Niwadi and Tikamgarh districts जिलों के नक्शों में भी बदलाव की संभावना जताई जा रही है।
मध्यप्रदेश में संभागों और जिलों का पुनर्गठन करने की प्रक्रिया चल रही है। इसके लिए राज्य सरकार ने परिसीमन आयोग का गठन किया है जोकि अपने काम में लगा है। आयोग के गठन के बाद से ही कई नए जिले और संभाग बनाने की मांग लगातार उठ रहीं हैं। कई जिलों की सीमाओं में परिवर्तन की बातें भी हो रहीं हैं। प्रदेश के टीकमगढ़ और निवाड़ी जिलों के नक्शों में भी बदलाव की संभावना जताई जा रही है। कहा जा रहा है कि टीकमगढ़ जिले की मोहनगढ़ तहसील और दिगौड़ा के गांवों को निवाड़ी में शामिल किया जाएगा। इसका ग्रामीणों ने विरोध जताया है। इसके लिए अधिकारियों से लिखित आश्वासन की मांग भी की गई है।
मोहनगढ़ एवं दिगौड़ा तहसील को निवाड़ी जिले में शामिल किए जाने की चर्चा है जिसका विरोध भी लगातार बढ़ता जा रहा है। संभावना जताई जा रही है कि जिले के मोहनगढ़ और दिगौड़ा तहसील के गांवों को निवाड़ी में शामिल किया जाएगा। इस संभावना के साथ ही यहां के लोगों ने इसका विरोध शुरू कर दिया है।
दिगौड़ा के बाद अब मोहनगढ़ क्षेत्र के ग्रामीण इसके विरोध में आगे आए है। इसके लिए शनिवार को ग्रामीणों ने तहसीलदार को ज्ञापन सौंपा। उन्होंने मोहनगढ़ दिगौड़ा तहसील के गांवों को निवाड़ी में शामिल न करने की मांग की है।
ग्रामीणों का कहना है कि इन गांवों के लोगों को लिए टीकमगढ़ जिले में रहना सुविधाजनक है। सभी गांवों की जिला मुख्यालय से दूरी 20 से 30 किमी तक है, वहीं निवाड़ी में शामिल होने पर लोगों को 50 से 70 किमी की दूरी तय करनी पड़ेगी। इसमें लोगों को आर्थिक परेशानी के साथ ही अतिरिक्त समय भी देना होगा। ग्रामीणों ने इसके लिए प्रशासन से लिखित आश्वासन की मांग की है।
ग्रामीणों का यह भी कहना है कि यदि प्रशासन 15 दिनों में लिखित आश्वसन नहीं देता है तो धरना प्रदर्शन के साथ ही आमरण अनशन भी करेंगे। इसके साथ ही जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों का घेराव कर आत्मदाह जैसे कदम उठाने होंगे। ज्ञापन देने वालों में जनपद उपाध्यक्ष ब्रजेश रावत और क्षेत्र के सरपंचों के साथ ही सरपंच संघ के प्रदेश महामंत्री प्रमोद मिश्रा भी मौजूद थे।