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हरियाली के नाम पर लाखों खर्च, ज़मीन पर सूखे पौधे

मानिकपुरा और ढोंगा मैदान में टूटे संकल्प, जवाबदेही शून्य

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मानिकपुरा और ढोंगा मैदान में टूटे संकल्प, जवाबदेही शून्य

मानिकपुरा और ढोंगा मैदान में टूटे संकल्प, जवाबदेही शून्य

टीकमगढ़ जिले में पर्यावरण संरक्षण और हरियाली बढ़ाने के नाम पर प्रशासनिक अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों द्वारा लगाए गए हजारों पौधे आज जवाबदेही के अभाव में दम तोड़ चुके है। रोपण के समय सुरक्षा की कसमें, वृक्षाबंधन और फ ोटो सेशन तक सीमित रहे, लेकिन देखरेख की जिम्मेदारी निभाने वाला कोई नहीं दिखा। इसका नतीजा यह रहा कि पौधों की खरीदी और सिंचाई में खर्च हुए लाखों रुपए व्यर्थ हो गए।

ढोंगा मैदान और मानिकपुरा स्थित कृषि विद्यालय की भूमि के चारों ओर हजारों पौधों का रोपण किया गया था। उद्देश्य था हरियाली बढ़ाना और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देना, लेकिन समय पर सिंचाई, सुरक्षा और निगरानी न होने से अधिकांश पौधे सूख गए। लोगों का कहना था कि जब पुलिस लाइन जैसे सीमित संसाधनों में पौधे बच सकते है, तो प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की निगरानी में लगाए गए पौधे क्यों सूख गए। यह सिर्फ फ ोटो और कार्यक्रमों तक सीमित रहने से उद्देश्य बनाया गया था।

पुलिस लाइन में दिखी जिम्मेदारी, इसलिए पौधे बचे

इसके विपरीत पुलिस लाइन मैदान में लगाए गए पौधे आज भी जीवित है और छह फ ीट तक बढ़ चुके है। फ रवरी 2024 में न्यायालय में पदस्थ सुशील प्रजापति, यातायात प्रभारी कैलाश पटेल सहित अन्य पुलिस अधिकारियों ने करीब 15 हजार पौधों का रोपण किया था। हालांकि इनमें से लगभग 4 हजार पौधे नष्ट हुए, लेकिन 11 हजार पौधे आज भी जीवित है। इनकी नियमित देखरेख, सप्ताह में दो दिन निगरानी, बीमार पौधों का उपचार और गंदे नाले के पानी से सिंचाई कर इन्हें सुरक्षित रखा गया। यही कारण है कि आज पुलिस लाइन हरियाली की मिसाल बन रही है।

केंद्रीय मंत्री ने भी ली थी जिम्मेदारी, फि र भी सूखे पौधे

25 अगस्त 2024 को मानिकपुरा स्थित तिल अनुसंधान केंद्र में वृक्षबंधन कार्यक्रम आयोजित हुआ था। इसमें केंद्रीय मंत्री डॉ वीरेंद्र खटीक, तत्कालीन कलेक्टर, भाजपा जिलाध्यक्ष सहित कई अधिकारी व जनप्रतिनिधि शामिल हुए। सभी ने 1100 नीम के पौधे लगाकर उनकी सुरक्षा का संकल्प लिया। लेकिन हकीकत यह है कि करीब 700 के करीब पौधे सूख गए। कार्यक्रम के बाद तत्कालीन जिलाध्यक्ष अमित नुना को छोडक़र शायद ही कोई अधिकारी या जनप्रतिनिधि दोबारा पौधों को देखने पहुंचा।

ढोंगा मैदान में अमलतास और ताड़ के पौधे भी बर्बाद

29 अगस्त 2025 को ढोंगा मैदान के चारों ओर पहले 500 ताड़ के पौधे लगाए गए, जिनकी सुरक्षा के लिए जाल भी लगाया गया था। आज स्थिति यह है कि पौधे सूख चुके है और जाल भी गायब होता जा रहा है। इसके बाद नगर पालिका ने ढाई लाख रुपए की लागत से 2 हजार अमलतास के पौधे खरीदे और रोपण कराया, लेकिन देखरेख न होने से आज महज 5 फ ीसदी पौधे ही जीवित बचे है।

सूखे पौधों की सुरक्षा के लिए 50 लाख की दीवार

विडंबना यह है कि जब पौधे सूख चुके, तब उनकी सुरक्षा के नाम पर 50 लाख रुपए की दीवार निर्माण की स्वीकृति दी गई। कलेक्टर के निर्देश पर दीवार का काम शुरू हुआ, लेकिन स्थानीय विरोध के चलते निर्माण कार्य रोक दिया गया।

ढोंगा मैदान में लगाए गए अमलतास के पौधे गारंटी में है। जो पौधे सूख गए है, उनके बदलकर नए लगाए जाएंगे। सुरक्षा के लिए 50 लाख रुपए का टेंडर हुआ है, विरोध के कारण काम रुका है। नगरपालिका में इसकी दरें स्वीकृत हो गई है। निर्माण कार्य जल्द ही शुरू किया जाएगा।

पवन कुमार चतुर्वेदी, ठेकेदार नगरपालिका टीकमगढ़।

मानिकपुरा में लगाए गए नीम के पौधों की गर्मियों में पंचायत ने सिंचाई कराई है। सूखे पौधों की जगह दोबारा रोपण किया गया है और अब ट्यूबवेल भी लग गया है।

प्रभू रैकवार, सरपंच गनेशगंज।

ढोंगा मैदान के चारों ओर लगाए पौधों को दोबारा लगाया जाएगा और बाउंड्राबाल के लिए टेंडर भी स्वीकृत हो गया है। जल्द ही निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा और मैदान को सुंदर बनाया जाएगा।

ओमपाल सिंह भदौरिया, सीएमओ नगरपालिका टीकमगढ़।