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जिले के एक मात्र 100 यूनिट की क्षमता वाले ब्लड बैंक में 45 यूनिट ब्लड

जिला अस्पताल का ब्लड बैंक।

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जिला अस्पताल का ब्लड बैंक।

जिला अस्पताल का ब्लड बैंक।

प्रशासन और राजनीतिक लोगों का नहीं मिल रहा सहयोग, हर दिन पड़ रही ब्लड की जरूरत

टीकमगढ़.जिला अस्पताल में जिले का एक मात्र ब्लड बैंक है। जिसकी यूनिट क्षमता१०० है, इसमें राजनैतिक और प्रशासनिक सहयोग नहीं है। जिसके कारण ब्लड स्टॉक की कमी हमेशा बनी रहती है। कुछ संगठन और युवाओं के सहयोग से स्टॉक बना हुआ है। अगर इनके द्वारा सहयोग बंद हो जाता है तो रक्त के लिए आमजनों को परेशान होना पड़ेगा।
ब्लड बैंक में विभिन्न ब्लड गु्रपों नहीं मिलने से पीडि़तों को टीकमगढ़ के साथ अन्य जिलों के ब्लड बैंकों में चक्कर काटने पड़ते है। जबकि स्थानीय ब्लड बैंकों में होना जरूरी होता है। लेकिन जिम्मेदारों की लापरवाही के कारण पीडि़तों को खाली हाथ लौटना पड़ता है। संगठन और युवाओं के सहयोग से जैसे तैसे ब्लड की पूर्ति हो पाती है। यह समस्या राजनैतिक दल और प्रशासनिक मशीनरी की अनदेखी के कारण हो रही है। जिसके कारण ब्लड बैंक स्टॉक खाली पड़ा रहता है।

खोजने से भी नहीं मिलते ब्लड डोनर
जिले के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल के ब्लड बैंक में मात्र ४५ यूनिट ब्लड होना कई की जान जोखिम में डाल रहा है। ब्लड बैंक में कमी कारण जिम्मेदारों का ध्यान नहीं देना बताया जा रहा है। बताया जा रहा है कि जिला अस्पताल के ही ब्लड बैंक से निर्धारित शुल्क देकर एक्सचेंज के बाद निजी अस्पतालों में ब्लड दिया जा रहा है। लिहाजा जरूरतमंद लोगों को भारी परेशानी उठानी पड़ रही है। मरीज के परिजनों को ब्लड के लिए भटकना पढ़ रहा है। समान ब्लड ग्रुप का डोनर खोजने में पसीना छूट रहा है।

इस मौसम के आगे रक्तदाता भी पस्त हो गए है। हर दिन सोशल मीडिया में ब्लड की जरूरत के मैसेज भेजे जा रहे है। दूसरे गु्रप के रक्तदाता मिलने के बाद भी ब्लड बैंक में एक्सचेंज में रक्त नहीं मिल पा रहा है। जिला मुख्यालय में एक मात्र ब्लड बैंक है जिनकी क्षमता १०० यूनिट है, लेकिन वर्तमान में ४५ यूनिट ब्लड शेष है।

निगेटिव गु्रप ब्लड की हमेशा रहती है जरूरत
निगेटिव ब्लड गु्रप की कमी तो पूरे साल बनी रहती है, लेकिन इन दिनों ए पॉजिटिव व एबी पॉजिटिव समान्य तौर पर सबसे अधिक रहते है। लेकिन निगेटिव ब्लड गु्रप वाले खोजने से भी नहीं मिलते है। निगेटिव गु्रप ब्लड की जरूरत के लिए पीआरओ गु्रप के साथ अन्य ग्रुपों में विगत दिनों संदेश दौड़ा था।

ब्लड बदलने से भी नहीं हो पा रही ब्लड की कमी दूर
स्वैच्छिक रक्तदान का प्रचार प्रसार किया गया। उसके लिए ब्लड बस आई और शिविर आयोजित किए। जिसमें कुछ ही लोगों ने स्वेच्छा से रक्तदान किया। इसके साथ ही एक बार पुलिस बल ने रक्तदान किया था। उसके बाद कोई भी दिखाई नहीं दिया। अब स्वेच्छिक रक्तदान कम और बदलने वाले अधिक बढ़ गए। इससे रक्त की कमी और बढ़ गई।

इन बातों का रखें विशेष ध्यान
डॉक्टरों का कहना है कि रक्तदान दाता को 24 घंटे पहले से एल्कोहल का सेवन नहीं किया जाना चाहिए। एल्कोहल का नियमित सेवन करने वाले व्यक्ति रक्तदान नहीं करना चाहिए। रक्तदान करने वाले व्यक्ति को हाई फैट फू ड्स अवॉयड करने चाहिए। जैसे बर्गर, आइसक्रीम, नूडल्स, फ्रेंच, फ्राइज आदि आयरन

इनका कहना
तीन वर्षों से हमारी युवा टीम द्वारा रक्तदान किया जा रहा है। संदेश के माध्यम से अस्पताल में ब्लड बैंक में पहुंच जाते है। अभी तक हमतारी टीम ८०० यूनिट ब्लड का दान कर चुकी है। कोई संदेश मिलता है तो तत्कान रक्तदान करने के लिए मौके पर पहुंच जाती है। हम लोग तो भोपाल, ग्वालियर, जबलपुर के साथ अन्य जिलों में भी रक्तदान करने के लिए पहुंच जाते है।
अमर सिंह राजपूत रक्तदान टीम।
जिले के ब्लड बैंक में ब्लड की हमेशा कमी बनी रहती है। इसमें राजनैतिक और प्रशासनिक टीम का सहयोग नहीं है। जिसके कारण ब्लड का स्टॉक कम बना रहता है। कुछ समाजसेवी संगठन और युवा है जो ब्लड बैंक का स्टॉक बनाए हुए है।
डॉ विकास जैन, ब्लड बैंक प्रभारी जिला अस्पताल टीकमगढ़।