
Pushya Nakshatra Orchha Ramaraja Sarkar Crowd of devotees Very hot
टीकमगढ.ओरछा.मई के माह में सूरज जब आग उगल रहा है ओर लोग अपने बहुत आवश्यक काम से बाहर निकल रहे है, ऐसे में पुष्य नक्षत्र में इस गर्मी पर एक बार फिर से श्रद्धा भारी पड़ती दिखाई दी। रविवार को तेज गर्मी के बाद भी पुष्य नक्षत्र में ओरछा पहुंचने वाले श्रद्धालुओं की आस्था में कोई कमी नही दिखाई दी।
रविवार को पुष्य नक्षत्र पर हजारों की संख्या में श्रद्धालु श्रीरामराजा सरकार के दर्शन करने ओरछा पहुंचे। जिले के साथ ही आसपास के क्षेत्रों के लोग इस नक्षत्र विशेष पर दर्शन लाभ लेने के लिए सुबह से ओरछा पहुंचने लगे थे। वहीं कुछ श्रद्धालु तो रात्रि को ही श्रीरामराजा के दरबार में पहुंचे चुके थे। इन लोगों ने यहीं पर पूरी रात भजन कीर्तन किया और सुबह से पवित्र बेतवा नदी में स्नान कर भगवान के दर्शन किए।
पदयात्री भी पहुंचे: मई माह में 44 डिग्री पर चल रहे तापमान में जहां जूतों में लोगों के पैर जल रहे वहीं बुंदेलखण्ड के सैकड़ों श्रद्धालु तपती दोपहरी में नंगे पैर ही पैदल चल कर भगवान के दर्शन करने के लिए ओरछा पहुंचे थे। इन श्रद्धालुओं को देखकर हर को भगवान के प्रति इस उत्कठ श्रद्धा को प्रणाम कर रहा था। दोपहर को राजभोग की आरती के बाद पटबंद होते तक श्रद्धालुओं की संख्या में किसी प्रकार का अंतर नही दिखा। पूरे समय भगवान के दर्शन करने के लिए श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा था।
पुष्य में विराजे थे भगवान: विदित हो कि भगवान श्रीराम का अयोध्या से ओरछा आगमन भी पुष्य नक्षत्र में ही हुआ था। रानीकुंवर गनेश माह में एक बार पुष्य नक्षत्र में ही भगवान को अपने साथ लेकर चलती थी। कहा जाता है कि अयोध्या से ओरछा तक भगवान का आगमन पुष्य ही पुष्य नक्षत्र में हुआ था। इसलिए इस नक्षत्र में भगवान के दर्शन करने का विशेष महात्व माना जाता है।
ओरछा.मनुष्य को अपना चरित्र ऊंचा रखना चाहिए। चरित्र ही मनुष्य को समाज में सम्मान दिलाता है। भगवान ने भी श्रीराम का अवतार लेकर चरित्र को ऊंचा रखने की मार्ग दिखाया है। यह बात श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन कथा व्यास आचार्य मनोज चतुर्वेदी ने कहीं।
स्थानीय संस्कृत विद्यालय में श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन किया जा रहा है। कथा के दूसरे दिन कथा कहते हुए आचार्य मनोज चतुर्वेदी ने लोगों से सचरित्र बनने की बात कहीं। उन्होंने कहा कि चरित्रवान व्यक्ति ही समाज में सम्मान पाता है। मनुष्य की सबसे बड़ी पूंजी उसका चरित्र होती है। चरित्र निर्माण की शिक्षा जहां भगवान श्रीराम के जीवन से मिलती है, वहीं भगवान श्रीकृष्ण हमें कर्म की शिक्षा देते है। मनुष्य को सद्मार्ग पर चलकर अच्दे कर्म करने चाहिए। यह कर्म उसको मृत्युलोक के साथ ही परलोक में भी अच्छा स्थान दिलाते है। विदित हो कि कथा के साथ ही सुबह 8 से 10 बजे तक पार्थिव शिवलिंग का निर्माण और हवन किया जा रहा है। इस आयोजन में क्षेत्र भर के श्रद्धालु शामिल हो रहे है।
निकली कलश यात्रा: गुरूकुल संस्कृत विद्यालय में यह आयोजन 24 मई तक चलेगा। इस आयोजन का शुभारंभ शुक्रवार को कलश यात्रा के साथ किया गया था। यह कलश यात्रा बेतवा नदी से प्रारंभ हुई थी। यहां पर बड़ी संख्या में महिलाओं ने कलश में जल भर कर यात्रा प्रारंभ की थी। इस आयोजन में मुख्य रूप से आचार्य रामकृष्ण मिश्र, नगर परिषद अध्यक्ष राजकुमारी यादव, झांसी सिधेश्वर मंदिर के आचार्य हरिओम पाठक, रामजी वाजपेयी, कैलाश पाठक, संतोष पटेरिया, लाखन यादव, भाजपा के पूर्व जिला अध्यक्ष नंदकिशोर नापित, भरत नामदेव सहित अनेक लोग शामिल हुए। भक्तों की माने तो रामराजा सरकार हमेंशा जड़ चेतन की सेवा में तत्पर रहते हैं। वह यहां स्थाई रूप से हैं लेकिन समस्त जगत में वह विभिन्न रूपों में सेवा कार्य करते हैं एेसे सरकार के दरबार में हम हाजिरी लगाकर हम अपना जीवन धन्य करते हैं।
Published on:
21 May 2018 12:52 pm
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