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दश लक्षण महापर्व, पूजन के साथ हुई शांति धारा

नगर के नंदीश्वर कॉलोनी में तीसरे दिन भी दशलक्षण महापर्व का आयोजन किया जा रहा है

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Peace ceremony with worship Jainism

Peace ceremony with worship Jainism

टीकमगढ़.नगर के नंदीश्वर कॉलोनी में तीसरे दिन भी दशलक्षण महापर्व का आयोजन किया जा रहा है। धार्मिक कार्यक्रम में सुबह से 6 बजे जैन समाज के लोगोंं का मंदिर पहुंचना शुरू हो जाता है। जहां पर जैन समाज के लोगों द्वारा पूजन शिविर में आयोजन किए जाते है। इसके साथ ही जैन समाज के लोगों द्वारा नंदीश्वर मंदिर में नंदीश्वर वेदी पर पारसनाथ भगवान की वेदी पर पर शांतिनाथ भगवान वेदी पर एवं भगवान आदिनाथ वेदी पर भगवान का अभिषेक एवं शांति धारा संपन्न होती है। सामूहिक रूप से श्रद्धालु चारों वेदियो पर भगवान का अभिषेक शांतिधारा एवं पूजन किया गया। प्रदीप जैन बम्होरी ने बताया कि मंदिर के सामने विशाल प्रांगण में पूजन शिविर का आयोजन किया जा रहा है। सभी श्रद्धालु एवं भक्तगण पूजन शिविर में भगवान का अभिषेक शांतिधारा एवं पूजन कर रहे हैं।
एक समय ही करते है भोजन
दशलक्षण पर्व जैन समाज का सबसे बड़ा धार्मिक त्यौहार है। जैन श्रद्धालु एक समय ही भोजन करते हैं , बहुत से जैन धर्मावलंबी अपने कार्यों को छोड़कर 10 दिन तक भगवान की भक्ति में लीन रहते हैं। शाम को प्रतिदिन 7 बजे संगीतमय आरती का आयोजन किया जाता है। आरती के बाद पंडित सुनीलकुमार शास्त्री द्वारा शास्त्र प्रवचन किया जाता है। रविवार को सभी आर्जव धर्म का अर्थ जान लेते है।आर्जव धर्म का उत्तम लक्षण है, वह मन को स्थिर करने वाला है, पाप को नष्ट करने वाला है और सुख का उत्पादक है। इसलिए इस भव में इस आर्जव धर्म को आचरण में लावो। उसी का पालन करो और उसी का श्रवण करो। क्योंकि वह भव का क्षय करने वाला है। उनका कहना है कि अपने मन में विचार किया जाए वैसा ही दूसरों से कहा जाए और वैसा ही कार्य किया जाए।

सरलता का नाम है आर्जव
कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि स्वयं आत्मा को भवसमुद्र से पार करने वाला ऐसा जो प्रचंड चैतन्य भाव है। वह पुनरू आर्जव धर्म के होने पर ही प्राप्त होता है। इस आर्जव कृसरल भाव से बैरियोंयोग आर्जव। मनकृवचनकृकाय की सरलता का नाम आर्जव है। ऋ जु सरलता का भाव आर्जव है। इस मायाचारी से अनंतों कष्टों को देने वाली तिर्यंच योनि मिलती है। सगर राजा ने सुलसा के स्वयंवर में मायाचारी से मधुिंपगल का अपमान किया था। जिसके प्रसाद से यह जीव संसार में परिभ्रमण करता है। सरल भाव से ऊध्र्वगति होती है। इसका अर्थ यह भी है कि ऋ जुगति से जीव मोक्ष गमन करता है। कुटिलता से चारों गतियों में संसार भ्रमण करता है। नंदीश्वर कमेटी की ओर से अध्यक्ष लुइस चौधरी, मंत्री विमल कुमार, उपाध्यक्ष गुलाबचंद, डीके जैन, प्रकाश द्वारा व्यवस्था की गई।