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डाकघर में फर्जी खाता खोलकर करोड़ों के हेर फेर को दबाने की कोशिश

जतारा जनपद की बिलगांय पंचायत में फर्जी खाता खोलने का मामला,पीडि़त ने की सीबीआई जांच की मांग

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Manipulate amount crores opening fake accounts post office

Manipulate amount crores opening fake accounts post office

टीकमगढ़.जिले के जतारा जनपद के बिलगायं गांव में डाकघर में फर्जी खाता खोलकर करोड़ों की राशि के हेरफेर के मामले को दबाने में विभाग कोई कसर नही छोड़ रहा है। आलम यह है कि बहुचर्चित मामले की दो बार जांच के बाद भी न तो मामले में एफआईआर की गई और ना ही किसी दोषी पर ठोस कार्रवाई की गई। करीब 3 वर्षो से चले आ रहे मामले की भोपाल से लेकर दिल्ली तक शिकायत होने के बाद मामले में केन्द्रीय सूचना आयुक्त की पहल पर दो जांच रिपोर्ट सामने आई है।

जिसमें डाक विभाग ने माना है कि बिलगांय गांव में मनरेगा के अंतर्गत खोले गए खातों में न केवल फर्जीवाडा हुआ बल्कि सरकार की राशि का गबन किया गया। मामले में भोपाल डाक विभाग की विजिलेंस टीम के अधिकारी रवि माने के बाद केन्द्रीय मंत्री वीरेन्द्र कुमार की शिकायत पर दूसरी जांच रिपोर्ट सहायक पोस्टमास्टर जनरल अन्बेषण/सतर्कता डी आर मंडल ने की है ।

जिसमें मुख्य आरोपी तत्कालीन सचिव और सरपंच को माना है। जबकि सह दोषी में डाक विभाग के 6 कर्मचारियों और संभागीय कार्यालय के दो कर्मचारियों को माना गया है। डाक विभाग द्वारा मामले को जांच के नाम पर उलझाने से आहत आवेदक ने सीबीआई जांच की मांग की है।


यह है मामला:-

आवेदक रामसेवक घोष के प्रतिनिधि अरविंद्र जैन ने बताया कि ग्राम पंचायत बिलगायं में तत्कालीन सचिव और अन्य की मिलीभगत से फर्जी खाते खोलकर राशि निकाली गई थी।

गांव के २३ खाताधारियों के खाते में राशि डालने और निकालने की शिकायत की जांच डाक विभाग की विजिलेंस टीम के अधिकारी रवि माने के द्वारा की गई थी। लेकिन जांच में सहयोग न मिलने पर माने के द्वारा जांच रिपोर्ट सौंप दी गई।

विजिलेंस एएसपी रवि माने ने जांच रिपोर्ट में माना था कि गांव के डाक घर में खोले गए अधिकांश खातों की पासबुक ही नहीं है, जिन लोगों के नाम से खाते खोले गए है न तो उन्हें इसकी जानकारी रही और न ही उनके नाम से निकाली गर्इ रकम और जमा की हुई राशि की उन्हें जानकारी है।

जांच में बताया गया कि गांव के भईयन का कोई खाता नहीं है। जबकि इस नाम से फर्जी खाता खोलकर लेनदेन किया गया। इसी तरह चंद्रभान,जगदीश रामसेवक, गुठाई,सुखदयाल सहित 23 अन्य लोगों के खाते फर्जी पाए गए। जबकि इनसे लेनदेन किया गया।


मंडल ने भी माना हुआ फर्जीवाडा: केन्द्रीय मंत्री की शिकायत पर मामले की जांच करते हुए सहायक पोस्टमास्टर बिजीलेंस मंडल ने माना कि मामले में बड़े पैमाने पर फर्जीवाडा हुआ है।

आरटीआई से मुकुंद सिंह परमार को मिली जानकारी के अनुसार 22-23 जनवरी 2018 को दी गई जांच रिपोर्ट में माना गया कि 19 खाता धारकों की जांच की गई। जिसमें 1 लाख 19 हजार का गबन पाया गया है।

उन्होंने अपनी जांच में घोटाले के लिए मुख्य आरोपी तत्कालीन सरपंच आशाराम और सचिव राजेश जैन को माना है। इसके साथ ही सह दोषी के रूप में डाक विभाग में पदस्थ तत्कालीन कर्मचारी स्व. सुधाकर त्रिपाठी, टीकमगढ़ में पदस्थ डाक सहायक राकेश बाबू मिश्रा, मोहनगढ़ उप डाकपाल एसआर पाराशर, टीकमगढ़ डाकपाल एके पटसारिया, कुण्डेश्वर उप डाकपाल संतोष कुमार शर्मा, मेल ओवरसियर चंद्रभान के साथ ही संभागीय कार्यालय के एसआर राजपूत और रामप्रसाद अहिरवार को दोषी माना है। खास बात यह है कि दोषी माने जाने के बाद भी नोटिस के अलावा कोई कार्रवाई नहीं की गई है।


इन तथ्यों से जांच संदेहास्पद: सहायक पोस्टमास्टर बिजीलेंस मंडल की जांच में कई बिन्दुओं से जांच सवालों के घेरे में है। केन्द्रीय मंत्री वीरेन्द्र कुमार की शिकायत पर मंडल को जांच सौंपी गई थी। जांच रिपोर्ट से पता चलता है कि विभाग के द्वारा घुरके घोषी का खाता क्रमांक 4000386, 1 अप्रैल 2012 को खोला गया, जबकि सीताराम का खाता क्रमांक 4013335 को 4 जुलाई 2008 को खोलना बताया गया। जबकि सीरियल नम्बर के अनुसार यह संभव नहीं हो सकता।


मामले की जांच 2008 से की जानी थी लेकिन 2008 से 2012 तक के लेनदेन का कोई ब्यौरा नहीं बताया गया है। 2012 से 2015 तक के आंकड़ों को ही जांच में शामिल किया गया है। इसके साथ ही कुछ खातों में 2008 से खोले जाने के बावजूद केवल 5 से 6 दिन की राशि का ही हवाला दिया गया है।


खाता खोलते समय 2008 से लेकर 2015 तक तीन सरपंच गांव में रहे, लेकिन केवल 2010 के दौरान सरपंच रहे आशाराम को दोषी मानते हुए गबन की राशि 66 हजार जमा कराई गई है। जबकि अन्य को मामले में छूट दी गई है।

कहते है अधिकारी
विभाग के द्वारा दोषी अधिकारियो पर कार्रवाई की जा रही है। मामले की अभी जांच जारी है।
हेमंत सिंह चौहान डाक अधीक्षक छतरपुर