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श्रीरामकथा के लिए नगर में निकली ऐतिहासिक कलश यात्रा

नउधा भक्ति पर कथा का वाचन करेंगे कथावाचक बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र शास्त्री। मुख्य जजमान राजेंद्र तिवारी सहित पूरे टीकमगढ़ के निवासियों को जजमान मानते हुए कथावाचक धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि श्री रामचरित मानस के लेखक गोस्वामी तुलसीदास हैं, लेकिन असली रचयिता तो महादेव भोलेनाथ ही हैं।

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Shri Ramkatha begins at Ganjikhana Narayan Das Khare Stadium in the city

Shri Ramkatha begins at Ganjikhana Narayan Das Khare Stadium in the city


टीकमगढ़. नउधा भक्ति पर कथा का वाचन करेंगे कथावाचक बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र शास्त्री। मुख्य जजमान राजेंद्र तिवारी सहित पूरे टीकमगढ़ के निवासियों को जजमान मानते हुए कथावाचक धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि श्री रामचरित मानस के लेखक गोस्वामी तुलसीदास हैं, लेकिन असली रचयिता तो महादेव भोलेनाथ ही हैं। उन्होंने कहा कि जिन भक्तों का विश्वास महादेव की तरह और श्रृद्धा पार्वती की तरह हो तो वहां रघुनाथ जी को बुलाना नहीं पड़ता, श्रीरामचंद्र वहां आ ही जाते हैं। उन्होंने कहा कि जो भक्त भगवान शिव को गुरु को मानते हैं उन भक्तों को श्रीराम के लिए भटकना नहीं पड़ता। इसलिए गोस्वामी तुलसीदास ने महादेव को गुरु मानते हुए श्रीरामचरित मानस की रचना की। कथावाचक ने कहा कि टीकमगढ़ संतों की भूमि है। कथावाचक शास्त्री ने कहा कि टीकमगढ़ में नौ दिनों तक नउधा कथा होगी, जिसमें धर्म की गंगा बहेगी। इस दौरान उन्होंने व्यास पीठ से कहा कि शनिवार को शहर में निकली कलश यात्रा अद्भुद ही नहीं ऐतिहासिक भी रही। इस अवसर पर चौपाई गाकर नउधा कथा का श्रीगणेश किया। भव्य पांडाल में हजारों की संख्या में श्रोताओं ने संगीतमय कथा का श्रवण कर धर्मलाभ लिया। इस दौरान भक्तजन झूमते-नाचते भी दिखे। इस दौरान बीच बीच में कथावाचक संत धीरेन्द्र शास्त्री टीकमगढ़ शहर का गुणगाण भी किया।

नगर के गंजीखाना नारायण दास स्टेडियम में शुक्रवार से श्रीमद् भागवत कथा शुरू हुई। सुप्रसिद्ध कथावाचक व बागेश्वर धाम के संत धीरेंद्र शास्त्री ने हजारों की संख्या में उमड़े श्रोताओं को धर्मसभा में संबोधित किया। इससे पूर्व नगर में ऐतिहासिक व भव्य कलशयात्रा निकाली गई। नगर के प्रसिद्ध महेंद्र सागर तालाब से कलश यात्रा गाजे-बाजे व हाथी-घोड़ों बग्गी के साथ भव्य कलश यात्रा निकाली गई। कलश यात्रा में नगर सहित आसपास के गांवों की हजारों की संख्या में महिलाएं पीत वस्त्र पहन कर कलश यात्रा में नाचते गाते हुए चल रही थीं। कलश यात्रा महेंद्र सागर तालाब से तालदरवाजा, पपौरा चौराहा, रतन चौराहा, जवाहर चौराहा, नजाई रोड, लुकमान चौराहे, शैलसागर चौराहा, कोतवाली, गांधी चौराहा, घंटाघर, पुराने बस स्टैंड, जय स्तंभ, पुराना वन विभाग चौक, अंबेडकर चौक होते हुए झिरकी बगिया दरवाजा होते हुए शहीद नारायणदास खरे गंजीखाना स्टेडियम पहुंची। वहीं जगह-जगह कलश यात्रा पर पुष्प वर्षा की गई। कलश यात्रा के तयशुदा रूट पर दोपहर से ही जिले भर से दूर दराज से आनेवाली महिलाएं व बच्चे कलश यात्रा का इंतजार कर रहे थे। वहीं दुकानदार भी अपने-अपने प्रतिष्ठान बंद कर भक्तिभाव से कलश यात्रा के स्वागत सत्कार में जुटे रहे। रास्ते में जगह-जगह बाजारों में कलश यात्रा में शामिल भक्तों के लिए प्याऊ व जलपान की व्यवस्था की गई थी। भव्य स्वागत सत्कार के बाद कलश यात्रा करीब पांच बजे कथा स्थल नारायण दास खरे स्टेडियम पहुंची। स्टेडियम में बने भव्य पांडाल में विधि-विधान व मंत्रोच्चार के बीच व्यासपीठ की स्थापना की गई, जहां से सुप्रसिद्ध बागेश्वर धाम के संत सुप्रसिद्ध कथावाचक धीरेंद्र शास्त्री ने श्रीराम कथा का श्रीगणेश किया। कथा के प्रथम दिन श्रद्धालुओं से खचाखच भर गया। आलम यह रहा कि कथा के लिए पांडाल छोटा पड़ गया।

जजमान के घर पहुंचे कथावाचक शास्त्री
कथावाचक धीरेंद्र शास्त्री तालदरवाजा स्थित जजमान राजेन्द्र तिवारी के निवास पर पहुंचे, जहां कथावाचक शास्त्री का विधि विधान से व भव्य स्वागत सत्कार किया गया। इसके बाद कथावाचक जजमान को साथ लेकर महेंद्र सागर तालाब पहुंचे। महेंद्र सागर तालाब पर विधि विधान से कलश में जल भर कर गाजे बाजे के साथ कलश यात्रा शुरू हुई।

व्यवस्था को लेकर बदले कई रूट
कलश यात्रा को लेकर पुलिस प्रशासन को भी भारी मशक्कत करनी पड़ी। कलश यात्रा में किसी प्रकार का व्यवधान नहीं पड़े इसके लिए ट्रैफिक पुलिस को मुस्तैदी से अपनी ड्यूटी करनी पड़ी। कारी तिगैला से ही मबई होते हुए वाहनों को बस स्टैंड तक पहुंचने की व्यवस्था की गई थी। वहीं शासकीय कालेज के पास महेन्द्र सागर तालाब के पूर्वी छोड़ पर बनी सडक़ से वाहनों को नया बस स्टैंड की ओर रवाना किया गया। शहर में गांधी चौराहे से आगे भी ट्रैफिक पुलिस छोटे-बड़े वाहनों को बाजार की ओर नहीं जाने दे रही थी।

चाकचौबंद रही व्यवस्था
जजमान राजेंद्र तिवारी ने बताया कि जिले भर से गांव-गांव से आने वाली हजारों की संख्या में महिलाओं व भक्तों के लिए ठहरने व भोजन की व्यवस्था की गई थी। वहीं स्टेडियम में वाहनों की व्यवस्था के लिए आयोजन से जुड़े कार्यकर्ता पूरी मुस्तैदी से अपनी जिम्मेदारी निभाई। वहीं व्यवस्थाओं को लेकर गठित टीमों के सदस्यों ने अपनी जिम्मेदारी बखूबी निभाई।