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भगवान राम के राजा बनने की कहानी सुन रोमांचित हुए सैलानी

ओरछा के अध्यात्म और इतिहास से रूबरू हुए सैलानी

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orchha ke ram ke raja ki kahani

orchha ke ram ke raja ki kahani

टीकमगढ़..पर्यटन नगरी ओरछा में सिटी वाक फेस्टिवल के दूसरे दिन पर्यटकों ने ऐतिहासिक और आध्यात्मिक ओरछा के धर्म और पुरातत्व को नजदीक से जाना । ओरछा सिटी वॉक महोत्सव के दूसरे दिन पर्यटन विभाग ओरछा की ओर से इस महोत्सव में शामिल होने आए सैलानियों को ओरछा के धार्मिक व पुरातत्विक स्थानों पर ले जाकर उनके अनूठे किस्से और पौराणिक महत्व की जानकारी दी गई।

महोत्सव में शामिल हुए पर्यटकों को सबसे पहले श्रीरामराजा मंदिर ले जाया गया । जहाँ उन्हें बताया गया कि यही वह स्थान है ,जहाँ भक्त और भगवान में राजा और प्रजा का संबंध है । भगवान श्रीरामराजा को चारों पहर सशस्त्र सलामी दी जाती है । उसके बाद चतुर्भुज मंदिर पहुँचकर भक्त को भगवान के दर्शन के लिए परिश्रम क्यों जरूरी है ।

इसे लेकर रानी कुंवर गनेश और मंदिर के निमाण की कहानी व उसका स्थापत्य दिखाया गया । गौरतलब है कि चतुर्भुज मंदिर भगवान राम के लिए बनाया गया था लेकिन वह रानी की रसोई में ही विराजमान हो गए । अयोध्या से भगवान राम को ओरछा लाने वाली रानी कुंवर गनेश ने भगवान के दर्शन के लिए अपने महल में विशेष खिड़की बनाई थी । जिससे उठते साथ उन्हें भगवान के दर्शन हो ,लेकिन रामराजा बिना परिश्रम के किसी को दर्शन नही देते ,चाहे रंक हो या राजा ।

यह कहानी सुन पर्यटक रामराजा सरकार की भक्ति रस में डूब गए । उसके बाद राजा महल व जहांगीर महल के अद्भुत स्थापत्य देख हर कोई अचंभित हुआ । वहीं जहांगीर महल का हिन्दू व मुगल स्थापत्य देख पर्यटकों ने भारत देश की गंगा-जमुनी तहजीब को जाना।

इस महल का निर्माण ओरछा के राजा वीरसिंह जू देव ने अपने दोस्त जहांगीर के एक दिन के ओरछा प्रवास पर आने पर कराया था । इस हेरिटेज साइड सीन में एमपीटी के ओरछा प्रबंधक संजय मल्होत्रा, आबकारी अधिकारी मुकेश पांडेय सहित सैलानी मौजूद रहे।