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टीकमगढ़

आचार्य दुर्गाचरण शुक्ल को मिलेगा साहित्य अकादमी का भाषा सम्मान

94 वर्ष के आचार्य दुर्गाचरण शुक्ल को भाषा सम्मान से सम्मानित किया जाएगा। साहित्य अकादमी द्वारा दिए जाने वाले इस सम्मान के लिए उनका चयन किया गया है।

टीकमगढ़Jun 29, 2024 / 05:50 pm

Rizwan ansari

टीकमगढ़। आचार्य दुर्गाचरण शुक्ल।

टीकमगढ़। आचार्य दुर्गाचरण शुक्ल।

विभिन्न संस्कृत ग्रंथों का भाष्य एवं रचनाओं के लिए किया गया चयन

टीकमगढ़. 94 वर्ष के आचार्य दुर्गाचरण शुक्ल को भाषा सम्मान से सम्मानित किया जाएगा। साहित्य अकादमी द्वारा दिए जाने वाले इस सम्मान के लिए उनका चयन किया गया है। धर्म से जुड़ी विभिन्न पुस्तकों की रचना एवं कई संस्कृत की पुस्तकों के अनुवाद के लिए साहित्य अकादमी ने उनका इस सम्मान के लिए चयन किया गया है। साहित्य अकादमी द्वारा उन्हें एक लाख रुपए का नकद पुरस्कार देने के साथ ही सम्मानित किया जाएगा।
शिक्षक के रूप में अपना जीवन निर्वाहन करने के साथ ही धर्म का वैज्ञानिक रूप से प्रस्तुतिकरण करने वाले आचार्य दुर्गाचरण शुक्ल को साहित्य अकादमी सम्मानित करेगी। उनके बुंदेली व्युत्पत्ति कोश, मदन रस बरसे, महषि अगस्त- दृष्टा ऋगवेद मंत्र भाष्य सहित अन्य पुस्तकों की रचना के लिए साहित्य अकादमी द्वारा उनका चयन किया गया है। विदित हो कि उनकी कई पुस्तकें शोध के विद्यार्थियों के लिए उपयोगी साबित हुई है। इसके साथ ही उन्होंने वेदों की कई ऋचाओं का भी हिंदी में अनुवाद किया गया है। 94 वर्ष की आयु में भी उनका लेखन कार्य जारी है।
संस्कृति विभाग ने प्रकाशित कराई महादेव
आचार्य दुर्गाचरण शुक्ल ने वेदों पर भी पुस्तकें लिखी है। इसके साथ ही उनके द्वारा लिखी गई महादेव पुस्तक आज प्रदेश सरकार की अमानत है। उनकी इस पुस्तक का प्रकाशन प्रदेश के संस्कृति विभाग द्वारा कराया गया है। इस पुस्तक में भगवान शिव के बारे में विस्तार से वर्णन किया गया है। पूरे देश में पाए जाने वाले शिवलिंग के साथ ही उनकी अन्य प्रतिमाओं का क्या अर्थ है, वह किस परिप्रेक्ष्य में बनाई गई है, उनका क्या महत्व आदि सभी चीजों का विस्तार से वर्णन किया गया है। इसके साथ ही ब्रह्मवादिनी, वादिनी- दृष्ट मंत्र भाष्य एवं अवदान, शाक्त दर्शनम् एवं शक्ति सूत्रम् सहित अन्य पुस्तकों की रचना की है।
यह सम्मान भी मिले
94 वर्ष के आचार्य दुर्गाचरण शुक्ल ने बीएससी करने के बाद एमए, एमएड के साथ ही साहित्य रत्न और साहित्य आचार्य की शिक्षा ग्रहण की है। इसके साथ ही उन्होंने अपने शोध के लिए वैदिक गणित के प्रोफेसर नरेंद्र पुरी के साथ कार्य किया है। उनके इस कार्य के लिए उन्हें वर्ष 2014 में महर्षि अगस्त्य अलंकरण सम्मान, 2015 में संस्कृतज्ञ सम्मान, 2016 में स्वामी विष्णुतीर्थ आध्यात्मिक ग्रंथ सम्मान एवं 2019 में तुलसी मानस प्रतिष्ठान सम्मान से सम्मानित किया जा चुका है।

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