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पशुधन का दूसरे प्रदेशों में जाने लगा भूसा, परिवहन पर लगाया जाए प्रतिबंध

दिगौड़ा की ओर से खरीदा जा रहा भूसा

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दिगौड़ा की ओर से खरीदा जा रहा भूसा

दिगौड़ा की ओर से खरीदा जा रहा भूसा

आठ से दस हजार रुपए में बिक रहा एक ट्राली भूसा

टीकमगढ़. जिले में भूसा की कमी दिखाई देने लगी है। पशु पालक भूसा की तलाश में गांव-गांव घूमने लगे है। गोशालाओं में भी भूसा कम होने लगा है। एक ट्राली भूसा की कीमत ८ हजार रुपए से १० हजार रुपए तक है। वहीं अन्य जिलों के भूसा खरीददार आ गए है। वह किलो के हिसाब से भूसा खरीद रहे है। जबकि जिले में ४ लाख ५३ हजार गोवंश और भैस वंश है। जिसके चारे की व्यवस्था आगामी दो महीनों में करना मुश्किल होगा। इस कारण से भूसा परिवहन पर प्रतिबंध लगाया जाने की मांग उठ रही है।
पशु पालक धर्मपुरा निवासी कृष्णकांत यादव, बहादुरपुर निवासी इंदराज यादव, फुटेर निवासी रमेश लोधी ने बताया कि ग्वालियर, दतिया और उप्र के भूसा खरीदने वाले जिले में आ गए है। एक क्विंटल कीमत ४५० रुपए और ५०० रुपए लगाए है। एक ट्राली में १० क्विंटल से अधिक स्टॉक होता है। ग्रामीण क्षेत्रों से प्रतिदिन चार से पांच ट्रक और ट्राली भूसा भरकर बाहर जा रहा है। टीकमगढ़ में भूसा की कमी होने से पशुओं को आगामी महीने में परेशान होना पड़ेगा। इसके परिवहन पर प्रतिबंध लगाया जाए।

यह है पशुओं की स्थिति
जिले में पशुओं की संख्या ३१ लाख २३ हजार ३५१ से अधिक है। जिसमें गोवंश २ लाख २३ हजार १६९, भैस २ लाख २९ हजार ७६९, भेड, बकरी २६ लाख ६९ हजार ९३६ और ४७७ घोडा दर्ज है।

गोशालाओं में रखा भूसा भी हो रहा खत्म
टीकमगढ़, बल्देवगढ़, जतारा और पलेरा में आधा सैकड़ा से अधिक गोशालाएं संचालित हो रही है। गायों के हिसाब से भूसा की मात्रा कम है। गोशालाओं में भूखा की कमी दिखाई दे रही है। जिसके कारण गोशाला संचालक की सांसू फूलने लगी है।

फैक्ट फाइल
२२३१६९ गोवंश जिले में
२२९७६९ भैस वंश जिले में
२६६९९३६ भेड बकरी
४७७ घोडा

इनका कहना
गोशाला में भूसा की कमी दिखाई दे रही है। एक ट्राली ९५०० रुपए की आई थी। फिर से भूसा लेना है, वह १३००० रुपए में आ रही है। तीन महीने तक भूसा के लिए परेशान होना पड़ेगा।
उमेश अहिरवार, सरपंच प्रतिनिधि ग्राम पंचायत बौरी टीकमगढ़।

भूसा के परिवहन पर रोक लगाई जाए। आगामी महीनों में भूसा कम हो जाएगा। इससे पशु पालको और गोशाला संचालकों को परेशानी होगी।
रामवती सुरेश अहिरवार सरपंच, ग्राम पंचायत लखैरी बल्देवगढ़।