रवाई करने में कतरा रहे है। बड़ी मात्रा में एक्सपायरी दवाओं को नष्ट करने की जगह खुले मैदान में जलाया जा रहा है। जिन्हें अध जला छोड कर चले गए है। उनके कागज खाने के लिए मवेशी पहुंच रहे है। जिन्हें नुकसान होने की संभावना जताई जा रही है।

विगत दिनों में जलाई गई दवाएं
लखौरा रोड के गड़ा पहाड के खुले मैदान में कुछ मेडिकल दुकानदार दवाईयां लाकर फेंक रहे है। वहां पर बदबूदार धुआं दिखाई दिया तो कई प्रकार की एक्सपायरी दवाएं डली थी। अधजली दवाओं को देखा तो कई दवओं को पैकेट, बोतल और पाउडर डिब्बे एक्सपायर्ड हो चुके थे। ऐसी दवाओं को जलाने वाले एकलौते नहीं है। कई मेडिकल दुकानदार एक्स पायरी दवाओं को बड़ी मात्रा में जलाते है। बताया गया कि एक्सपायरी दवाओं को जलाना बड़ी लापरवाही है। इन्हें नष्ट करने का नियम है। प्रत्येक मेडिकल पर एक्सपायरी दवाओं का स्थान अलज होना चाहिए। इसके रजिस्टर को रखना चाहिए। तीन महीने तक कंपनी वापस लेती है। या फिर बॉयो मेडिकल वेस्ट सिस्टम को दवा नष्ट करने के लिए दे देना चाहिए।

फैलता है वायु प्रदूषण, बना रहता है खतरा
खुले में दवा को जलाने से वायु प्रदूषण, बीमारियों का खतरा बड़ता है। दवा किसी जगह फेंकने से वहां का वातावरण के साथ जमीन व पानी भी प्रभावित होता है। दवा व प्लास्टिक जलाने से वायु प्रदूषण होता है। इससे लोगों को सांस लेने के साथ अस्थमा व अन्य बीमारियों का खतरा बना रहता है। जमीन में लगातार दवा फेंकने से वहां की मिट्टी में इसका असर दिखाई देता है। वह भी दूषित होती है, ऐसे जगहों के आसपास बोरिंग व पानी की उपलब्धता में केमिकल मिल सकता है। इसके अलावा मवेशी के इस जगहों पर घास व फैली दवा खाने से मौत तक हो जाती है।

गड्ढो बनाकर किया जाना चाहिए नष्ट
एक्सपायर दवाएं बायो मेडिकल तरीके से नष्ट किया जाना चाहिए, ऐसा नहीं करने से गंभीर बीमारियां के फैलने का खतरा होता है। दवा विक्रेताओं को जमीन में गहरा गड्ढा खोदकर एक्सपायरी दवाएं मिट्टी से छुपा देनी चाहिए। यही सरकार के निर्देश है और नियम भी बनाए है।
फैक्ट फाइन
४५० के लगभग जिले में मेडिकल दुकानें
१५ जिले में हॉलसेल दुकानें
११३ निवाड़ी जिले में दुकानें
१०८ एक्यूआर वर्ग फीट जगह होना अनिवार्य

इनका कहना
मेडिकल दुकान में एक्सपायरी दवाओं का खंड अलग से बनाया जाता है। चार महीने तक ऐसी दवाओं को वापस ले लेती है। अगर वापस नहीं ले रहे है तो बॉयो मेडिकल वेस्ट के साथ जमीन में गड्ढा बनाकर नष्ट करना पड़ता है। ऐसी दवाओं को खुले में जलाना और अधजली छोड़ देना नियम के खिलाफ है, ऐसे लोगों पर कार्रवाई की जानी चाहिए।
विकास अग्रवाल, अध्यक्ष मेडिकल एसोएशएशन टीकमगढ़।

खुले मैदान में एक्सपायरी दवाओं को जलाना नियमों के विरूद्ध है। इसके लिए मेडिकल में अलग से खंड होता है। मामले की जांच की जाएगी। मेडिकल की जांच भी की जा रही है।
दीपक नामदेव, ड्रग इंस्पेक्टर टीकमगढ़।