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शिक्षकों ने खेला एेसा खेल, नही बना मैदान, बच्चे हो रहे परेशान

यह महाविद्यालय में शायकीय राशि के दुरूपयोग का यह पहला मामला नही है। इसके पूर्व भी यहां के प्राचार्य पर इस प्रकार के गंभीर आरोप लगे है।

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टीकमगढ़. एक बार फिर से स्थानीय महाविद्यालय में पदस्थ व्याख्याताओं पर भ्रष्टाचार के दाग लगते दिखाई दे रहे है। महाविद्यालय में छात्रों के हित के लिए आने वाली राशि का दुरूपयोग होने पर मंगलवार को छात्रों ने एक पत्रकारवार्ता आयोजित कर कुछ अधिकारियों पर इसके आरोप लगाए। यह महाविद्यालय में शायकीय राशि के दुरूपयोग का यह पहला मामला नही है। इसके पूर्व भी यहां के प्राचार्य पर इस प्रकार के गंभीर आरोप लगे है।
मंगलवार को महाविद्यालय में अध्ययरत छात्र चंद्रमौली तिवारी ने एक पत्रकारवार्ता आयोजित कर यहां पर पदस्थ व्याख्याताओं पर शासकीय राशि में दुरूपयोग के गंभीर आरोप लगाए है। उन्होंने बताया कि महाविद्यालय में छात्रों के हित के लिए आने वाली राशि का जमकर दुरूपयोग किया जा रहा है। इसकी जानकारी उन्होंने सूचना के अधिकार के तहत प्राप्त की है। उन्होंने बताया कि महाविद्यालय कैरियर मेले के आयोजन में 62 लोगों के भोजन व्यवस्था के लिए 30 हजार रूपए खर्च किए है। यह प्रत्येक व्यक्ति पर 500 रूपए के लगभग पड़ता है, जो बहुत अधिक है।


यह भी लगाए आरोप: उन्होंने आरोप लगाया कि महाविद्यालय में फुटबाल मैदान के लिए 9 लाख 77 हजार रूपए की राशि आई थी। जो पूरी व्यय बताई जा रही है। लेकिन ग्राउण्ड में 1 रूपए का काम भी नही कराया गया है। यह आज भी वीरान पड़ा है और खेलने के लायक नही है। वहीं उन्होंने बताया कि गोल्डन जुबली योजना के तहत कैंटीन के रिनोग्रेशन के लिए 25 लाख रूपए की राशि आई थी। कैंटीन पर भी यह राशि व्यय नही की गई है। वहीं उन्होंने रूसा की मद से भी कैंटीन पर व्यय किया जाना बताया है। जबकि उनका कहना है कि कैंटीन में एक रूपए का भी काम नही हुआ है।
कैसा होगा देश का भविष्य: महाविद्यालय शिक्षा का मंदिर है। यहां देश की भावी पीढ़ी का निर्माण होता है। शिक्षक को नव पीढ़ी के श्रृजक है। ऐसे में यदि यहां पर शिक्षा देने वाले प्राध्यापकों या अधिकारियों पर भ्रष्टाचार के आरोप लगते है, तो यह चिंता का विषय होना चाहिए। यह विषय चिंतनीय इसलिए है, क्यों कि आरोप सीधे शिक्षकों पर लग रहे है। और पहली बार नही, इसके पहले भी यहां पर पदस्थ रहे प्राचार्य पर इस प्रकार के गंभीर आरोप लग चुके है। ऐसे में यह सवाल उठना लाजमी है, कि आखिर ऐसे संस्थानों से निकलने वाले छात्रों का भविष्य क्या होगा। वह अपने शिक्षकों से क्या सीखेंगे। इस मामले को प्रशासन से गंभीरता लेते हुए इसकी पूरी जांच करानी होगी और यदि मामला सही पाया जाता है, तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी चाहिए। ताकि भ्रष्टाचार में लिप्त हो रहे शिक्षा के मंदिर में यह वीणा उठाने वाले छात्र, भविष्य में भी इस प्रकार के कदम उठाने के लिए आगे आए और उन्हें लगे कि समाज में अब भी नैतिकता और ईमानदारी शेष है।