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18 माह में पूरा होना था भवन, आज तक नहीं हुआ निर्माण

टीकमगढ़ बम्होरीकलां ग्रामीण अंचलों में स्वास्थ्य सुविधाएं बेहतर करने के शासन के दावों की हकीकत बम्होरीकलां गांव में साफ नजर आ रही है। जनपद पंचायत पलेरा क्षेत्र की ग्राम पंचायत बम्होरीकलां में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को 6 बिस्तर से 30 बिस्तर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में उन्नत करने के लिए नवीन भवन निर्माण स्वीकृत किया […]

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5.73 करोड़ की लागत, फि र भी ग्रामीण स्वास्थ्य सुविधाओं से वंचित

5.73 करोड़ की लागत, फि र भी ग्रामीण स्वास्थ्य सुविधाओं से वंचित

टीकमगढ़ बम्होरीकलां ग्रामीण अंचलों में स्वास्थ्य सुविधाएं बेहतर करने के शासन के दावों की हकीकत बम्होरीकलां गांव में साफ नजर आ रही है। जनपद पंचायत पलेरा क्षेत्र की ग्राम पंचायत बम्होरीकलां में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को 6 बिस्तर से 30 बिस्तर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में उन्नत करने के लिए नवीन भवन निर्माण स्वीकृत किया गया था, लेकिन चार साल बीत जाने के बाद भी भवन निर्माण कार्य अधूरा पड़ा है।

यह भवन लगभग 5 करोड़ 73 लाख 81 हजार रुपए की लागत से बनाया जाना था। निर्माण कार्य की अवधि 18 माह निर्धारित की गई थी, लेकिन ठेकेदार की लापरवाही और विभागीय उदासीनता के चलते आज तक कार्य पूरा नहीं हो सका। ग्रामीणों का कहना है कि जब स्वास्थ्य केंद्र का उन्नयन हुआ और नया भवन स्वीकृत हुआ, तो उन्हें उम्मीद थी कि गांव में डॉक्टरों, नर्सों और पर्याप्त स्टाफ की व्यवस्था होगी। गंभीर मरीजों को जिला अस्पताल या दूरस्थ शहरों में नहीं ले जाना पड़ेगा, लेकिन चार साल बाद भी अधूरा भवन ग्रामीणों की उम्मीदों पर पानी फेर रहा है।

अनियमितताओं के आरोप

ग्रामीणों ने ठेकेदार पर निर्माण कार्य में अनियमितताओं के आरोप लगाए है। उनका कहना है कि न केवल निर्माण की गति बेहद धीमी है, बल्कि गुणवत्ता को लेकर भी संदेह बना हुआ है। समय सीमा समाप्त होने के बावजूद विभाग द्वारा न तो कोई दंडात्मक कार्रवाई की गई और न ही ठेकेदार पर दबाव बनाया गया।

पेटी ठेका बना बड़ी वजह

जानकारी के अनुसार इस भवन निर्माण कार्य की निविदा पीआईई पीएचई विभाग द्वारा सुरेश चंद्र गुप्ता झांसी को दी गई थी। लेकिन ठेकेदार द्वारा यह कार्य पेटी कांट्रेक्ट पर जतारा के एक ठेकेदार को सौंप दिया गया। इसके बाद से ही निर्माण कार्य की गति और गुणवत्ता पर सवाल उठने लगे।

जिला प्रशासन को भेजा पत्र

ग्रामीणों ने निर्माण कार्य शीघ्र पूरा कराए जाने को लेकर जिला प्रशासन को पत्र भेजकर हस्तक्षेप की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि जल्द कार्य पूरा नहीं कराया गया तो आंदोलन का रास्ता अपनाया जाएगा।